सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Friday/शुक्रवार लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा | Shukravar Vrat Katha | शुक्रवार व्रत कथा

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा || Shri Vaibhav Laxmi Vrat Katha || शुक्रवार व्रत कथा || Shukravar Vrat Katha ** ** सुख, शांति, वैभव और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अद्भुत चमत्कारी प्राचीन व्रत ** वैभव लक्ष्मी व्रत करने का नियम Vaibhav Lakshmi Vrat Karne Ka Niyam ** 1. यह व्रत सौभाग्यशाली स्त्रियां करें तो उनका अति उत्तम फल मिलता है, पर घर में यदि सौभाग्यशाली स्त्रियां न हों तो कोई भी स्त्री एवं कुमारिका भी यह व्रत कर सकती है। 2. स्त्री के बदले पुरुष भी यह व्रत करें तो उसे भी उत्तम फल अवश्य मिलता है। 3. यह व्रत पूरी श्रद्धा और पवित्र भाव से करना चाहिए। खिन्न होकर या बिना भाव से यह व्रत नहीं करना चाहिए।  4. यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है। व्रत शुरु करते वक्त 11 या 21 शुक्रवार की मन्नत रखनी पड़ती है और बताई गई शास्त्रीय विधि अनुसार ही व्रत करना चाहिए। मन्नत के शुक्रवार पूरे होने पर विधिपूर्वक और बताई गई शास्त्रीय रीति के अनुसार उद्यापन करना चाहिए। यह विधि सरल है। किन्तु शास्त्रीय विधि अनुसार व्रत न करने पर व्रत का जरा भी फल नहीं मिलता है।  5. एक बार व्रत पूरा करने के पश्चात फिर मन्नत कर...

संकटमोचक पद्मावती स्‍तोत्र लिरिक्‍स || Sankatmochak Padmavati Stotra || Devi Maa Padmavati Jyoti Roop Mahan || देवी मां पद्मावती

संकटमोचक पद्मावती स्‍तोत्र || Sankatmochak Padmavati Stotra || Jay Jay Jay Padmavati Maata ||  जय-जय-जय पद्मावती माता ** ** ।। दोहा ।। ** देवी मां पद्मावती,  ज्योति रूप महान। विघ्न हरो मंगल करो,  करो मात कल्याण। ** ।। चौपाई।। ** जय-जय-जय पद्मावती माता,  तेरी महिमा त्रिभुवन गाता।  मन की आशा पूर्ण करो मां,  संकट सारे दूर करो मां ।। ** तेरी महिमा परम निराली,  भक्तों के दुख हरने वाली। धन-वैभव-यश देने वाली,  शान तुम्हारी अजब निराली।। ** बिगड़ी बात बनेगी तुम से,  नैया पार लगेगी तुम से।  मेरी तो बस एक अरज है,  हाथ थाम लो यही गरज है।। ** चतुर्भुजी मां हंसवाहिनी,  महर करो मां मुक्तिदायिनी।  किस विध पूजूं चरण तुम्हारे,  निर्मल हैं बस भाव हमारे।। ** मैं आया हूं शरण तुम्हारी,  तू है मां जग तारणहारी।  तुम बिन कौन हरे दुख मेरा,  रोग-शोक-संकट ने घेरा।। ** तुम हो कल्पतरु कलियुग की,  तुमसे है आशा सतयुग की।  मंदिर-मंदिर मूरत तेरी,  हर मूरत में सूरत तेरी।। ** रूप तुम्हारे हुए हैं अनगिन,  महिमा बढ़ती जा...

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru || कनकधारा स्तोत्र कथा

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru  श्री कनकधारा स्तोत्र कथा || Shri Kanak Dhara Stotra Katha श्री कनकधारा स्तोत्र अत्यंत दुर्लभ है। यह माता लक्ष्‍मी को अत्‍यधिक प्रिय है और लक्ष्मी प्राप्ति के लिये यह रामबाण उपाय है। दरिद्र भी एकाएक धनोपार्जन करने लगता है। यह अद्भुत स्तोत्र तुरन्‍त फलदायी है। सिर्फ इतना ही नहीं यह अपने आप में स्वयं सिद्ध है। ऐश्वर्य प्रदान करने में सर्वथा समर्थ है। इस स्तोत्र का प्रयोग करने से रंक भी राजा बन सकता है इसमें कोई संशय नहीं है। अगर यह स्तोत्र यंत्र के साथ किया जाये तो लाभ कई गुना अधिक हो जाता है। यह यन्त्र व स्तोत्र के विधान से व्यापारी व्यापार में वृद्धि करता है, दुःख दरिद्रता का विनाश हो जाता है। प्रसिद्ध शास्‍त्रोक्‍त ग्रन्थ "शंकर दिग्विजय" के "चौथे सर्ग में" इस कथा का उल्लेख है।  एक बार शंकराचार्यजी भिक्षा हेतु घूमते-घूमते एक सद्गृहस्थ निर्धन ब्राह्मण के घर पहुंच गए और भिक्षा हेतु याचना करते हुए कहा "भिक्षां देहि"। किन्तु संयोग से इन तेजस्वी अतिथ...

