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भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || निर्जला एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha || Nirjala Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi PDF

भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || निर्जला एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha || Nirjala Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi PDF भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha  निर्जला एकादशी व्रत का महत्व एकादशी पूजा सामग्री बहुत समय पहले की बात है। एक बार भीमसेन व्यासजी से कहने लगे कि हे पितामह! भ्राता युधिष्ठिर, माता कुन्‍ती, द्रोपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सब एकादशी का व्रत करने को कहते हैं, परंतु महाराज मैं उनसे कहता हूँ कि भाई मैं भगवान की शक्ति पूजा आदि तो कर सकता हूँ, दान भी दे सकता हूँ परन्‍तु भोजन के बिना नहीं रह सकता। इस पर व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यदि तुम नरक को बुरा और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रत्‍येक मास की दोनों एकादशियों को अन्न मत खाया करो। भीम कहने लगे कि हे पितामह! मैं तो पहले ही कह चुका हूँ कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता। यदि वर्ष भर में कोई एक ही व्रत हो तो वह मैं रख सकता हूँ, क्योंकि मेरे पेट में वृक नाम वाली अग्नि है सो मैं भोजन किए बिना नहीं रह सकता। भोजन करने से वह शान्‍त रहती है, इसलिए पूरा उपवास तो क्या एक समय भी बिना भोजन किए रहन...

श्री तुलसी चालीसा || वृक्ष रूपिणी पावनी || नमो नमो तुलसी गुणकारी || Shri Tulsi Chalisa || Namo Namo Tulsi Gunkari Lyrics in Hindi

श्री तुलसी चालीसा || वृक्ष रूपिणी पावनी || नमो नमो तुलसी गुणकारी || Shri Tulsi Chalisa || Namo Namo Tulsi Gunkari Lyrics in Hindi  वृक्ष रूपिणी पावनी  तुलसी है तव नाम।  विश्‍वपूजिता कृष्‍ण जीवनी  वृंन्‍दा तुम्‍हें प्रणाम ।। नमो नमो तुलसी गुणकारी  तुम त्रिलोक में शुभ हितकारी।  वन उपवन में शोभा तुम्‍हारी  वृक्ष रूप में हो अवतारी।।  देवी देवता अरु नर नारी गावत महिता मात तुम्‍हारी।  जहॉं चरण हो तुम्‍हरे माता  स्‍थान वही पावन हो जाता।।  गोपी तुम्‍हीं गौ लोक निवासी  तुलसी नाम कृष्‍ण की दासी।  अंश रूप थी तुम भगवन की प्राण प्रिये जैसी मोहन की।।  मुरलीधर संग तुमको पाया क्रोध राधे को तुम पर आया। कहा राधा ने श्राप है मेरा मनुज योनि में जन्‍म हो तेरा।।  हरि बोले तुलसी तुम जाओ भरत खंड जा ध्‍यान लगाओ। ब्रह्मा के वरदान फलेंगे नारायण पति रूप मिलेंगे।। राजा धर्मध्‍वज माधवी रानी  जन्‍मी बनकर सुता सयानी।  उपमा कोई काम न आई तब से तुम तुलसी कहलाई।। बद्रिका आश्रम का पथ लीन्‍हा  उत्‍तम तप वहॉं जाकर कीन्‍हा।  फलदाई द...

श्री गुरु चालीसा || ॐ नमो गुरुदेव दयाला || Om Namo Gurudev Dayala || Shri Gurudev Chalisa Lyrics in Hindi || Guru Dev Chalisa || Guru Purnima Chalisa

श्री गुरु चालीसा ||ॐ नमो गुरुदेव दयाला || Om Namo Gurudev Dayala || Shri Gurudev Chalisa Lyrics in Hindi || Guru Dev Chalisa || Guru Purnima Chalisa ।। दोहा ।। ॐ नमो गुरुदेवजी, सबके सरजन हार। व्यापक अंतर बाहर में, पार ब्रह्म करतार।। देवन के भी देव हो, सिमरुं मैं बारम्बार। आपकी किरपा बिना, होवे न भव से पार।। ऋषि-मुनि सब संत जन, जपें तुम्हारा जाप। आत्मज्ञान घट पाय के, निर्भय हो गये आप।। गुरु चालीसा जो पढ़े, उर गुरु ध्यान लगाय। जन्म-मरण भव दुःख मिटे, काल कबहुँ नहिं खाय।। गुरु चालीसा पढ़े-सुने, रिद्धि-सिद्धि सुख पाय। मन वांछित कारज सरें, जन्म सफल हो जाय।। ।। चौपाई ।।   ॐ नमो गुरुदेव दयाला,  भक्तजनों के हो प्रतिपाला।  पर उपकार धरो अवतारा,  डूबत जग में हंस उबारा।।  तेरा दरश करें बड़भागी,  जिनकी लगन हरि से लागी।  नाम जहाज तेरा सुखदाई,  धारे जीव पार हो जाई।।  पारब्रह्म गुरु हैं अविनाशी,  शुद्ध स्वरूप सदा सुखराशी।  गुरु समान दाता कोई नाहीं,  राजा प्रजा सब आस लगायी।।  गुरु सन्मुख जब जीव हो जावे,  कोटि कल्प के पाप नसावे।  ज...

