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फ़रवरी, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आरती श्री रामदेव जी की || Shri Ram Dev Ji Ki Aarti ||

आरती श्री रामदेव जी की || Shri Ram Dev Ji Ki Aarti || ओउम जय श्री रामादे स्वामी जय श्री रामादे। पिता तुम्हारे अजमल मैया मेनादे।। ओउम जय।। रूप मनोहर जिसका घोड़े असवारी। कर में सोहे भाला मुक्तामणि धारी।। ओउम जय।। विष्णु रूप तुम स्वामी कलियुग अवतारी। सुरनर मुनिजन ध्यावे जावे बलिहारी।। ओउम जय।। दुख दलजी का तुमने भर में टारा। सरजीवन भाण को तुमने कर डारा।। ओउम जय।। नाव सेठ की तारी दानव को मारा। पल में कीना तुमने सरवर को खारा।। ओउम जय।। चित्र http://www.sribabaramdev.org से साभार

श्री रामदेव चालीसा || Shri Ram Dev Chalisa ||

श्री रामदेव चालीसा || Shri Ram Dev Chalisa || दोहा श्री गुरु पद नमन करि, गिरा गनेश मनाय। कथूं रामदेव विमल यश, सुने पाप विनशाय।। द्वार केश से आय कर, लिया मनुज अवतार। अजमल गेह बधावणा, जग में जय जयकार।। चौपाई जय जय रामदेव सुर राया, अजमल पुत्र अनोखी माया। विष्णु रूप सुर नर के स्वामी, परम प्रतापी अन्तर्यामी। ले अवतार अवनि पर आये, तंवर वंश अवतंश कहाये। संज जनों के कारज सारे, दानव दैत्य दुष्ट संहारे। परच्या प्रथम पिता को दीन्हा, दूश परीण्डा माही कीन्हा। कुमकुम पद पोली दर्शाये, ज्योंही प्रभु पलने प्रगटाये। परचा दूजा जननी पाया, दूध उफणता चरा उठाया। परचा तीजा पुरजन पाया, चिथड़ों का घोड़ा ही साया। परच्या चैथा भैरव मारा, भक्त जनों का कष्ट निवारा। पंचम परच्या रतना पाया, पुंगल जा प्रभु फंद छुड़ाया। परच्या छठा विजयसिंह पाया, जला नगर शरणागत आया। परच्या सप्तम सुगना पाया, मुवा पुत्र हंसता भग आया। परच्या अष्टम बौहित पाया, जा परदेश द्रव्य बहु लाया। भंवर डूबती नाव उबारी, प्रगट टेर पहुँचे अवतारी। नवमां परच्या वीरम पाया, बनियां आ जब हाल सुनाया। दसवां परच्या पा बिनजारा, मिश्री ...