श्री काली चालीसा || Shri Kali Chalisa || Kali Chalisa Lyrics in Hindi Free Download || जयकाली कलिमलहरण || Jaya Kali Kalimalharan || Jay Kali Kalkatte Wali

  श्री काली चालीसा || Shri Kali Chalisa || Kali Chalisa Lyrics in Hindi Free Download || जयकाली कलिमलहरण || Jaya Kali Kalimalharan || Jay Kali Kalkatte Wali ॥दोहा ॥ जयकाली कलिमलहरण, महिमा अगम अपार । महिष मर्दिनी कालिका , देहु अभय अपार ॥ ।। चौपाई।। अरि मद मान मिटावन हारी ।  मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता ।  दुष्टदलन जग में विख्याता ॥ भाल विशाल मुकुट छविछाजै ।  कर में शीश शत्रु का साजै ॥ दूजे हाथ लिए मधु प्याला ।  हाथ तीसरे सोहत भाला ॥ चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे ।  छठे त्रिशूलशत्रु बल जांचे ॥ सप्तम करदमकत असि प्यारी ।  शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥ अष्टम कर भक्तन वर दाता ।  जग मनहरण रूप ये माता ॥ भक्तन में अनुरक्त भवानी ।  निशदिन रटेंॠषी-मुनि ज्ञानी ॥ महशक्ति अति प्रबल पुनीता ।  तू ही काली तू ही सीता ॥ पतित तारिणी हे जग पालक ।  कल्याणी पापीकुल घालक ॥ शेष सुरेश न पावत पारा ।  गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥ तुम समान दाता नहिं दूजा ।  विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥ रूप भयंकर जब तुम धारा ।  दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥ नाम अ...

दुर्गा स्तोत्र || Shri Durga Stotra || Durga Stotra Sanskrit / Hindi Lyrics || Devi Stotra for a prosperous life || जय भगवति देवि || Jaya Bhagawati Devi

दुर्गा स्तोत्र || Shri Durga Stotra || Durga Stotra Sanskrit / Hindi Lyrics || Devi Stotra for a prosperous life || जय भगवति देवि || Jaya Bhagawati Devi ** जय भगवति देवि नमो वरदे  जय पापविनाशिनि बहुफलदे। जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे  प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥ ** जय चन्द्रदिवाकरनेत्रधरे  जय पावकभूषितवक्त्रवरे। जय भैरवदेहनिलीनपरे  जय अन्धकदैत्यविशोषकरे॥२॥ ** जय महिषविमर्दिनि शूलकरे  जय लोकसमस्तकपापहरे। जय देवि पितामहविष्णुनते  जय भास्करशक्रशिरोवनते॥३॥ ** जय षण्मुखसायुधईशनुते  जय सागरगामिनि शम्भुनुते। जय दु:खदरिद्रविनाशकरे  जय पुत्रकलत्रविवृद्धिकरे॥४॥ ** जय देवि समस्तशरीरधरे  जय नाकविदर्शिनि दु:खहरे। जय व्याधिविनाशिनि मोक्ष करे  जय वाञ्छितदायिनि सिद्धिवरे॥५॥ ** एतद्व्यासकृतं स्तोत्रं य: पठेन्नियत: शुचि:। गृहे वा शुद्धभावेन प्रीता भगवती सदा॥६॥ *****   *****

श्री महालक्ष्मी अष्टकम || Shri Mahalakshmi Ashtakam || श्री महालक्ष्‍मी अष्‍टकम संस्‍कृत और हिन्‍दी अनुवाद || Shri Mahalakshmi Ashtakam Sanskrit aur Hindi Anuvad || Mahalakshmi Ashtakam Hindi Sanskrit Lyrics||श्री वैभव लक्ष्‍मी यन्‍त्र || Shri Vaibhav Lakshmi Yantra

श्री महालक्ष्मी अष्टकम || Shri Mahalakshmi Ashtakam || श्री महालक्ष्‍मी अष्‍टकम संस्‍कृत और हिन्‍दी अनुवाद || Shri Mahalakshmi Ashtakam Sanskrit aur Hindi Anuvad || Mahalakshmi Ashtakam Hindi Sanskrit Lyrics || श्री वैभव लक्ष्‍मी यन्‍त्र || Shri Vaibhav Lakshmi Yantra ।। श्री महालक्ष्मी अष्टकम ।। श्री महालक्ष्‍मी अष्‍टकम हिन्‍दी अनुवाद || Shri Mahalakshmi Ashtakam Hindi Lyrics and Anuvaad महालक्ष्मीअष्टकम स्तोत्रम् यः पठेत्भक्तिमानरः।  सर्वसिद्धिमवापनोति राज्यम प्राप्तयोति सर्वदा ।। ।। ॐ श्री गणेशाय नमः  ।। ।। इन्द्र उवाच:  ।। नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठेसुरपूजिते  । शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते||1||  नमस्ते गरुड़ारूढे कोलासुरभयंकरि  । सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते||2|| सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरी  । सर्व दुःखहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते||3|| सिद्धिबुधिप्रदे देवी भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी  । मंत्रमुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते||4|| आद्यन्तरहिते देवी आद्यशक्तिमहेश्वरी  । योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोस्तुते||5|| स्थूलसू...