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सरस्वती आरती | Saraswati Aarti Lyrics in Hindi and English

सरस्वती आरती का परिचय सरस्वती आरती विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित श्रद्धापूर्ण आरती है। इसमें माँ के दिव्य स्वरूप, वीणा, माला, हंस की सवारी और उनकी महिमा का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्तजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आरती का पाठ कर ज्ञान, विवेक और सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं। इस लेख में सरस्वती आरती के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सरलता से इसका पाठ और गायन कर सकें। ** जय सरस्वती माता  मैया जय सरस्वती माता सद्गुण वैभव शालिनि  त्रिभुवन विख्याता ** ॐ जय सरस्वती माता  मैया जय सरस्वती माता  ** चंद्रवदन पद्मासिनि  द्युति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी  अतुल तेजधारी, ** ॐ जय सरस्वती माता  मैया जय सरस्वती माता  ** बाँए कर में वीणा  दाँए कर माला शीश मुकुट मणि सोहे  गल मोतियन माला ** ॐ जय सरस्वती माता  मैया जय सरस्वती माता  ** देवी शरण जो आए  उनका उद्धार किया पैठ मंथरा दासी  रावण संहार किया ** ॐ जय सरस्वती माता  मैया जय सरस्वती माता  ** Saraswati Aarti Ka Parichay...

जय श्री नंदी सती | Jay Shri Nandi Sati Aarti Lyrics in Hindi and English

* जय श्री नंदी सती आरती माता जगदम्बा की महिमा, दिव्य स्वरूप, भव्य मंदिर और अखण्ड ज्योति का सुंदर वर्णन करती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से भय, दुख और संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस लेख में आरती के बोल हिंदी और English Transliteration में दिए गए हैं, ताकि सभी श्रद्धालु सरलता से पाठ कर सकारात्मक ऊर्जा और माँ की असीम कृपा प्राप्त कर सकें। * जय श्री नंदी सती,  मैया जय जगदम्बा माता। अपने भक्त जनों की मैया,  दूर करो विपत्ति। जय...॥ * अवनि अनन्तर ज्योति अखण्डित,  पीड़ित चहुँ कुंभमा। दुर्जन दलन दुखहर्ता की,  विलस सदा प्रतिपाला। जय...॥ * मरकत मणि मन्दिर अति मनोहर,  शोभा लखे न परे। ललित ध्वजा चहुँ ओर,  कंचन कलश धरे। जय...॥ * घण्टा घनन घड़ियाल बाजत,  शंख मृदंगा घुरे। किन्नर गायन करते,  देव-बन्दन उचरे। जय...॥ * सप्त मातृका करे आरती,  पुराण ध्यान धरे। विविध प्रकार के व्यंजन,  श्री फल भेंट धरे। जय...॥ * संकट विकट विदारिणी,  नाशिन हो कुमति। सेवक जन दृढ़ पलनी,  सुहृद वस सुभगति। जय...॥ * अ...

श्री खाटू श्याम जी आरती | ॐ जय श्री श्याम हरे | Om Jay Shyam Hare Lyrics in Hindi and English

* श्री खाटू श्याम जी की आरती श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। “ॐ जय श्री श्याम हरे” आरती के पाठ से भक्तों को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और बाबा श्याम का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। इस लेख में श्री खाटू श्याम जी की आरती के हिंदी और English Lyrics उपलब्ध हैं, जिससे सभी भक्त आसानी से पाठ कर सकें। आरती में बाबा श्याम के दिव्य स्वरूप, पूजा, भोग और उनकी कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। जय श्री श्याम! * ॐ जय श्री श्याम हरे,  बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत,  अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * रतन जड़ित सिंहासन,  सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो,  कुण्डल श्रवण पड़े॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * गल पुष्पों की माला,  सिर पर मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर,  दीपक ज्योति जले॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * मोदक खीर चूरमा,  सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत,  सेवा नित्य करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * झांझ कटोरा और घड़ियाल,  शंख मृदंग घुरे। भक्त आरती गावें,  जय-जयकार करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * जो ध्यावे फल पावे,  सब दुःख से उबरे। सेवक जन निज मुख से,  श...

