सोमवार, 6 जुलाई 2026

जय श्री नंदी सती | Jay Shri Nandi Sati Aarti Lyrics in Hindi and English

जय श्री नंदी सती | Jay Shri Nandi Sati Aarti Lyrics in Hindi and English
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जय श्री नंदी सती आरती माता जगदम्बा की महिमा का गुणगान करने वाली अत्यंत पावन आरती है। इस आरती में माँ नंदी सती से भक्तों के समस्त संकट, भय, दुख और विपत्तियों को दूर करने की प्रार्थना की गई है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ जय श्री नंदी सती आरती का नियमित पाठ करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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इस पवित्र आरती में माँ के दिव्य स्वरूप, भव्य मंदिर, अखण्ड ज्योति, शंख, घड़ियाल, मृदंग तथा सप्त मातृकाओं द्वारा की जाने वाली आराधना का सुंदर वर्णन मिलता है। आरती का प्रत्येक पद भक्तों को माँ की असीम कृपा, करुणा और संरक्षण का अनुभव कराता है।
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इस लेख में आपको जय श्री नंदी सती आरती के सम्पूर्ण बोल (Lyrics) हिंदी एवं English Transliteration में उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी आसानी से इसका पाठ कर सकें। यदि आप प्रतिदिन माता नंदी सती की आरती का पाठ करते हैं, तो यह आपकी भक्ति को और अधिक दृढ़ बनाता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
जय श्री नंदी सती माता की जय!
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जय श्री नंदी सती, 
मैया जय जगदम्बा माता।
अपने भक्त जनों की मैया, 
दूर करो विपत्ति। जय...॥
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अवनि अनन्तर ज्योति अखण्डित, 
पीड़ित चहुँ कुंभमा।
दुर्जन दलन दुखहर्ता की, 
विलस सदा प्रतिपाला। जय...॥
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मरकत मणि मन्दिर अति मनोहर, 
शोभा लखे न परे।
ललित ध्वजा चहुँ ओर, 
कंचन कलश धरे। जय...॥
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घण्टा घनन घड़ियाल बाजत, 
शंख मृदंगा घुरे।
किन्नर गायन करते, 
देव-बन्दन उचरे। जय...॥
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सप्त मातृका करे आरती, 
पुराण ध्यान धरे।
विविध प्रकार के व्यंजन, 
श्री फल भेंट धरे। जय...॥
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संकट विकट विदारिणी, 
नाशिन हो कुमति।
सेवक जन दृढ़ पलनी, 
सुहृद वस सुभगति। जय...॥
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अमल कमल दल लोचनि, 
मोचनि भय तापा।
दास आयो शरण आपकी, 
लाज रखो माता। जय...॥
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या मैया जी की आरती 
प्रतिदिन जो कोई नर गावे।
सर्वसिद्धि नवनिधि, 
मनवांछित फल पावे॥जय...॥
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Jai Shri Nandi Sati,
Maiya Jai Jagadamba Mata.
Apne Bhakt Janon Ki Maiya,
Door Karo Vipatti. Jai...॥
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Avani Anantar Jyoti Akhandit,
Peedit Chahun Kumbhma.
Durjan Dalan Dukhaharta Ki,
Vilas Sada Pratipala. Jai...॥
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Marakat Mani Mandir Ati Manohar,
Shobha Lakhe Na Pare.
Lalit Dhwaja Chahun Or,
Kanchan Kalash Dhare. Jai...॥
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Ghanta Ghanan Ghadiyal Bajat,
Shankh Mridanga Ghure.
Kinnar Gayan Karte,
Dev-Bandan Uchare. Jai...॥
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Sapta Matrika Kare Aarti,
Puran Dhyan Dhare.
Vividh Prakar Ke Vyanjan,
Shri Phal Bhent Dhare. Jai...॥
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Sankat Vikat Vidarini,
Nashin Ho Kumati.
Sevak Jan Dridh Palani,
Suhrid Vas Subhagati. Jai...॥
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Amal Kamal Dal Lochani,
Mochani Bhay Tapa.
Das Aayo Sharan Aapki,
Laaj Rakho Mata. Jai...॥
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Ya Maiya Ji Ki Aarti
Pratidin Jo Koi Nar Gaave.
Sarvasiddhi Navanidhi,
Manvanchhit Phal Paave. Jai...॥
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श्री खाटू श्याम जी आरती | ॐ जय श्री श्याम हरे | Om Jay Shyam Hare Lyrics in Hindi and English

श्री खाटू श्याम जी आरती | ॐ जय श्री श्याम हरे | Om Jay Shyam Hare Lyrics in Hindi and English
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श्री खाटू श्याम जी की आरती भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। "ॐ जय श्री श्याम हरे" आरती का नियमित पाठ करने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान श्री श्याम का आशीर्वाद प्राप्त होता है। राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू धाम में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस आरती का गायन करते हैं और बाबा श्याम के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।
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इस लेख में आपको श्री खाटू श्याम जी आरती (Shri Khatu Shyam Ji Aarti Lyrics) हिंदी तथा Om Jai Shyam Hare Lyrics in English दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे देश-विदेश में रहने वाले सभी भक्त सरलता से आरती का पाठ कर सकें। आरती में बाबा श्याम के दिव्य स्वरूप, भोग, पूजा और उनकी असीम कृपा का सुंदर वर्णन किया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से इस आरती का गायन करने पर भक्तों के दुख-दर्द दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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यदि आप Khatu Shyam Ji Aarti Lyrics in Hindi, Om Jai Shri Shyam Hare Lyrics, Shri Khatu Shyam Ji Aarti PDF, या Khatu Shyam Aarti English Lyrics खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण संग्रह है। श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन इस आरती का पाठ करें तथा बाबा श्याम की कृपा का अनुभव करें। जय श्री श्याम!
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ॐ जय श्री श्याम हरे, 
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, 
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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रतन जड़ित सिंहासन, 
सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, 
कुण्डल श्रवण पड़े॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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गल पुष्पों की माला, 
सिर पर मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर, 
दीपक ज्योति जले॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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मोदक खीर चूरमा, 
सुवरण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, 
सेवा नित्य करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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झांझ कटोरा और घड़ियाल, 
शंख मृदंग घुरे।
भक्त आरती गावें, 
जय-जयकार करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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जो ध्यावे फल पावे, 
सब दुःख से उबरे।
सेवक जन निज मुख से, 
श्री श्याम-श्याम उचरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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'श्री श्याम बिहारीजी' की आरती, 
जो कोई नर गावे।
कहत 'आलूसिंह' स्वामी, 
मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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तन मन धन सब कुछ है तेरा, 
हो बाबा सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, 
क्या लागे मेरा॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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जय श्री श्याम हरे, 
बाबा श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, 
पूर्ण काज करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
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Shri Khatu Shyam Ji Aarti
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Om Jai Shri Shyam Hare,
Baba Jai Shri Shyam Hare.
Khatu Dham Virajat,
Anupam Roop Dhare.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Ratan Jadit Singhasan,
Sir Par Chamar Dhure.
Tan Kesariya Bago,
Kundal Shravan Pade.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Gal Pushpon Ki Mala,
Sir Par Mukut Dhare.
Khevat Dhoop Agni Par,
Deepak Jyoti Jale.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Modak Kheer Churma,
Suvaran Thaal Bhare.
Sevak Bhog Lagavat,
Seva Nitya Kare.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Jhanjh Katora Aur Ghadiyal,
Shankh Mridang Ghure.
Bhakt Aarti Gaaven,
Jai-Jaikaar Kare.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Jo Dhyave Phal Paave,
Sab Dukh Se Ubare.
Sevak Jan Nij Mukh Se,
Shri Shyam-Shyam Uchare.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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'Shri Shyam Bihariji' Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaave.
Kahat 'Aalusingh' Swami,
Manvanchhit Phal Paave.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Tan Man Dhan Sab Kuchh Hai Tera,
Ho Baba Sab Kuchh Hai Tera.
Tera Tujhko Arpan,
Kya Laage Mera.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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Jai Shri Shyam Hare,
Baba Shri Shyam Hare.
Nij Bhakton Ke Tumne,
Poorn Kaaj Kare.
Om Jai Shri Shyam Hare.
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रविवार, 5 जुलाई 2026