श्री गंगा चालीसा || जय जग जननी हरण अघखानी || Shri Ganga Chalisa || Jay Jag Janani Haran Aghkhani || Lyrics in Hindi

श्री गंगा चालीसा || जय जग जननी हरण अघखानी || Shri Ganga Chalisa || Jay Jag Janani Haran Aghkhani || Lyrics in Hindi ।। दोहा ।।  जय जय जय जग पावनी,  जयति देवसरि गंग।  जय शिव जटा निवासिनी  अनुपम तुंग तरंग।। ।। चौपाई ।। जय जग जननी हरण अघखानी।  आनंद करनि गंग महारानी।।  जय भगीरथी सुरसरि माता।  कलिमल मूल दलिनि विख्याता।।  जय जय जय हनु सुता अघ हननी।  भीष्म की माता जय जय जननी।।  धवल कमल दल सम तनु सजे।  लखी शत शरद चंद्र छवि लाजै।।  वाहन मकर विमल शुचि सोहें।  अमिया कलश कर लखी मन मोहें।।  जाड़त रत्ना कंचन आभूषण।  हिया मणि हार हरणि तम दूषण।।  जग पावनी त्रय ताप नासवनी।  तरल तरंग तंग मन भावनी।।  जो गणपति अति पूज्य प्रधाना।  तिहूं ते प्रथम गंग अस्नाना।।  ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।  श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवी।।  साथी सहस्त्र सगर सुत तारयो।  गंगा सागर तीरथ धारयो।।  अगम तरंग उठ्यो मन भावन।  लखि तीरथ हरिद्वार सुहावन।।  तीरथ राज प्रयाग अक्षयवट।  धरयो मातु पुनि काशी करवट।।...

सिया मनमोहन राम की || आरती श्री रामचन्‍द्र जी की || Siya Manmohan Ram Ki || Shri Ram Chandra Ji Ki Aarty || Lyrics in Hindi

सिया मनमोहन राम की |आरती श्री रामचन्‍द्र जी की | Siya Manmohan Ram Ki | Shri Ram Chandra Ji Ki Aarty | Lyrics in Hindi and English ** सिया मनमोहन राम की  शुभ आरती की जय सिया मनमोहन राम की  शुभ आरती की जय ** राम जी की जय लखन जी की जय सीता सुंदरी स्याम की  शुभ आरती की जय सीता सुंदरी स्याम की  शुभ आरती की जय ** सिया मनमोहन राम की  शुभ आरती की जय ** भरत जी की जय  शत्रुघन जी की जय  भरत जी की जय  शत्रुघन जी की जय वीर हनुमंता लाल की  शुभ आरती की जय वीर हनुमंता लाल की  शुभ आरती की जय ** सिया मनमोहन राम की  शुभ आरती की जय ** मोर मुकट मकराकृत कुण्डल  मोर मुकट मकराकृत कुण्डल दशरथ प्यारे लाल की  शुभ आरती की जय दशरथ प्यारे लाल की  शुभ आरती की जय ** सिया मनमोहन राम की  शुभ आरती की जय ***** सिया मनमोहन राम की |आरती श्री रामचन्‍द्र जी की | Siya Manmohan Ram Ki | Shri Ram Chandra Ji Ki Aarty | Lyrics in Hindi and English ** Siyā manamohan rām kī  Shubh āratī kī jaya Siyā manamohan rām kī  Shubh āratī kī jaya ** Rām jī k...

एकादशी व्रत कथा || Ekadashi Vrat Katha || मोक्षदा एकादशी व्रत कथा || Mokshada Ekadashi Vrat Katha || Lyrics in Hindi

एकादशी व्रत कथा || Ekadashi Vrat Katha || मोक्षदा एकादशी व्रत कथा || Mokshada Ekadashi Vrat Katha || Lyrics in Hindi (चित्र गूगल से साभार) एकादशी व्रत कथा Ekadashi Vrat Katha मोक्षदा एकादशी का महत्त्व Mokshda Ekadashi Ka Mahattva धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी अर्थात उत्पन्ना एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप कृपा करके मुझे मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के विषय में भी बतलाइये। इस एकादशी का क्या नाम है तथा इसके व्रत का क्या विधान है? इसकी विधि क्या है? इसका व्रत करने से किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया यह सब विधानपूर्वक कहिए। भगवान श्रीकृष्ण बोले: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष मे आने वाली इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत मोक्ष देने वाला तथा चिंतामणि के समान सब कामनाएँ पूर्ण करने वाला है। जिससे आप अपने पूर्वजो के दुखों को खत्म कर सकते हैं। इसका माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो। एकादशी व्रत कथा || Ekadashi Vrat Katha गोकुल नाम के नगर में वैखानस नामक राजा राज्य करता था। उसके राज्य में चारों वेदों के ज्ञाता ब्र...