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

* श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै । तन मन धन सब अर्पण कीजै । नेत्र लाल भिरकुटी विशाला । चले बिन पैर सुने बिन काना । उनको अपना सर्वस्व दीजे।। * पाताल लोक में तेरा वासा । शंकर विघन विनायक नासा । भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।। * शीश मणि मुख विषम ज्वाला । दुष्ट जनों का करे निवाला । भगत तेरो अमृत रस पिजे।। * वेद पुराण सब महिमा गावें । नारद शारद शीश निवावें । सावल सा से वर तुम दीजे।। * नोंवी के दिन ज्योत जगावे । खीर चूरमे का भोग लगावे । रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै । आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। *** Shri Naagdev Aarti Panchami ki keejai. Tan man dhan sab arpan keejai. Netra laal bhirkuti vishaala. Chale bin pair sune bin kaana. Unko apna sarvasva deeje. * Pataal lok mein tera vaasa. Shankar vighan vinaayak naasa. Bhagton ka sarv kasht har lijai. * Sheesh mani mukh visham jwala. Dusht janon ka kare nivaala. Bhagat tero amrit ras pije. * Ved Puraan sab mahima gaaven. Narad Sharad sheesh nivaaven. Saaval sa se var tum deeje. * Nonvi ke din jyot jagaave. Kheer choorme ka bhog lagaave. Raamnivaas t...

आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English

आरती श्री भैरवनाथ जी की श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। भगवान भैरवनाथ को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं तथा भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश करते हैं। इस आरती में उनकी महिमा, श्वान की सवारी, भूत-प्रेतों पर आधिपत्य और मेहंदीपुर बालाजी से संबंध का वर्णन मिलता है। श्रद्धापूर्वक पाठ से भय दूर, आत्मविश्वास, सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। यहाँ आरती हिंदी एवं अंग्रेज़ी लिप्यंतरण सहित उपलब्ध है। * सुनो जी भैरव लाडिले,  कर जोड़ कर विनती करूँ। कृपा तुम्हारी चाहिए,  मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ। मैं चरण छूता आपके,  अर्ज़ी मेरी सुन लीजिये। मैं हूँ मति का मंद,  मेरी कुछ मदद तो कीजिये। महिमा तुम्हारी बहुत,  कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ। सुनो जी भैरव… * करते सवारी श्वान की,  चारों दिशा में राज्य है। जितने भूत और प्रेत,  सबके आप ही सरताज हैं। हथियार हैं जो आपके,  उसका क्या वर्णन करूँ। सुनो जी भैरव… * माता जी के सामने तुम,  नृत्य भी करते सदा। गा गा के गुण अनुवाद से,  उनको रिझाते ह...

जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English  * सूर्य देव आरती हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। भगवान सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य, सफलता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है। विशेष रूप से रविवार को श्रद्धापूर्वक आरती करने की परंपरा है। इस लेख में Jai Kashyap-Nandan Om Jai Aditi-Nandan सूर्य देव आरती के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स, English Transliteration, पूजा विधि और धार्मिक महत्व की जानकारी दी गई है। श्रद्धा से सूर्य आराधना करने से सकारात्मकता, आत्मविश्वास और जीवन में तेज व शक्ति बढ़ने की मान्यता है। * जय कश्यप-नन्दन,  ॐ जय अदिति-नन्दन। त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन,  भक्त-हृदय-चन्दन।। टेक।। * सप्त-अश्व-रथ राजित,  एक चक्रधारी। दुःखहारी, सुखकारी,  मानस-मल-हारी।। जय।। * सुर-मुनि-भूसुर-वंदित,  विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर,  दिव्य किरण माली।। जय।। * सकल-सुकर्म-प्रदाता,  सविता शुभकारी। विश्व-विलोचन मोचन,  भव-बंधन भारी।। जय।। * कमल-समूह-विकासक,  नाशक जय तापा। सेवत सहज हत अत...

आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English

आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English *   आरती युगलकिशोर की कीजै श्री राधा-कृष्ण के दिव्य युगल स्वरूप को समर्पित मधुर भक्तिमय आरती है। इसमें राधारानी और श्रीकृष्ण की सुंदरता, महिमा तथा भक्तों पर उनकी कृपा का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। श्रद्धापूर्वक इसका गायन मन में शांति, भक्ति और सकारात्मकता का संचार करने वाला माना जाता है। इस लेख में आरती युगलकिशोर की कीजै के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी और English Transliteration में दिए गए हैं। साथ ही आरती का महत्व, पूजा में स्थान और पाठ से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की जानकारी भी दी गई है। * आरती युगलकिशोर की कीजै। तन मन धन न्योछावर कीजै॥ * गौरश्याम मुख निरखन लीजै। हरि का रूप नयन भरि पीजै॥ * रवि शशि कोटि बदन की शोभा। ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥ * ओढ़े नील पीत पट सारी। कुंजबिहारी गिरिवरधारी॥ * फूलन सेज फूल की माला। रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥ * कंचन थार कपूर की बाती। हरि आए निर्मल भई छाती॥ * श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी। आरती करें सकल नर नारी॥ * नंदनंदन बृजभान किशोरी। परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥ *** Aarti Yugalkishor Ki ...

बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English  * धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की पूजा और आरती करने से बुध ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभाव कम होने की मान्यता है। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। उनकी आराधना से विचारों में स्पष्टता, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है। बुध की कृपा शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति से भी जोड़ी जाती है। यह पूजा आध्यात्मिक शांति, सकारात्मकता और जीवन में संतुलन बनाए रखने का माध्यम मानी जाती है। * ॐ जय बुध देव हरे,  प्रभु जय बुध देव हरे। भक्त जनों के संकट,  क्षण में दूर करे।।  ॐ जय बुध देव हरे * शीत चंद के सुत तुम,  शीर समुद्र प्रगटे। हेम मुकुट सिर सोहे,  नैन छवि अटके।।  ॐ जय बुध देव हरे * रूप रूप धर तुम ही,  जग के हितकारी। भक्तों की पीड़ा हरते,  सब जग के सुखकारी।।  ॐ जय बुध देव हरे * तन पर पीत अम्बर,  माला गल सोहे। दर्शन पावत साधु,  सुर नर मुनि मोहे।।  ॐ जय बुध देव हरे * जो जन तेरी आरती,  प्रेम सहित गावै...

Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय सूर्य भगवान | Lyrics in Hindi and English

ॐ जय सूर्य भगवान आरती के सम्पूर्ण बोल पढ़ें और गुनगुनाएं। यह पावन आरती भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, जो जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के आधार हैं। इस पोस्ट में आपको आरती के लिरिक्स, अर्थ और पूजा का महत्व मिलेगा। प्रतिदिन या रविवार के दिन सूर्य भगवान की आरती करने से रोग, अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है तथा सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। ** ॐ जय सूर्य भगवान,  जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्र स्वरूपा,  तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान,  ॐ जय सूर्य भगवान।। * सारथी अरुण हैं प्रभु तुम,  श्वेत कमलधारी।  तुम चार भुजाधारी।। अश्व हैं सात तुम्हारे,  कोटी किरण पसारे।  तुम हो देव महान।।  * ॐ जय सूर्य भगवान।। * ऊषाकाल में जब तुम,  उदयाचल आते।  सब तब दर्शन पाते।। फैलाते उजियारा  जागता तब जग सारा।  करे सब तब गुणगान ।।  * ॐ जय सूर्य भगवान।। * संध्या में भुवनेश्वर  अस्ताचल जाते।  गोधन तब घर आते।। गोधुली बेला में  हर घर हर आंगन में।  हो तव महिमा गान ।।  * ॐ जय सूर्य भगवान।। * देव दनुज...

Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय कश्यप नन्दन | Lyrics in Hindi and English

ॐ जय कश्यप नन्दन – सूर्य देव की पावन आरती के सम्पूर्ण बोल यहाँ पढ़ें। यह आरती भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, जो जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के स्रोत हैं। इस पोस्ट में आपको आरती के लिरिक्स, अर्थ और पूजा का महत्व मिलेगा। प्रतिदिन या रविवार के दिन सूर्य देव की आरती करने से रोग, कष्ट और अज्ञान दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।   ** ॐ जय कश्यप नन्दन  प्रभु जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन तिमिर निकंदन  भक्त हृदय चन्दन॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * सप्त अश्वरथ राजित  एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी  मानस मलहारी॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * सुर मुनि भूसुर वन्दित  विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर  दिव्य किरण माली॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * सकल सुकर्म प्रसविता  सविता शुभकारी। विश्व विलोचन मोचन  भव-बंधन भारी॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * कमल समूह विकासक  नाशक त्रय तापा। सेवत सहज हरत अति  मनसिज संतापा॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * नेत्र व्याधि हर सुरवर  भू-पीड़ा हारी। वृष्टि विमोचन संतत  परहित व्रतधारी॥ * ॥ ॐ जय कश्यप॥ * सूर्यदेव करुणाकर  अब करुणा कीजै। हर ...

