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श्रीगणेशकवचम् // Shri Ganesh Kavacham // Shri Ganesh Kavacham in Hindi in Sanskrit // Lyrics in Hindi // Lyrics in English

श्रीगणेशकवचम् // Shri Ganesh Kavacham // Shri Ganesh Kavacham in Hindi in Sanskrit // Lyrics in Hindi // Lyrics in English श्रीगणेशकवचम्  श्रीगणेशाय नमः ॥ ।। गौर्युवाच ।। एषोऽतिचपलो दैत्यान्बाल्येऽपि नाशयत्यहो । अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम।।1।। ***** दैत्या नानाविधा दुष्टाः साधुदेवद्रुहः खलाः । अतोऽस्य कण्ठे किञ्चित्त्वं रक्षार्थं बद्धुमर्हसि ।।2 ।। ***** ।। मुनिरुवाच ।। ध्यायेत्सिंहहतं विनायकममुं दिग्बाहुमाद्ये युगे त्रेतायां तु मयूरवाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् । द्वापारे तु गजाननं युगभुजं रक्ताङ्गरागं विभुम् तुर्ये तु द्विभुजं सिताङ्गरुचिरं सर्वार्थदं सर्वदा ।।3 ।। ***** विनायकः शिखां पातु परमात्मा परात्परः । अतिसुन्दरकायस्तु मस्तकं सुमहोत्कटः ।।4 ।। ***** ललाटं कश्यपः पातु भृयुगं तु महोदरः । नयने भालचन्द्रस्तु गजास्यस्त्वोष्ठपल्लवौ ।।5 ।। ***** जिह्वां पातु गणक्रीडश्चिबुकं गिरिजासुतः। वाचं विनायकः पातु दन्तान् रक्षतु विघ्नहा ।।6 ।। ***** श्रवणौ पाशपाणिस्तु नासिकां चिन्तितार्थदः। गणेशस्तु मुखं कण्ठं पातु देवो गणञ्जयः ।।7 ।। ***** स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविना...

श्रीकाशीविश्वनाथस्तुतिः // Shri Kashi Vishwanath Stutih

श्रीकाशीविश्वनाथस्तुतिः // Shri Kashi Vishwanath Stutih // Lyrics in Hindi // Lyrics in English दुर्गाधीशो द्रुतिज्ञो द्रुतिनुतिविषयो दूरदृष्टिर्दुरीशो दिव्यादिव्यैकराध्यो द्रुतिचरविषयो दूरवीक्षो दरिद्रः । देवैः सङ्कीर्तनीयो दलितदलदयादानदीक्षैकनिष्ठो दानी दीनार्तिहारी भवदवदहनो दीयतां दृष्टिवृष्टिः ॥ 1॥ क्षेत्रज्ञः क्षेत्रनिष्ठः क्षयकलितकलः क्षात्रवर्गैकसेव्यः क्षेत्राधीशोऽक्षरात्मा क्षितिप्रथिकरणः क्षालितः क्षेत्रदृश्यः । क्षोण्या क्षीणोऽक्षरज्ञो क्षरपृथुकलितः क्षीणवीणैकगेयः क्षौरः क्षोणीध्रवर्ण्यः क्षयतु मम बलक्षीणतां सक्षणं सः ॥ 2॥ क्रूरः क्रूरैककर्मा कलितकलकलैः कीर्तनीयः कृतिज्ञः कालः कालैककालो विकलितकर्णः कारणाक्रान्तकीर्तिः । कोपः कोपेऽप्यकुप्यन् कुपितकरकराघातकीलः कृतान्तः कालव्यालालिमालः कलयतु कुशलं वः करालः कृपालुः ॥ 3॥ गौरी स्निह्यतु मोदतां गणपतिः शुण्डामृतं वर्षताद् नन्दीशः शुभवृष्टिमावितनुतां श्रीमान् गणाधीश्वरः । वायुः सान्द्रसुखावहः प्रवहतां देवाः समृद्धादयाः सम्पूर्तिं दधतां सुखस्य नितरां विश्वेश्वरः प्रीयताम् ॥ 4॥ श्रीविश्वेश्वरमन्दिरं प्रविलसेत् सम्पूर्णसिद्धं शुभं पुष्ट...