श्री शिव चालीसा || श्री गणेश गिरिजा सुवन || Shri Shiv Chalisa || Shri Ganesh Girija Suvan || जय गिरिजा पति दीन दयाला || Jay Girijapati Deen Dayala || Lyrics in Hindi

श्री शिव चालीसा || श्री गणेश गिरिजा सुवन || Shri Shiv Chalisa || Shri Ganesh Girija Suvan || जय गिरिजा पति दीन दयाला || Jay Girijapati Deen Dayala || Lyrics in Hindi (चित्र गूगल से साभार) ।। दोहा ।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान।। ।। चौपाई ।। जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला।। भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के।। अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए।। वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मुनि मोहे।। मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी।। कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी।। नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे।। कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ।। देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा।। किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी।। तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ।। आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा।। त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई।। किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी।। दानि...

परिक्रमा क्‍या है || कैसे करें परिक्रमा || परिक्रमा का महत्‍त्‍व एवं विधि || Parikrama Kya Hai || Parikrama Kaise Kare || Parikrama ka Mahattva aur Vidhi

परिक्रमा क्‍या है || कैसे करें परिक्रमा || परिक्रमा का महत्‍त्‍व एवं विधि || Parikrama Kya Hai || Parikrama Kaise Kare || Parikrama ka Mahattva aur Vidhi परिक्रमा का महत्व क्या है? परिक्रमा करने की विधि  किस देव की कितनी परिक्रमा करनी चाहिये? परिक्रमा के संबंध में नियम जब हम मंदिर जाते है तो हम भगवान की परिक्रमा जरुर लगाते है। पर क्या कभी हमने ये सोचा है कि देव मूर्ति की परिक्रमा क्यों की जाती है?  शास्त्रों में लिखा है कि जिस स्थान पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो, उसके मध्यबिंदु से लेकर कुछ दूरी तक दिव्य प्रभा अथवा प्रभाव रहता है। यह निकट होने पर अधिक गहरा और दूर होने पर घटता जाता है, इसलिए प्रतिमा के निकट परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल से निकलने वाले तेज की सहज ही प्राप्ति हो जाती है। देवमूर्ति की परिक्रमा सदैव दाएं हाथ की ओर से करनी चाहिए क्योकि दैवीय शक्ति की आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है। बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान दिव्य परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है...

शारदा मैया की आरती || जय शारदे माता || Sharda Maiya Ki Aarti || Jay Sharde Mata || Sharada Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi

शारदा मैया की आरती || जय शारदे माता || Sharda Maiya Ki Aarti || Jay Sharde Mata || Sharada Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi  जय शारदे माता  मैया जय शारदे माता  वीणा पुस्‍तक धारिणी वीणा पुस्‍तक धारिणी  विद्या की दाता  मैया जय शारदे माता जय शारदे माता  मैया जय शारदे माता  वीणा पुस्‍तक धारिणी वीणा पुस्‍तक धारिणी  विद्या की दाता  मैया जय शारदे माता हंस सवारि विराजत भक्‍तों की हितकारी मैया भक्‍तों की हितकारी  तुमको निशदिन पूजत मैया जी को निशदिन पूजत सेवक नर नारी मैया जय शारदे माता कर में हैं फूल कमल के ज्ञान बुद्धि देती  मैया ज्ञान बुद्धि देती अज्ञानी हो ज्ञानी  अज्ञानी हो ज्ञानी हो जग विख्‍याता  मैया जय शारदे माता ब्रह्मा विष्‍णु पूजे पूजे अविनाशी मैया पूजे अविनाशी आके पूजे मैंहर  आके पूजे मैंहर छोड़ के शिव काशी मैया जय शारदे माता अपने पास बुला लो  माता दो शिक्षा ओ माता दो शिक्षा तेरे चरण पखारें तेरे चरण पखारें है सब की इच्‍छा मैया जय शारदे माता जय शारदे माता मैया जय शारदे माता वीणा पुस्‍तक धारिणी वीणा पुस्‍तक धारिणी वि...