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
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श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै ।
तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
नेत्र लाल भिरकुटी विशाला ।
चले बिन पैर सुने बिन काना ।
उनको अपना सर्वस्व दीजे।।
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पाताल लोक में तेरा वासा ।
शंकर विघन विनायक नासा ।
भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।।
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शीश मणि मुख विषम ज्वाला ।
दुष्ट जनों का करे निवाला ।
भगत तेरो अमृत रस पिजे।।
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वेद पुराण सब महिमा गावें ।
नारद शारद शीश निवावें ।
सावल सा से वर तुम दीजे।।
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नोंवी के दिन ज्योत जगावे ।
खीर चूरमे का भोग लगावे ।
रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
आरती श्री नागदेव जी कीजै ।।
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Shri Naagdev Aarti Panchami ki keejai.
Tan man dhan sab arpan keejai.
Netra laal bhirkuti vishaala.
Chale bin pair sune bin kaana.
Unko apna sarvasva deeje.
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Pataal lok mein tera vaasa.
Shankar vighan vinaayak naasa.
Bhagton ka sarv kasht har lijai.
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Sheesh mani mukh visham jwala.
Dusht janon ka kare nivaala.
Bhagat tero amrit ras pije.
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Ved Puraan sab mahima gaaven.
Narad Sharad sheesh nivaaven.
Saaval sa se var tum deeje.
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Nonvi ke din jyot jagaave.
Kheer choorme ka bhog lagaave.
Raamnivaas tan man dhan sab arpan keejai.
Aarti Shri Naagdev ji keejai.
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आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English

आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English
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आरती श्री भैरवनाथ जी की भक्तों के लिए श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। भगवान भैरवनाथ को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं तथा भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश करते हैं। इस आरती में भक्त विनम्र भाव से भैरवनाथ जी से कृपा, मार्गदर्शन और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना करता है।
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आरती के प्रत्येक पद में भैरवनाथ जी की महिमा, उनकी श्वान (कुत्ते) की सवारी, भूत-प्रेतों पर उनके आधिपत्य तथा मेहंदीपुर बालाजी से उनके दिव्य संबंध का सुंदर वर्णन मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से इस आरती का नियमित पाठ करने से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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सुनो जी भैरव लाडिले, 
कर जोड़ कर विनती करूँ।
कृपा तुम्हारी चाहिए, 
मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ।
मैं चरण छूता आपके, 
अर्ज़ी मेरी सुन लीजिये।
मैं हूँ मति का मंद, 
मेरी कुछ मदद तो कीजिये।
महिमा तुम्हारी बहुत, 
कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ।
सुनो जी भैरव…
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करते सवारी श्वान की, 
चारों दिशा में राज्य है।
जितने भूत और प्रेत, 
सबके आप ही सरताज हैं।
हथियार हैं जो आपके, 
उसका क्या वर्णन करूँ।
सुनो जी भैरव…
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माता जी के सामने तुम, 
नृत्य भी करते सदा।
गा गा के गुण अनुवाद से, 
उनको रिझाते हो सदा।
एक सांकली है आपकी, 
तारीफ़ उसकी क्या करूँ।
सुनो जी भैरव…
*
बहुत सी महिमा तुम्हारी, 
मेहंदीपुर सरनाम है।
आते जगत के यात्री, 
बजरंग का स्थान है।
श्री प्रेतराज सरकार के, 
मैं शीश चरणों में धरूँ।
सुनो जी भैरव…
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निशिदिन तुम्हारे खेल से, 
माताजी खुश रहें।
सिर पर तुम्हारे हाथ रख कर, 
आशीर्वाद देती रहें।
कर जोड़ कर विनती करूँ, 
अरु शीश चरणों में धरूँ।
सुनो जी भैरव…
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Aarti Shri Bhairavnath Ji Ki
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Suno Ji Bhairav Laadile, 
Kar Jod Kar Vinati Karun.
Kripa Tumhari Chahiye, 
Main Dhyan Tumhara Hi Dharun.
Main Charan Chhoota Aapke, 
Arzi Meri Sun Lijiye.
Main Hoon Mati Ka Mand, 
Meri Kuchh Madad To Kijiye.
Mahima Tumhari Bahut, 
Kuchh Thodi Si Main Varnan Karun.
Suno Ji Bhairav...
*
Karte Savaari Shwaan Ki, 
Charon Disha Mein Rajya Hai.
Jitne Bhoot Aur Pret, 
Sabke Aap Hi Sartaaj Hain.
Hathiyaar Hain Jo Aapke, 
Uska Kya Varnan Karun.
Suno Ji Bhairav...
*
Maata Ji Ke Saamne Tum, 
Nritya Bhi Karte Sada.
Ga Ga Ke Gun Anuvaad Se, 
Unko Rijhaate Ho Sada.
Ek Saankali Hai Aapki, 
Taarif Uski Kya Karun.
Suno Ji Bhairav...
*
Bahut Si Mahima Tumhari, 
Mehandipur Sarnaam Hai.
Aate Jagat Ke Yaatri, 
Bajrang Ka Sthaan Hai.
Shri Pretraj Sarkar Ke, 
Main Sheesh Charanon Mein Dharun.
Suno Ji Bhairav...
*
Nishidin Tumhare Khel Se, 
Mataji Khush Rahen.
Sir Par Tumhare Haath Rakh Kar, 
Aashirvaad Deti Rahen.
Kar Jod Kar Vinati Karun, 
Aru Sheesh Charanon Mein Dharun.
Suno Ji Bhairav...
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जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English 
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सूर्य देव आरती हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली आरती मानी जाती है। भगवान सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य, सफलता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह आरती विशेष रूप से रविवार के दिन और सूर्य उपासना के समय श्रद्धा एवं भक्ति के साथ गाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
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इस लेख में आपको Jai Kashyap-Nandan Om Jai Aditi-Nandan, जो कि प्रसिद्ध सूर्य देव आरती है, के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्राप्त होंगे। साथ ही इसका सरल उच्चारण (Transliteration), पूजा विधि और आरती का धार्मिक महत्व भी बताया गया है। सूर्य देव को त्रिभुवन के अंधकार को दूर करने वाला और भक्तों के हृदय को शुद्ध करने वाला देव माना गया है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की आराधना से स्वास्थ्य में सुधार, आत्मविश्वास में वृद्धि, नेत्र रोगों में राहत तथा करियर में सफलता प्राप्त होती है। यह आरती व्यक्ति के जीवन में तेज, शक्ति और सकारात्मकता का संचार करती है।
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यदि आप Surya Dev Aarti Lyrics, सूर्य आरती हिंदी में, Surya Bhagwan Aarti, Hindu Aarti Lyrics, या Bhakti Songs Lyrics खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
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जय कश्यप-नन्दन, 
ॐ जय अदिति-नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, 
भक्त-हृदय-चन्दन।। टेक।।
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सप्त-अश्व-रथ राजित, 
एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, 
मानस-मल-हारी।। जय।।
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सुर-मुनि-भूसुर-वंदित, 
विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, 
दिव्य किरण माली।। जय।।
*
सकल-सुकर्म-प्रदाता, 
सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, 
भव-बंधन भारी।। जय।।
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कमल-समूह-विकासक, 
नाशक जय तापा।
सेवत सहज हत अति 
मनुजनि-संतापा।। जय।।
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नेत्र-व्याधि-हर सुन्दर, 
भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि-विमोचन संतत 
परहित-व्रतधारी।। जय।।
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सूर्यदेव करुणाकर, 
अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, 
तत्त्वज्ञान दीजै।। जय।।
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Jai Kashyap-Nandan,
Om Jai Aditi-Nandan.
Tribhuvan-Timir-Nikandan,
Bhakt-Hriday-Chandan.. Tek..
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Sapt-Ashva-Rath Rajit,
Ek Chakradhari.
Dukhahari, Sukhkari,
Manas-Mal-Hari.. Jai..
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Sur-Muni-Bhusur-Vandit,
Vimal Vibhavshali.
Agha-Dal-Dalan Divakar,
Divya Kiran Mali.. Jai..
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Sakal-Sukarm-Pradata,
Savita Shubhkari.
Vishva-Vilochan Mochan,
Bhav-Bandhan Bhari.. Jai..
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Kamal-Samuh-Vikasak,
Nashak Jai Tapa.
Sevat Sahaj Hata Ati
Manujani-Santapa.. Jai..
*
Netra-Vyadhi-Har Sundar,
Bhu-Peeda-Hari.
Vrishti-Vimochan Santat
Parahit-Vratdhari.. Jai..
*
Suryadev Karunakar,
Ab Karuna Kijai.
Har Agyan-Moh Sab,
Tattvagyan Dijai.. Jai..
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आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English

आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English
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आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English

 आरती युगलकिशोर की कीजै भगवान राधा-कृष्ण (युगल किशोर) को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय और मधुर आरती है, जिसका पाठ भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिदिन तथा विशेष अवसरों पर करते हैं। यह आरती श्रीकृष्ण और राधारानी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक शोभा और भक्तों पर बरसने वाली कृपा का सुंदर वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती का नियमित गायन करने से मन को शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

इस लेख में आपको आरती युगलकिशोर की कीजै के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी और English (Transliteration) में उपलब्ध हैं। साथ ही आरती का महत्व, पाठ करने का सही समय, पूजा में इसका स्थान तथा श्री राधा-कृष्ण की आराधना से जुड़े धार्मिक लाभों की जानकारी भी मिलेगी। यदि आप Aarti Yugalkishor Ki Kijiye Lyrics in Hindi, Aarti Yugalkishor Ki Lyrics in English, राधा कृष्ण आरती, युगल किशोर आरती, या Radha Krishna Aarti Lyrics खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण और उपयोगी स्रोत है।

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आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन धन न्योछावर कीजै॥
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गौरश्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का रूप नयन भरि पीजै॥
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रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
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ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी॥
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फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
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कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
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श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल नर नारी॥
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नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
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Aarti Yugalkishor Ki Kijiye
Tan Man Dhan Nayochawar Kijiye
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Gorshyam Mukh Nirkhan Lijiye
Hari Ka Rup Nayan Bhari Pijiye
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Ravi Shashi Koti Badan Ki Shobha
Tahi Nirkhi Mero Mann Lobha
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Odhe Neel Peet Pat Sari
Kunjbihari Girivardhari
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Fulan Sej  Phul Ki Mala
Ratan Singhasan Baatai Nandlal
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Kanchan Thar Kapoor Ki Baati 
Hari Aae Nirmal Bhai Chati
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Sri Purushotam Girivardhari
Aarti Kare Sakal Nar Nari 
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Nandnandan Brijbhan Kishori 
Parmanand Sawami Avichal Jori 
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बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English 
बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की नियमित पूजा, उपासना और आरती करने से कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। इसलिए श्रद्धा और विधिपूर्वक बुध देव की आराधना करने से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा बोलने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
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ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह के शुभ होने पर शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बुध देव की कृपा लाभ, आर्थिक प्रगति और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके साथ ही, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मधुरता और बेहतर संवाद स्थापित होने में सहायता मिलती है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह के मजबूत होने से त्वचा, तंत्रिका तंत्र (नसों) तथा मानसिक संतुलन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित चिकित्सा आवश्यक है। बुध देव की पूजा को आध्यात्मिक आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
*
ॐ जय बुध देव हरे, 
प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट, 
क्षण में दूर करे।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
शीत चंद के सुत तुम, 
शीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे, 
नैन छवि अटके।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
रूप रूप धर तुम ही, 
जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते, 
सब जग के सुखकारी।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
तन पर पीत अम्बर, 
माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु, 
सुर नर मुनि मोहे।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
जो जन तेरी आरती, 
प्रेम सहित गावै।
सो निश्चय ही मनवांछित, 
फल पावै।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
बुध देव की आरती, 
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, 
मनवांछित फल पावै।। 
ॐ जय बुध देव हरे
***
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Om Jai Budh Dev Hare,
Prabhu Jai Budh Dev Hare.
Bhakt Janon Ke Sankat,
Kshan Mein Door Kare.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Sheet Chand Ke Sut Tum,
Sheer Samudra Pragate.
Hem Mukut Sir Sohe,
Nain Chhavi Atake.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Roop Roop Dhar Tum Hi,
Jag Ke Hitkari.
Bhakton Ki Peeda Harte,
Sab Jag Ke Sukhkari.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Tan Par Peet Ambar,
Mala Gal Sohe.
Darshan Pavat Sadhu,
Sur Nar Muni Mohe.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Jo Jan Teri Aarti,
Prem Sahit Gaavai.
So Nishchay Hi Manvanchhit,
Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Budh Dev Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaavai.
Kahat Shivanand Swami,
Manvanchhit Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय सूर्य भगवान | Lyrics in Hindi and English

ॐ जय सूर्य भगवान आरती के सम्पूर्ण बोल पढ़ें और गुनगुनाएं। यह पावन आरती भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, जो जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के आधार हैं। इस पोस्ट में आपको आरती के लिरिक्स, अर्थ और पूजा का महत्व मिलेगा। प्रतिदिन या रविवार के दिन सूर्य भगवान की आरती करने से रोग, अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है तथा सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
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ॐ जय सूर्य भगवान, 
जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, 
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, 
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, 
श्वेत कमलधारी। 
तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे, 
कोटी किरण पसारे। 
तुम हो देव महान।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
ऊषाकाल में जब तुम, 
उदयाचल आते। 
सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा 
जागता तब जग सारा। 
करे सब तब गुणगान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
संध्या में भुवनेश्वर 
अस्ताचल जाते। 
गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में 
हर घर हर आंगन में। 
हो तव महिमा गान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
देव दनुज नर नारी 
ऋषी मुनी वर भजते। 
आदित्य हृदय जपते।।
स्त्रोत ये मंगलकारी, 
इसकी है रचना न्यारी। 
दे नव जीवनदान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
तुम हो त्रिकाल रचियता, 
तुम जग के आधार। 
महिमा तव अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके 
भक्तों को अपने देते। 
बल बृद्धि और ज्ञान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
भूचर जल चर खेचर, 
सब के हो प्राण तुम्हीं। 
सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद पुराण बखाने 
धर्म सभी तुम्हें माने। 
तुम ही सर्व शक्तिमान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
पूजन करती दिशाएं 
पूजे दश दिक्पाल। 
तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी, 
तुम शाश्वत अविनाशी। 
शुभकारी अंशमान ।। 
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
ऊँ जय सूर्य भगवान, 
जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्‍वरूपा, 
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान, 
ॐ जय सूर्य भगवान।।
***
Om Jai Surya Bhagwan,  
Jai ho Dinkar Bhagwan.  
Jagat ke netra swaroopa,  
Tum ho trigun swaroopa.  
Dharat sab hi tav dhyaan,  
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Saarathi Arun hain prabhu tum,  
Shwet kamaldhaari.  
Tum chaar bhujadhaari।।  
Ashwa hain saat tumhaare,  
Koti kiran pasaare.  
Tum ho dev mahaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Ushaakaal mein jab tum,  
Udayachal aate.  
Sab tab darshan paate।।  
Phailaate ujiyaara  
Jaagta tab jag saara.  
Kare sab tab gunagaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Sandhya mein Bhuvaneshwar  
Astaachal jaate.  
Godhan tab ghar aate।।  
Godhooli bela mein  
Har ghar har aangan mein.  
Ho tav mahima gaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Dev danuj nar naari  
Rishi muni var bhajate.  
Aditya hriday japate।।  
Strot ye mangalkaari,  
Iski hai rachna nyaari.  
De nav jeevandaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Tum ho trikaal rachiyata,  
Tum jag ke aadhaar.  
Mahima tav aparampaar।।  
Praanon ka sinchan karke  
Bhakton ko apne dete.  
Bal briddhi aur gyaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Bhoochar jal char khechar,  
Sab ke ho praan tumhi.  
Sab jeevon ke praan tumhi।।  
Ved puraan bakhaane  
Dharm sabhi tumhen maane.  
Tum hi sarv shaktimaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Poojan karti dishaayein  
Pooje dash dikpaal.  
Tum bhuvanon ke pratipaal।।  
Rituein tumhaari daasi,  
Tum shaashwat avinaashi.  
Shubhkaari anshmaan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan।।  
*
Om Jai Surya Bhagwan,  
Jai ho Dinkar Bhagwan.  
Jagat ke netra swaroopa,  
Tum ho trigun swaroopa।।  
Dharat sab hi tav dhyaan,  
Om Jai Surya Bhagwan।।  
***

Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय कश्यप नन्दन | Lyrics in Hindi and English

Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय कश्यप नन्दन | Lyrics in Hindi and English
ॐ जय कश्यप नन्दन – सूर्य देव की पावन आरती के सम्पूर्ण बोल यहाँ पढ़ें। यह आरती भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, जो जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के स्रोत हैं। इस पोस्ट में आपको आरती के लिरिक्स, अर्थ और पूजा का महत्व मिलेगा। प्रतिदिन या रविवार के दिन सूर्य देव की आरती करने से रोग, कष्ट और अज्ञान दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। 
**
ॐ जय कश्यप नन्दन 
प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन 
भक्त हृदय चन्दन॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
सप्त अश्वरथ राजित 
एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी 
मानस मलहारी॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
सुर मुनि भूसुर वन्दित 
विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर 
दिव्य किरण माली॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
सकल सुकर्म प्रसविता 
सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन 
भव-बंधन भारी॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
कमल समूह विकासक 
नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति 
मनसिज संतापा॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
नेत्र व्याधि हर सुरवर 
भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत 
परहित व्रतधारी॥
*
॥ ॐ जय कश्यप॥
*
सूर्यदेव करुणाकर 
अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब 
तत्वज्ञान दीजै॥
*
ॐ जय कश्यप नन्दन 
प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन 
भक्त हृदय चन्दन॥
***
Om Jai Kashyap Nandan  
Prabhu Jai Aditi Nandan.  
Tribhuvan timir nikandan  
Bhakt hriday chandan॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Sapt ashwarath raajit  
Ek chakradhari.  
Dukhahaari, sukhkaari  
Manas malahaari॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Sur muni bhoosur vandit  
Vimal vibhavshaali.  
Agh-dal-dalan divaakar  
Divya kiran maali॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Sakal sukarm prasavita  
Savita shubhkaari.  
Vishva vilochan mochan  
Bhav-bandhan bhaari॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Kamal samooh vikaasak  
Naashak tray taapa.  
Sevat sahaj harat ati  
Manasij santaapa॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Netra vyaadhi har survar  
Bhoo-peeda haari.  
Vrishti vimochan santat  
Parahit vratdhaari॥  
*
॥ Om Jai Kashyap॥  
*
Suryadev karunaakar  
Ab karuna keejai.  
Har agyaan moh sab  
Tatvagyaan deejai॥  
*
Om Jai Kashyap Nandan  
Prabhu Jai Aditi Nandan.  
Tribhuvan timir nikandan  
Bhakt hriday chandan॥  
***

Shri Shani Dev Aarti | जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | Lyrics in Hindi and English

Shri Shani Dev Aarti | जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | Lyrics in Hindi and English
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी आरती के पावन बोल पढ़ें और सुनें। यह प्रसिद्ध शनि देव आरती भगवान शनि को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। इस पोस्ट में आपको पूरी आरती के लिरिक्स, उच्चारण (transliteration) और पूजा का महत्व मिलेगा। शनिवार के दिन शनि देव की कृपा पाने, कष्टों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
**
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
*
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
*
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
*
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
*
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
***
Jai Jai Shri Shanidev bhaktan hitkaari.  
Sooraj ke putra prabhu chhaya mahataari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
*
Shyaam ank vakra drisht chaturbhuja dhaari.  
Neelambar dhaar naath gaj ki aswaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
*
Kreet mukut sheesh rajit dipat hai lilaari.  
Muktan ki maala gale shobhit balihari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
*
Modak mishthaan paan chadhat hain supari.  
Loha til tel urad mahishi ati pyaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
*
Dev danuj rishi muni sumarin nar naari.  
Vishwanaath dharat dhyaan sharan hain tumhaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
***

Shri Shani Dev Aarti | जय जय शनि देव महाराज | Lyrics in Hindi and English

Shri Shani Dev Aarti | जय जय शनि देव महाराज | Lyrics in Hindi and English

श्री शनि देव आरती – जय जय शनि देव महाराज का पाठ और श्रवण करें। यह पवित्र आरती भगवान शनि देव को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। यहाँ आपको पूरी आरती के बोल, अर्थ और शनि देव की पूजा के आध्यात्मिक लाभ मिलेंगे। शनिवार पूजा के लिए विशेष रूप से उपयोगी, यह आरती जीवन के कष्टों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
**
जय जय शनि देव महाराज
जन के संकट हरने वाले।
*
तुम सूर्य पुत्र बलिधारी
भय मानत दुनिया सारी।
साधत हो दुर्लभ काज॥
*
तुम धर्मराज के भाई
जब क्रूरता पाई।
घन गर्जन करते आवाज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
तुम नील देव विकराली
है साँप पर करत सवारी।
कर लोह गदा रह साज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
तुम भूपति रंक बनाओ
निर्धन स्रछंद्र घर आयो।
सब रत हो करन ममताज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
राजा को राज मितयो
निज भक्त फेर दिवायो।
जगत में हो गयी जय जयकार॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
तुम हो स्वामी हम चरणं
सिर करत नमामी जी।
पूर्ण हो जन जन की आस॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
जहाँ पूजा देव तिहारी
करें दीन भाव ते पारी।
अंगीकृत करो कृपाल॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
कब सुधि दृष्टि निहरो
छमीये अपराध हमारो।
है हाथ तिहारे लाज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
हम बहुत विपत्ति घबराए
शरणागत तुम्हरी आये।
प्रभु सिद्ध करो सब काज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
यहाँ विनय करे कर जोर के
भक्त सुनावे जी।
तुम देवन के सिरताज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
जय जय शनि देव महाराज
जन के संकट हरने वाले
***
***
Jai Jai Shani Dev Maharaj  
Jan ke sankat harne wale.  
*
Tum Surya putra balidhari  
Bhay manat duniya saari.  
Saadhat ho durlabh kaaj.  
*
Tum Dharmaraj ke bhai  
Jab krurta paai.  
Ghan garjan karte awaaz.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum neel dev vikarali  
Hai saanp par karat sawaari.  
Kar loh gada rah saaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum bhoopati rank banao  
Nirdhan srachandra ghar aayo.  
Sab rat ho karan mamtaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Raja ko raj mitayo  
Nij bhakt pher divaayo.  
Jagat mein ho gayi jai jaikaar.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum ho swami hum charanam  
Sir karat namaami ji.  
Poorn ho jan jan ki aas.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Jahaan pooja dev tihaari,  
Karen deen bhaav te paari.  
Angikrit karo kripaal.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Kab sudhi drishti niharo  
Chhamiye apradh hamaro.  
Hai haath tihaare laaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Hum bahut vipatti ghabraaye  
Sharanagat tumhari aaye.  
Prabhu siddh karo sab kaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Yahaan vinay kare kar jor ke  
Bhakt sunaave ji.  
Tum devan ke sirtaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Jai Jai Shani Dev Maharaj  
Jan ke sankat harne wale  
***

सोमवार, 16 मार्च 2026

श्री प्रेतराज चालीसा । Shri Pretraj Chalisa: प्रेतराज चालीसा के गायन से होती है हर ...। प्रेतराज चालीसा | Pretraj Chalisa मेहंदीपुर बालाजी के चमत्कार और ...

श्री प्रेतराज चालीसा । Shri Pretraj Chalisa: प्रेतराज चालीसा के गायन से होती है हर ...। प्रेतराज चालीसा | Pretraj Chalisa मेहंदीपुर बालाजी के चमत्कार और ...