सूर्य नमस्कार // Surya Namaskar // Sun Salutation

सूर्य नमस्कार // Surya Namaskar // Sun Salutation  सूर्य नमस्कार क्या है // What is Surya Namaskar in hindi? सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना है। यह योग आसन शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है। सूर्य नमस्कार १२ शक्तिशाली योग आसनों का एक समन्वय है, जो एक उत्तम कार्डियो-वॅस्क्युलर व्यायाम भी है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सूर्य नमस्कार करने के क्‍या लाभ हैं ? What are the benefits of doing Surya Namaskar? यदि हम प्रतिदिन नियम से सूर्य नमस्कार का अभ्‍यास करेंगे तो हमें किसी भी तरह के अन्‍य व्‍यायाम एवं योगासन करने की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी। प्रतिदिन सुबह के समय सूर्य के सामने इसे करने से शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में विटामिन डी प्राप्‍त होता है जिससे शरीर को मजबूती मिलने के साथ ही स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है। सूर्य नमस्कार कैसे किया जाता है? //  How to do Surya Namaskar? 1. प्रणामासन // Pranamasana खुले मैदान में योगा मैट के ऊपर खड़े हो जाएं और सूर्य को नमस्कार करने के हिसाब से खड़े हो जाएं। सीधे खड़...

श्री गायत्री चालीसा //Shri Gayatri Chalisa in Hindi// Jagat Janani Mangal Karani Gayatri Sukhdham //जगत जननी मङ्गल करनि गायत्री सुखधाम

श्री गायत्री चालीसा //Shri Gayatri Chalisa in Hindi// Jagat Janani Mangal Karani Gayatri Sukhdham // जगत जननी मंंगल करनि गायत्री सुखधाम ह्रीं  श्रीं   क्लीं   मेधा  प्रभा  जीवन  ज्योति  प्रचण्ड । शान्ति   कान्ति  जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥ 1॥ जगत जननी मंंगल करनि गायत्री सुखधाम । प्रणवों सावित्री स्वधा  स्वाहा  पूरन काम ॥ 2॥ भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी । गायत्री नित कलिमल दहनी ॥ 3॥ अक्षर चौविस परम पुनीता । इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता ॥ 4॥ शाश्वत सतोगुणी सत रूपा । सत्य सनातन सुधा अनूपा । हंसारूढ सितंबर धारी । स्वर्ण कान्ति शुचि गगन-बिहारी ॥ 5॥ पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला । शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥ 6॥ ध्यान धरत पुलकित हित होई । सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई ॥ 7॥ कामधेनु तुम सुर तरु छाया । निराकार की अद्भुत माया ॥ 8॥ तुम्हरी शरण गहै जो कोई । तरै सकल संकट सों सोई ॥ 9॥ सरस्वती लक्ष्मी तुम काली । दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥ 10॥ तुम्हरी महिमा पार न पावैं । जो शारद शत मुख गुन गावैं ॥ 11॥ चार वेद की मात पुनीता । तुम ब्रह्मा...

श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi // Lyrics in Hindi

श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता। मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।। रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैः क्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम्। दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रं ध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम्।। स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् । षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ।।1।। एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्। एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ।।2।। महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम्। महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ।।3।। कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्। कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ।।4।। रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्। रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।5।। पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्। पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।6।। धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम्। होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।7।। फा...

आरती भगवान श्रीशंकर //जयति जयति जग-निवास // Jayati Jayati Jag Nivas // Shankar Bhagwan ki Aarti in Hindi // Lyrics in Hindi

आरती भगवान श्रीशंकर // जयति जयति जग-निवास // Jayati Jayati Jag Nivas // Shankar Bhagwan ki Aarti in Hindi जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। अजर अमर अज अरूप, सत चित आनंदरूप, व्यापक ब्रह्मस्वरूप, भव! भव-भय-हारी ।।  जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। शोभित बिधुबाल भाल, सुरसरिमय जटाजाल, तीन नयन अति विशाल, मदन-दहन-कारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। भक्तहेतु धरत शूल, करत कठिन शूल फूल, हियकी सब हरत हूल, अचल शान्तिकारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। अमल अरुण चरण कमल, सफल करत काम सकल, भक्ति-मुक्ति देत विमल, माया-भ्रम-टारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। कार्तिकेययुत गणेश, हिमतनया सह महेश, राजत कैलास-देश, अकल कलाधारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। भूषण तन भूति व्याल, मुण्डमाल कर कपाल, सिंह-चर्म हस्ति खाल, डमरू कर धारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। अशरण जन नित्य शरण, आशुतोष आर्तिहरण, सब बिधि कल्याण-करण, जय जय त्रिपुरारी ।। जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।। ***** यह भी पढें - सोमवार के पूजन एवं व्रत कथायें   मंगलवार के पूजन एवं व्रत कथायें  बुधवा...