Shri Shani Dev Aarti | जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | Lyrics in Hindi and English

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी आरती के पावन बोल पढ़ें और सुनें। यह प्रसिद्ध शनि देव आरती भगवान शनि को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। इस पोस्ट में आपको पूरी आरती के लिरिक्स, उच्चारण (transliteration) और पूजा का महत्व मिलेगा। शनिवार के दिन शनि देव की कृपा पाने, कष्टों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। ** जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी । सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव॥ * श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी । नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव॥ * क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी । मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव॥ * मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी । लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव॥ * देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी । विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥ ॥ जय जय श्री शनिदेव॥ *** Jai Jai Shri Shanidev bhaktan hitkaari.   Sooraj ke putra prabhu chhaya mahataari.   ॥ Jai Jai Shri Shanidev॥   * Shyaam ank vakra...

Shri Shani Dev Aarti | जय जय शनि देव महाराज | Lyrics in Hindi and English

श्री शनि देव आरती – जय जय शनि देव महाराज का पाठ और श्रवण करें। यह पवित्र आरती भगवान शनि देव को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। यहाँ आपको पूरी आरती के बोल, अर्थ और शनि देव की पूजा के आध्यात्मिक लाभ मिलेंगे। शनिवार पूजा के लिए विशेष रूप से उपयोगी, यह आरती जीवन के कष्टों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है। ** जय जय शनि देव महाराज जन के संकट हरने वाले। * तुम सूर्य पुत्र बलिधारी भय मानत दुनिया सारी। साधत हो दुर्लभ काज॥ * तुम धर्मराज के भाई जब क्रूरता पाई। घन गर्जन करते आवाज॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * तुम नील देव विकराली है साँप पर करत सवारी। कर लोह गदा रह साज॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * तुम भूपति रंक बनाओ निर्धन स्रछंद्र घर आयो। सब रत हो करन ममताज॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * राजा को राज मितयो निज भक्त फेर दिवायो। जगत में हो गयी जय जयकार॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * तुम हो स्वामी हम चरणं सिर करत नमामी जी। पूर्ण हो जन जन की आस॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * जहाँ पूजा देव तिहारी करें दीन भाव ते पारी। अंगीकृत करो कृपाल॥ जय जय शनि देव महाराज॥ * कब सुधि दृष्टि निहरो छमीये अपराध हमारो। है...

जय जगदीश हरे आरती — अर्थ, इतिहास, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Aarti Lyrics in Hindi and English

* “जय जगदीश हरे” आरती हिंदू भक्ति परंपरा की अत्यंत प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु / जगदीश को समर्पित है और प्रायः प्रातः और संध्या समय पूजा आयोजन में पाठ की जाती है। आरती के मूल भाव है — प्रभु की स्तुति, आश्रय प्रार्थना, भक्त की अनुग्रह याचना। यह आरती ईश्वर को अनादि, अनंत, अविनाशी, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी मानते हुए स्तुति करती है। भक्त स्वयम् को पापी, कलुषित एवं छोटा मानता है और ईश्वर से दया, आश्रय एवं मोक्ष की याचना करता है। यह आरती हमारे देश में सबसे अधिक गायी जाने वाली आरतियों में गिनी जाती है। मंदिरों, घरों, भजन मंडली और धार्मिक आयोजनों में इसे संध्या और आरती समय नियमित रूप से गाया जाता है। इसके भाव एवं सरलता से यह आम भक्तों तक भी पहुँची। यह भजन गीतप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्‍तक भजन संग्रह (पॉंचवाँ भाग) पत्र पुष्‍प से लिया गया है। इस हेतु हम पुस्‍तक के सम्‍पादक, प्रकाशक एवं लेखक के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हैं।  * जय जगदीश हरे  प्रभु ! जय जगदीश हरे !  मायातीत, महेश्वर,  मन-वच-बुद्धि परे ॥ जय * आदि, अनादि, अगोचर,  अविचल, अवि...

जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जाहरवीर जी की आरती लोकदेवता श्री गोगाजी महाराज की श्रद्धापूर्ण आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भक्तजन इस आरती के माध्यम से जाहरवीर जी का स्मरण कर उनकी कृपा, संरक्षण और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। आरती में उनके दिव्य स्वरूप, वीरता, लोक-आस्था और भक्तों के प्रति कृपा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। इस लेख में जाहरवीर आरती के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में तथा Goga Jaharveer Ki Aarti English Transliteration के साथ प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सरलता से इसका पाठ और गायन कर सकें। *** जय -जय जाहरवीर हरे जय -जय गोगावीर हरे *  धरती पर आकर के  भक्तों के कष्ट हरे ||जय जय|| * जो कोई भक्ति करे प्रेम से  निसादिन करे प्रेम से  भागे दुःख परे * विघ्न हरन  मंगल के दाता जन -जन का कष्ट हरे * जेवर राव के पुत्र कहाए रानी बाछल माता  * बागड़ में जन्म लिया गुगा ने  सब जय -जयकार करे ||जय जय|| * धर्म कि बेल बढाई निशदिन  तपस्या रोज करे * दुष्ट जनों को दण्ड दिया जग में रहे आप खरे ||जय -जय|| * सत्य अहिंसा का व्रत धारा  झूठ से सदा डरे * वचन भंग को बुरा समझ कर घर...

श्री झूलेलाल आरती | Jhulelal Ji Aarti Lyrics in Hindi and English

श्री  झूलेलाल जी की आरती पाठ: लाभ, महत्व और धार्मिक मान्यताएँ | Jhulelal Ji Aarti Benefits ** ** श्री झूलेलाल जी सिंधी समाज के प्रमुख आराध्य देवता और जल के रक्षक माने जाते हैं। सिंधु नदी से जुड़ी सिंधी संस्कृति में उनकी आराधना का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। श्रद्धालु विश्वास के साथ उनकी आरती करते हैं तथा सुख, शांति, समृद्धि, संरक्षण और आत्मबल की कामना करते हैं। झूलेलाल जी की आराधना भक्त को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मकता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्रदान करने वाली मानी जाती है। उनकी आरती आज भी श्रद्धा से की जाती है। ** *** ॐ जय दूलह देवा  साईं जय दूलह देवा । पूजा कनि था प्रेमी  सिदुक रखी सेवा ॥ ॐ जय॥  ** तुहिंजे दर दे केई  सजण अचनि सवाली । दान वठन सभु दिलि सां कोन दिठुभ खाली ॥ ॐ जय॥ ** अंधड़नि खे दिनव  अखडियूँ - दुखियनि खे दारुं । पाए मन जूं मुरादूं  सेवक कनि थारू ॥ ॐ जय॥ ** फल फूलमेवा सब्जिऊ  पोखनि मंझि पचिन । तुहिजे महिर मयासा अन्न  बि आपर अपार थियनी ॥ ॐ जय॥ ** ज्योति जगे थी जगु में  लाल तुहिंजी लाली । अमरलाल अच...

आरती संग्रह ।। सभी देवी देवताओं की आरतियों का संग्रह ।। Aarti Sangrah || Sabhi Devi Devtaon Ki Aartiyon ka Sangrah || Arti Sangrah - All Arti Lyrics : Aarti

आरती संग्रह ।। सभी देवी देवताओं की आरतियों का संग्रह ।। Aarti Sangrah || Sabhi Devi Devtaon Ki Aartiyon ka Sangrah|| ** ** आरती वृहस्पति देव की । ॐ जय वृहस्पति देवा । Om Jay Brihaspati Deva | Brihaspati Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ॐ जय वृहस्पति देवा  जय वृहस्पति देवा  छिन छिन भोग लगाऊँ  कदली फल मेवा ॥ॐ॥  ** तुम पूर्ण परमात्मा  तुम अन्तर्यामी   जगत पिता जगदीश्वर  तुम सबके स्वामी ॥ ॐ ॥  ** चरणामृत निज निर्मल  सब पातक हर्ता   सकल मनोरथ दायक  कृपा करो भर्ता ॥ॐ॥  ** तन, मन, धन, अर्पणकर  जो जन शरण पड़े  प्रभु प्रकट तब होकर  आकर द्वार खड़े ॥ॐ ॥  ** दीन दयाल दयानिधि  भक्तन हितकारी  पाप दोष सब हर्ता  भव बन्धन हारी ॥ॐ॥  ** सकल मनोरथ दायक  सब संशय तारी   विषय विकार मिटाओ  सन्तन सुखकारी ॥ॐ॥  ** जो कोई आरती तेरी  प्रेम सहित गावे   जेष्टानन्द, बंद सो  सो निश्चय पावे ॥ॐ॥ ** सब बोलो विष्णु भगवान् की जय  बोलो वृहस्पति देव भगवान्...