 !! दोहा !!
*
गणपति की कर वन्दना, 
गुरु चरणन चित लाए !
प्रेतराज जी का लिखूँ, 
चालीसा हरषाए !!
*
जय जय भूतादिक प्रबल, 
हरण सकल दुख भार !
वीर शिरोमणि जयति, 
जय प्रेतराज सरकार !!
*
!! चौपाई  !!
*
जय जय प्रेतराज जगपावन । 
महाप्रबल दुख ताप नसावन ।।
*
विकट वीर करुणा के सागर।  
भक्त कष्ट हर सब गुण आगर।।
*
रतन जडित सिंहासन सोहे। 
देखत सुर नर मुनि मन मोहे ।।
*
जगमग सिर पर मुकुट सुहावन। 
कानन कुण्डल अति मनभावन ।।
**
धनुष किरपाण बाण अरु भाला। 
वीर वेष अति भृकुटि कराला।।
**
गजारुढ संग सेना भारी। 
बाजत ढोल मृदंग जुझारी ।।
**
छ्त्र चँवर पंखा सिर डोलें ।
भक्त वृन्द मिल जय जय बोलें।।
**
भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा। 
दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा ।।
**
चलत सैन काँपत भु-तलहू ।  
दर्शन करत मिटत कलिमलहू।।
**
घाटा मेंहदीपुर में आकर।
 प्रगटे प्रेतराज गुण सागर ।।
*
लाल ध्वजा उड़ रही गगन में। 
नाचत भक्त मगन हो मन में ।।
*
भक्त कामना पूरन स्वामी। 
बजरंगी के सेवक नामी ।।
*
इच्छा पूरन करने वाले। 
दुख संकट सब हरने वाले ।।
*
जो जिस इच्छा से हैं आते। 
मनवांछित फल सब वे हैं पाते ।।
*
रोगी सेवा में जो हैं आते। 
शीघ्र स्वस्थ होकर घर हैं जाते।।
*
भूत पिशाच जिन्‍न बैताला । 
भागे देखत रुप विकराला।।
*
भौतिक शारीरिक सब पीड़ा । 
मिटा शीघ्र करते हैं क्रीड़ा ।।
*
कठिन काज जग में हैं जेते।
रटत नाम पूरा सब होते ।।
*
तन मन से सेवा जो करते। 
उनके कष्ट प्रभु सब हरते ।।
*
हे करुणामय स्वामी मेरे। 
पड़ा हुआ हूँ दर पे तेरे ।।
*
कोई तेरे सिवा ना मेरा। 
मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा ।।
*
लज्जा मेरी हाथ तिहारे। 
पड़ा हुआ हूँ चरण सहारे।।
*
या विधि अरज करे तन-मन से।
छूटत रोग-शोक सब तन से ।।
*
मेंहदीपुर अवतार लिया है। 
भक्तों का दुख दूर किया है ।।
*
रोगी पागल सन्तति हीना। 
भूत व्याधि सुत अरु धन हीना।।
*
जो जो तेरे द्वारे आते। 
मनवांछित फल पा घर जाते ।।
*
महिमा भूतल पर छाई है। 
भक्तों ने लीला गाई है ।।
*
महन्त गणेश पुरी तपधारी। 
पूजा करते तन-मन वारी ।।
*
हाथों में ले मुदगर घोटे। 
दूत खडे रहते हैं मोटे ।।
*
लाल देह सिन्दूर बदन में। 
काँपत थर-थर भूत भवन में।।
*
जो कोई प्रेतराज चालीसा। 
पाठ करे नित एक अरु बीसा।।
*
प्रातः काल स्नान करावै। 
तेल और सिन्दूर लगावै ।।
*
चन्दन इत्र फुलेल चढावै।
पुष्पन की माला पहनावै ।।
*
ले कपूर आरती उतारें। 
करें प्रार्थना जयति उचारें ।।
*
उन के सभी कष्ट कट जाते। 
हर्षित हो अपने घर जाते ।।
*
इच्छा पूरन करते जन की। 
होती सफल कामना मन की ।।
*
भक्त कष्ट हर अरि कुल घातक।
ध्यान करत छूटत सब पातक ।।
*
जय जय जय प्रेताधिराज जय। 
जयति भुपति संकट हर जय ।।
*
जो नर पढत प्रेत चालीसा। 
रहत ना कबहुँ दुख लवलेशा ।।
*
कह 'सुखराम' ध्यानधर मन में। 
प्रेतराज पावन चरनन में ।।
*
!! दोहा !!
*
दुष्ट दलन जग अघ हरन। 
समन सकल भव शूल ।।
*
जयति भक्त रक्षक सबल। 
प्रेतराज सुख मूल।।
*
विमल वेश अंजनि सुवन।
प्रेतराज बल धाम ।।
*
बसहु निरन्तर मम हृदय ।  
कहत दास सुखराम ।।
***

श्री बालाजी चालीसा - संपूर्ण संग्रह | Shri Balaji Chalisa | Shri Balaji Chalisa with Lyrics _ मेहंदीपुर बालाजी की चालीसा _

श्री बालाजी चालीसा - संपूर्ण संग्रह | Shri Balaji Chalisa | Shri Balaji Chalisa with Lyrics _ मेहंदीपुर बालाजी की चालीसा _

॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय,
के धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखे,
दास स्नेही कल्याण॥
विश्व विदित वर दानी,
संकट हरण हनुमान।
मैंहदीपुर में प्रगट भये,
बालाजी भगवान॥
**
॥ चौपाई ॥
**
जय हनुमान बालाजी देवा।
प्रगट भये यहां तीनों देवा॥
*
प्रेतराज भैरव बलवाना।
कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥
*
मैंहदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का उद्धार किया है॥
*
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर।
संकट वाले आते जहाँ पर॥
*
डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं।
मशान चुड़ैल भूत भूतनीं॥
*
जाके भय ते सब भाग जाते।
स्याने भोपे यहाँ घबराते॥
*
चौकी बन्धन सब कट जाते।
दूत मिले आनन्द मनाते॥
*
सच्चा है दरबार तिहारा।
शरण पड़े सुख पावे भारा॥
*
रूप तेज बल अतुलित धामा।
सन्मुख जिनके सिय रामा॥
*
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।
सबकी होवत पूर्ण आशा॥
*
महन्त गणेशपुरी गुणीले।
भये सुसेवक राम रंगीले॥
*
अद्भुत कला दिखाई कैसी।
कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥
*
ऊँची ध्वजा पताका नभ में।
स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥
*
धर्म सत्य का डंका बाजे।
सियाराम जय शंकर राजे॥
*
आन फिराया मुगदर घोटा।
भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥
*
राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा।
बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥
*
जय हनुमन्त हठीले देवा।
पुरी परिवार करत हैं सेवा॥
*
लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।
अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥
*
दया करे सब विधि बालाजी।
संकट हरण प्रगटे बालाजी॥
*
जय बाबा की जन जन ऊचारे।
कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥
*
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।
तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥
*
देवन विनती की अति भारी।
छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥
*
लांघि उदधि सिया सुधि लाये।
लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥
*
रामानुज प्राण दिवाकर।
शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥
*
केशरी नन्दन दुख भव भंजन।
रामानन्द सदा सुख सन्दन॥
*
सिया राम के प्राण पियारे।
जब बाबा की भक्त ऊचारे॥
*
संकट दुख भंजन भगवाना।
दया करहु हे कृपा निधाना॥
*
सुमर बाल रूप कल्याणा।
करे मनोरथ पूर्ण कामा॥
*
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।
भक्त जन आवे बहु भारी॥
*
मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना।
भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥
*
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे।
रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥
*
अर्जी का आदेश मिलते ही।
भैरव भूत पकड़ते तबही॥
*
कोतवाल कप्तान कृपाणी।
प्रेतराज संकट कल्याणी॥
*
चौकी बन्धन कटते भाई।
जो जन करते हैं सेवकाई॥
*
रामदास बाल भगवन्ता।
मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥
*
जो जन बालाजी में आते।
जन्म जन्म के पाप नशाते॥
*
जल पावन लेकर घर जाते।
निर्मल हो आनन्द मनाते॥
*
क्रूर कठिन संकट भग जावे।
सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥
*
जो सत पाठ करे चालीसा।
तापर प्रसन्न होय बागीसा॥
*
कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे।
सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥
*
॥ दोहा ॥
*
मन्द बुद्धि मम जानके,
क्षमा करो गुणखान।
संकट मोचन क्षमहु मम,
दास स्नेही कल्याण॥
***