श्री अष्टविनायकस्तोत्रं // Shri Ashtavinayakstotram in Hindi // Lyrics in Hindi

श्री अष्टविनायकस्तोत्रं // Shri Ashtavinayakstotram in Hindi स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लालस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे। लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम्।।   इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम्। श्री अष्टविनायकस्तोत्रं का एक अन्‍य स्‍वरूप भी शास्‍त्रों में प्राप्‍त होता है जो कि निम्‍नानुसार है - स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदं बल्लालं मुरुडं विनायकं मढं चिन्तामणीस्थेवरम्। लेण्याद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरं ग्रामे रांजणसंस्थितं गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम्।। ***** यह भी पढें - सोमवार के पूजन एवं व्रत कथायें   मंगलवार के पूजन एवं व्रत कथायें  बुधवार के पूजन एवं व्रत कथायें  गुरुवार के पूजन एवं व्रत कथायें  शुक्रवार के पूजन एवं व्रत कथायें  शनिवार के पूजन एवं व्रत कथायें रविवार के पूजन एवं व्रत कथायें  *****   *****

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru || कनकधारा स्तोत्र कथा

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru  श्री कनकधारा स्तोत्र कथा || Shri Kanak Dhara Stotra Katha श्री कनकधारा स्तोत्र अत्यंत दुर्लभ है। यह माता लक्ष्‍मी को अत्‍यधिक प्रिय है और लक्ष्मी प्राप्ति के लिये यह रामबाण उपाय है। दरिद्र भी एकाएक धनोपार्जन करने लगता है। यह अद्भुत स्तोत्र तुरन्‍त फलदायी है। सिर्फ इतना ही नहीं यह अपने आप में स्वयं सिद्ध है। ऐश्वर्य प्रदान करने में सर्वथा समर्थ है। इस स्तोत्र का प्रयोग करने से रंक भी राजा बन सकता है इसमें कोई संशय नहीं है। अगर यह स्तोत्र यंत्र के साथ किया जाये तो लाभ कई गुना अधिक हो जाता है। यह यन्त्र व स्तोत्र के विधान से व्यापारी व्यापार में वृद्धि करता है, दुःख दरिद्रता का विनाश हो जाता है। प्रसिद्ध शास्‍त्रोक्‍त ग्रन्थ "शंकर दिग्विजय" के "चौथे सर्ग में" इस कथा का उल्लेख है।  एक बार शंकराचार्यजी भिक्षा हेतु घूमते-घूमते एक सद्गृहस्थ निर्धन ब्राह्मण के घर पहुंच गए और भिक्षा हेतु याचना करते हुए कहा "भिक्षां देहि"। किन्तु संयोग से इन तेजस्वी अतिथ...

श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र || Shri Lalitasahasranam Stotra || सिन्दूरारुण विग्रहां || Sindurarun Vigraham || श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी || Shri Mata Shri Maharagyi// Lyrics in Hindi

श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र || Shri Lalitasahasranam Stotra || सिन्दूरारुण विग्रहां || Sindurarun Vigraham || श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी || Shri Mata Shri Maharagyi अस्य श्रीललितासहस्रनामस्तोत्रमाला मन्त्रस्य । वशिन्यादिवाग्देवता ऋषयः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीललितापरमेश्वरी देवता । श्रीमद्वाग्भवकूटेति बीजम् । मध्यकूटेति शक्तिः । शक्तिकूटेति कीलकम् । श्रीललितामहात्रिपुरसुन्दरी-प्रसादसिद्धिद्वारा चिन्तितफलावाप्त्यर्थे जपे विनियोगः । ॥ ध्यानम् ॥ Dhyanam  सिन्दूरारुण विग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलि स्फुरत् तारा नायक शेखरां स्मितमुखी मापीन वक्षोरुहाम् । पाणिभ्यामलिपूर्ण रत्न चषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीं सौम्यां रत्न घटस्थ रक्तचरणां ध्यायेत् परामम्बिकाम् ॥ अरुणां करुणा तरङ्गिताक्षीं धृत पाशाङ्कुश पुष्प बाणचापाम् । अणिमादिभि रावृतां मयूखै- रहमित्येव विभावये भवानीम् ॥ ध्यायेत् पद्मासनस्थां विकसितवदनां पद्मपत्रायताक्षीं हेमाभां पीतवस्त्रां करकलितलसद्धेमपद्मां वराङ्गीम् । सर्वालङ्कार युक्तां सतत मभयदां भक्तनम्रां भवानीं श्रीविद्यां शान्त मूर्तिं सकल सुरनुतां सर्व सम्पत्प्रदात्रीम् ॥ सकुङ्कुम विलेपनामलिकच...