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

जय जगदीश हरे आरती — अर्थ, इतिहास, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Aarti Lyrics in Hindi and English

जानिए “जय जगदीश हरे” आरती का भाव, प्रसार और कैसे यह भक्ति जीवन में शांति एवं समृद्धि ला सकती है। जरूर पढ़ें
*
“जय जगदीश हरे” आरती हिंदू भक्ति परंपरा की अत्यंत प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु / जगदीश को समर्पित है और प्रायः प्रातः और संध्या समय पूजा आयोजन में पाठ की जाती है। आरती के मूल भाव है — प्रभु की स्तुति, आश्रय प्रार्थना, भक्त की अनुग्रह याचना। यह आरती ईश्वर को अनादि, अनंत, अविनाशी, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी मानते हुए स्तुति करती है। भक्त स्वयम् को पापी, कलुषित एवं छोटा मानता है और ईश्वर से दया, आश्रय एवं मोक्ष की याचना करता है। यह आरती हमारे देश में सबसे अधिक गायी जाने वाली आरतियों में गिनी जाती है। मंदिरों, घरों, भजन मंडली और धार्मिक आयोजनों में इसे संध्या और आरती समय नियमित रूप से गाया जाता है। इसके भाव एवं सरलता से यह आम भक्तों तक भी पहुँची। यह भजन गीतप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्‍तक भजन संग्रह (पॉंचवाँ भाग) पत्र पुष्‍प से लिया गया है। इस हेतु हम पुस्‍तक के सम्‍पादक, प्रकाशक एवं लेखक के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हैं। 

*
जय जगदीश हरे 
प्रभु ! जय जगदीश हरे ! 
मायातीत, महेश्वर, 
मन-वच-बुद्धि परे ॥ जय
*
आदि, अनादि, अगोचर, 
अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनंत, अनामय, 
अमित शक्ति-राशी ॥1॥ जय
*
अमल, अकल, अज, 
अक्षय, अव्यय, अविकारी ।
सत-चित-सुखमय, सुंदर, 
शिव, सत्ताधारी ॥2॥ जय
*
विधि, हरि, शंकर, गणपति, 
सूर्य, शक्तिरूपा ।
विश्व-चराचर तुमहीं, 
तुमहीं जग-भूपा ॥3॥ जय
*
माता-पिता-पितामह-
स्वामि-सुहृद-भर्ता ।
विश्वोत्पादक-पालक-
रक्षक-संहर्ता ।।4।। जय
*
साक्षी, शरण, सखा, प्रिय, 
प्रियतम, पूर्ण, प्रभो ।
केवल, काल, कलानिधि, 
कालातीत, विभो ॥5॥ जय
*
राम-कृष्ण, करुणामय, 
प्रेमामृत-सागर ।
मनमोहन, मुरलीधर, 
नित-नव, नटनागर ॥6॥ जय
*
सब विधि हीन, मलिनमति, 
हम अति पातकिजन ।
प्रभु-पद-विमुख अभागी, 
कलि-कलुषित तन-मन ॥7॥ जय
*
आश्रय-दान दयार्णव ! 
हम सबको दीजे ।
पाप-ताप हर हरि ! सब, 
निज-जन कर लीजे ॥ 8 ॥ जय
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जय जगदीश हरे | जगदीश्‍वर की आरती | Aarti Lyrics in Hindi and English

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Jai Jagdish Hare
Prabhu! Jai Jagdish Hare!
Mayateet, Maheshwar,
Man-Vach-Buddhi Pare ॥ Jai
*
Aadi, Anaadi, Agochar,
Avichal, Avinaashi.
Atul, Anant, Anamay,
Amit Shakti-Raashi ॥1॥ Jai
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Amal, Akal, Aj,
Akshay, Avyay, Avikaari.
Sat-Chit-Sukhmay, Sundar,
Shiv, Sattadhaari ॥2॥ Jai
*
Vidhi, Hari, Shankar, Ganpati,
Surya, Shaktirupa.
Vishv-Charachar Tumheen,
Tumheen Jag-Bhoopa ॥3॥ Jai
*
Mata-Pita-Pitamah-
Swami-Suhrit-Bharta.
Vishvotpaadak-Paalak-
Rakshak-Sanharta ॥4॥ Jai
*
Saakshee, Sharan, Sakha, Priya,
Priyatam, Poorn, Prabho.
Keval, Kaal, Kalaanidhi,
Kaalateet, Vibho ॥5॥ Jai
*
Ram-Krishn, Karunamay,
Premamrit-Sagar.
Manmohan, Murlidhar,
Nit-Nav, Natnaagar ॥6॥ Jai
*
Sab Vidhi Heen, Malinmati,
Hum Ati Paatakijan.
Prabhu-Pad-Vimukh Abhaagi,
Kali-Kalushit Tan-Man ॥7॥ Jai
*
Aashray-Daan Dayaarṇav 
Hum Sabko Deeje.
Paap-Taap Har Hari! Sab,
Nij-Jan Kar Leeje ॥8॥ Jai
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मंगलवार, 30 सितंबर 2025

⚔️👁️ पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध 🕉️🔥

कौन था अन्धकासुर | पौराणिक कथा प्रसंग
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दिति का एक महाबलशाली पुत्र अन्धक था । नेत्र रहते हुए भी वह मदान्ध होने के कारण अन्धों की तरह चलता था। इसी से उसका नाम अन्धक पड़ गया था । उसके आडि तथा वक दो पुत्र थे ।
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तपस्या के प्रभाव के कारण अन्धक देवताओं के लिए अबध्य हो गया था। एक बार जब अवन्ती के कालवन में महादेव पार्वती के साथ क्रीड़ा कर रहे थे, तब अन्धकासुर उन्मत्त-सा वहाँ पहुंचा और मॉं पार्वती का हरण करने की कोशिश करने लगा। तब क्रुद्ध हुए रुद्र तथा अन्धक में भीषण युद्ध हुआ और शङ्कर के पाशुपतास्त्र से घायल होने पर उसके रक्त से अनेक अन्धक उत्पन्न हो गए। रुद्र ने उन अन्धकों को बाणों से आहत कर दिया। किन्तु उन अन्धकों के रुधिर से पुनः सहस्रों अन्धक पैदा हो गये । उत्पन्न होते ही उन अन्धकों ने सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर लिया। तब उन मायावी अन्धकों के नाश के लिए रुद्र ने 197 मातृकाएँ उत्पन्न कीं, जिनमें माहेश्वरी, कौमारी, मालिनी, सौपर्णी, वायव्या आदि प्रमुख थीं । मातृकाओं ने उन अन्धकों का रुधिर पान करना प्रारम्भ किया; किन्तु वे पुनः बढ़ने लगे । तब खिन्न होकर शिव विष्णु की शरण में गए। तब उन्होंने 'शुष्क-रेवती' नामक एक मातृका को उत्पन्न किया। शुष्क रेवती ने क्षणभर में ही उन अन्धकों का रक्त, पी डाला और वे विनाश को प्राप्त हो गये । अन्धकों के नष्ट हो जाने पर अन्धक निराश हो गया। तब भगवान् शङ्कर ने शूलास्‍त्र से उस पर प्रहार किया; किन्तु अन्धक ने शङ्कर को प्रसन्‍न कर लिया और शिव-गणों का स्वामित्व प्राप्त किया।
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पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध

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Diti ka ek Mahabalshaali putra Andhak tha. Netra rahte huye bhi vah madandh hone ke kaaran andhon ki tarah chalta tha. Isi se uska naam Andhak pad gaya tha. Uske Aadi tatha Vaka do putra the.
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Tapasya ke prabhav ke kaaran Andhak devtaon ke liye abadhya ho gaya tha. Ek baar jab Avanti ke Kalavan me Mahadev Parvati ke saath kreeda kar rahe the, tab Andhakasur unmatt-sa vahan pahuncha aur Maa Parvati ka haran karne ki koshish karne laga. Tab kruddh huye Rudra tatha Andhak me bhishan yudh hua aur Shankar ke Pashupatastra se ghaayal hone par uske rakt se anek Andhak utpann ho gaye. Rudra ne un Andhakon ko baanon se aahat kar diya. Kintu un Andhakon ke rudhir se punah sahasron Andhak paida ho gaye. Utpann hote hi un Andhakon ne sampoorn jagat ko vyapt kar liya. Tab un mayavi Andhakon ke naash ke liye Rudra ne 197 Maatrikaayen utpann ki, jinme Maheshwari, Kaumari, Malini, Sauparni, Vaivya adi pramukh thin. Maatrikaon ne un Andhakon ka rudhir paan karna praarambh kiya; kintu ve punah badhne lage. Tab khinn hokar Shiv Vishnu ki sharan me gaye. Tab unhone 'Shushk-Revati' naamak ek Maatrika ko utpann kiya. Shushk Revati ne kshanbhar me hi un Andhakon ka rakt pee daala aur ve vinaash ko praapt ho gaye. Andhakon ke nasht ho jaane par Andhak niraash ho gaya. Tab Bhagwan Shankar ne Shoolastra se us par prahaar kiya; kintu Andhak ne Shankar ko prasann kar liya aur Shiv-ganon ka swaamitva praapt kiya.
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आभार - यह कहानी श्री गौरीनाथ शास्‍त्री द्वारा सम्‍पादित पुस्‍तक पुराण कथा कोष अध्‍ययनमाला तृतीय-पुष्‍पम् से ली गयी है। पुस्‍तक का प्रकाशन 1983 में पौराणिक तथा वैदिक अध्‍ययन अनुसंधान संस्‍थान नैमिषारण्‍य सीतापुर के द्वारा किया गया है।  

शनिवार, 20 सितंबर 2025

जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती

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Goga Jaharveer ki Aarti
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जय -जय जाहरवीर हरे
जय -जय गोगावीर हरे
धरती पर आकर के 
भक्तों के कष्ट हरे ||जय जय||
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जो कोई भक्ति करे प्रेम से 
निसादिन करे प्रेम से 
भागे दुःख परे
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विघ्न हरन  मंगल के दाता
जन -जन का कष्ट हरे
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जेवर राव के पुत्र कहाए
रानी बाछल माता 
*
बागड़ में जन्म लिया गुगा ने 
सब जय -जयकार करे ||जय जय||
*
धर्म कि बेल बढाई निशदिन 
तपस्या रोज करे
*
दुष्ट जनों को दण्ड दिया
जग में रहे आप खरे ||जय -जय||
*
सत्य अहिंसा का व्रत धारा 
झूठ से सदा डरे
*
वचन भंग को बुरा समझ कर
घर से आप निकरे || जय-जय ||
*
माडी में करी तपस्या 
अचरज सभी करे
*
चारों दिशाओं  से भगत आ रहे 
जोड़े हाथ खड़े || जय-जय || 
*
अजर अमर है नाम तुम्हारा 
हे प्रसिद्ध जगत उजियारा
*
भूत  पिशाच निकट नहीं आवे 
जो कोई जाहर  नाम गावे || जय जय ||
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सच्चे मन से जो ध्यान लगावे 
सुख सम्पति घर आवे 
*
नाम तुम्हारा जो कोई गावे 
जन्म जन्म के दुःख बिसरावे || जय-जय ||
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भादो कृष्‍ण नोमी के दिन जो पूजे 
वह विघ्नों से नहीं डरे 
*
जय-जय जाहर वीर हरे
जय श्री गोगा वीर हरे
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जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती
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Jai -Jai Jaharveer Hare
Jai -Jai Gogaveer Hare
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Dharti par aakar ke
Bhakton ke kasht hare ||Jai Jai||
*
Jo koi bhakti kare prem se
Nisadin kare prem se
Bhaage dukh pare
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Vighn haran mangal ke data
Jan -jan ka kasht hare
*
Jewar Rao ke putra kahaaye
Rani Bachhal mata
*
Bagad mein janm liya Guga ne
Sab jai -jaikaar kare ||Jai Jai||
*
Dharm ki bel badhaai nishdin
Tapasya roj kare
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Dusht janon ko dand diya
Jag mein rahe aap khare ||Jai -Jai||
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Satya ahinsa ka vrat dhara
Jhooth se sada dare
*
Vachan bhang ko bura samajh kar
Ghar se aap nikre || Jai-Jai ||
*
Madi mein kari tapasya
Acharaj sabhi kare
*
Charon dishaon se bhagat aa rahe
Jode haath khade || Jai-Jai ||
*
Ajar amar hai naam tumhara
He prasiddh jagat ujiyaara
*
Bhoot pishaach nikat nahin aave
Jo koi Jahar naam gaave || Jai Jai ||
*
Sachche man se jo dhyan lagave
Sukh sampati ghar aave
*
Naam tumhara jo koi gaave
Janm janm ke dukh bisraave || Jai-Jai ||
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Bhado Krishn Nomi ke din jo pooje
Vah vighnon se nahin dare
*
Jai-Jai Jahar Veer Hare
Jai Shri Goga Veer Hare
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महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा : शिकारी चित्रभानु और शिवलिंग पूजन की अद्भुत गाथा

महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा
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महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा
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पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी।
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शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया। जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह वन एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा।
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बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी चढ़ गए। एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची।
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शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, हिरणी बोली- 'मैं गर्भिणी हूं। शीघ्र ही प्रसव करूंगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना।'  शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई। प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए। इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया।
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कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया- 'हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं। कामातुर विरहिणी हूं। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी।' शिकारी ने उसे भी जाने दिया। 
दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर की पूजन भी सम्पन्न हो गई। तभी एक अन्य हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली। शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई। वह तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरणी बोली- 'हे शिकारी! मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी। इस समय मुझे मत मारो।' 
शिकारी हंसा और बोला- 'सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं। मेरे बच्चे भूख-प्यास से व्यग्र हो रहे होंगे।' उत्तर में हिरणी ने फिर कहा- जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी। हे शिकारी! मेरा विश्वास करो, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं। हिरणी का दुखभरा स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के अभाव में तथा भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में ही बेल-वृक्ष पर बैठा बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। 
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पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा। शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला- ' हे शिकारी! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन हिरणियों का पति हूं। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा।' मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा- 'मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं।' 
शिकारी ने उसे भी जाने दिया। इस प्रकार प्रात: हो आई। उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई। पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला। शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया। उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया। थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया।
अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई। जब मृत्यु काल में यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया तथा शिकारी को शिवलोक ले गए। शिवजी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए तथा महाशिवरात्रि के महत्व को जानकर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए।
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Poorv kaal mein Chitrabhanu naamak ek shikari tha. Jaanvaron ki hatya karke vah apne parivaar ko paalta tha. Vah ek sahookar ka karzdaar tha, lekin uska rin samay par na chuka saka. Krodhit sahookar ne shikari ko Shivmath mein bandi bana liya. Sanyog se us din Shivratri thi. Shikari dhyanmagn hokar Shiv-sambandhi dharmik baatein sunta raha. Chaturdashi ko usne Shivratri vrat ki katha bhi suni.
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Shaam hote hi sahookar ne use apne paas bulaya aur rin chukane ke vishay mein baat ki. Shikari agle din saara rin lauta dene ka vachan dekar bandhan se chhoot gaya. Apni dincharya ki bhaanti vah jangal mein shikar ke liye nikla. Lekin dinbhar bandi grih mein rehne ke karan bhookh-pyaas se vyakul tha. Shikar khojta hua vah bahut door nikal gaya. Jab andhkaar ho gaya to usne vichaar kiya ki raat jangal mein hi bitani padegi. Vah van ek talab ke kinare ek bel ke ped par chadh kar raat bitane ka intezar karne laga.
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Bilv vriksh ke neeche Shivling tha jo bilvpatron se dhanka hua tha. Shikari ko uska pata na chala. Padaav banate samay usne jo tahniyaan todi, ve sanyog se Shivling par girti chali gayi. Is prakar dinbhar bhookhe-pyaase shikari ka vrat bhi ho gaya aur Shivling par bilvpatra bhi chadh gaye. Ek pahar raat beet jaane par ek garbhini hirni talab par paani peene pahunchi.
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Shikari ne dhanush par teer chadhakar jyon hi pratyuncha kheenchhi, hirni boli- 'Main garbhini hoon. Sheeghr hi prasav karoongi. Tum ek saath do jeevon ki hatya karoge, jo theek nahin hai. Main bachche ko janm dekar sheeghr hi tumhare samaksh prastut ho jaaoongi, tab maar lena.' Shikari ne pratyuncha dheeli kar di aur hirni jangli jhaadiyon mein lupt ho gayi. Pratyuncha chadhane tatha dheeli karne ke vakt kuch bilv patra anayaas hi toot kar Shivling par gir gaye. Is prakar usse anjaane mein hi pratham prahar ka poojan bhi sampann ho gaya.
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Kuch hi der baad ek aur hirni udhar se nikli. Shikari ki prasannata ka thikaana na raha. Sameep aane par usne dhanush par baan chadhaya. Tab use dekh hirni ne vinamrataapoorvak nivedan kiya- 'He shikari! Main thodi der pehle ritu se nivritt hui hoon. Kaamatur virahini hoon. Apne priya ki khoj mein bhatak rahi hoon. Main apne pati se milkar sheeghr hi tumhare paas aa jaaoongi.' Shikari ne use bhi jaane diya.
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Do baar shikar ko khokar uska maatha thanka. Vah chinta mein pad gaya. Raatri ka aakhri pahar beet raha tha. Is baar bhi dhanush se lag kar kuch belpatra Shivling par ja gire tatha doosre prahar ki poojan bhi sampann ho gayi. Tabhi ek anya hirni apne bachchon ke saath udhar se nikli. Shikari ke liye yeh svarnim avsar tha. Usne dhanush par teer chadhane mein der nahin lagayi. Vah teer chhodne hi wala tha ki hirni boli- 'He shikari! Main in bachchon ko inke pita ke hawaale karke laut aaoongi. Is samay mujhe mat maaro.'
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Shikari hansa aur bola- 'Samne aaye shikar ko chhod doon, main aisa moorkh nahin. Isse pehle main do baar apna shikar kho chuka hoon. Mere bachche bhookh-pyaas se vyagra ho rahe honge.' Uttar mein hirni ne phir kaha- 'Jaise tumhein apne bachchon ki mamta sata rahi hai, theek vaise hi mujhe bhi. He shikari! Mera vishwas karo, main inhein inke pita ke paas chhodkar turant lautne ki pratigya karti hoon.' Hirni ka dukhbhara swar sunkar shikari ko us par daya aa gayi. Usne us mrigi ko bhi jaane diya. Shikar ke abhaav mein tatha bhookh-pyaas se vyakul shikari anjaane mein hi bel-vriksh par baitha belpatra tod-todkar neeche fekta ja raha tha.
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Pau fatne ko hui to ek hasht-pusht mrig usi raste par aaya. Shikari ne soch liya ki iska shikar vah avashya karega. Shikari ki tani pratyuncha dekhkar mrig vineet swar mein bola- 'He shikari! Yadi tumne mujhse poorv aane wali teen mrigiyon tatha chhote-chhote bachchon ko maar daala hai, to mujhe bhi maarne mein vilamb na karo, taaki mujhe unke viyog mein ek kshan bhi dukh na sehna pade. Main un hirniyon ka pati hoon. Yadi tumne unhein jeevandan diya hai to mujhe bhi kuch kshan ka jeevan dene ki kripa karo. Main unse milkar tumhare samaksh upasthit ho jaaoonga.' Mrig ki baat sunti hi shikari ke samne poori raat ka ghatnachakra ghoom gaya. Usne saari katha mrig ko suna di. Tab mrig ne kaha- 'Meri teenon patniyan jis prakar pratigyabaddh hokar gayi hain, meri mrityu se apne dharm ka paalan nahin kar paayengi. Atah jaise tumne unhein vishwaspatra maan kar chhoda hai, vaise hi mujhe bhi jaane do. Main un sabke saath tumhare samne sheeghr hi upasthit hota hoon.'
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Shikari ne use bhi jaane diya. Is prakar praat: ho aayi. Upvaas, raatri-jaagaran tatha Shivling par belpatra chadhne se anjaane mein hi par Shivratri ki pooja poorn ho gayi. Par anjaane mein hi ki hui poojan ka parinaam use tatkaal mila. Shikari ka hinsak hriday nirmal ho gaya. Usmein bhagavadshakti ka vaas ho gaya. Thodi hi der baad vah mrig saparivaar shikari ke samaksh upasthit ho gaya, taaki vah unka shikar kar sake, kintu jangli pashuon ki aisi satyata, saatvikta evam saamuhik prem-bhaavna dekhkar shikari ko badi glani hui. Usne mrig parivaar ko jeevandan de diya.
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Anjaane mein Shivratri ke vrat ka paalan karne par bhi shikari ko moksh ki praapti hui. Jab mrityu kaal mein Yamdoot uske jeev ko le jaane aaye to Shivganon ne unhein vaapas bhej diya tatha shikari ko Shivalok le gaye. Shivji ki kripa se hi apne is janm mein Raja Chitrabhanu apne pichhle janm ko yaad rakh paaye tatha Mahashivratri ke mahatva ko jaankar uska agle janm mein bhi paalan kar paaye.
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महाशिवरात्रि व्रत पर 10 प्रश्नोत्तर (FAQ)
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Q1. महाशिवरात्रि व्रत कब रखा जाता है?
👉 महाशिवरात्रि व्रत फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है।
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Q2. महाशिवरात्रि व्रत का महत्व क्या है?
👉 इस व्रत से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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Q3. महाशिवरात्रि व्रत कौन रख सकता है?
👉 यह व्रत स्त्री, पुरुष, वृद्ध, युवा सभी रख सकते हैं। विशेष रूप से विवाहित स्त्रियां सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना से इसे करती हैं।
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Q4. महाशिवरात्रि व्रत कैसे किया जाता है?
👉 प्रातः स्नान कर संकल्प लें, दिनभर उपवास करें, रातभर जागरण करें और शिवलिंग का जलाभिषेक व पूजन करें।
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Q5. महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए?
👉 व्रतधारी केवल फलाहार कर सकते हैं। फल, दूध, दही, फलाहारी पकवान और पानी का सेवन किया जाता है।
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Q6. क्या महाशिवरात्रि व्रत में नमक खा सकते हैं?
👉 व्रत में साधारण नमक नहीं खाया जाता, लेकिन सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है।
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Q7. शिवलिंग पर अभिषेक किससे करना चाहिए?
👉 शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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Q8. महाशिवरात्रि व्रत की पूजा का सही समय क्या है?
👉 पूजा का सर्वोत्तम समय निशीथ काल (आधी रात) माना जाता है। साथ ही चार प्रहरों में अलग-अलग पूजा भी की जाती है।
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Q9. क्या महाशिवरात्रि व्रत बिना उपवास किए रखा जा सकता है?
👉 हाँ, यदि स्वास्थ्य कारणों से उपवास संभव न हो तो केवल पूजा, जलाभिषेक और रात्रि-जागरण करके भी व्रत किया जा सकता है।
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Q10. महाशिवरात्रि व्रत करने से क्या फल मिलता है?
👉 इस व्रत से पापों का नाश होता है, संतान सुख की प्राप्ति होती है, वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और अंततः मोक्ष प्राप्त होता है।
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