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⚔️👁️ पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध 🕉️🔥

कौन था अन्धकासुर | पौराणिक कथा प्रसंग ** दिति का एक महाबलशाली पुत्र अन्धक था । नेत्र रहते हुए भी वह मदान्ध होने के कारण अन्धों की तरह चलता था। इसी से उसका नाम अन्धक पड़ गया था । उसके आडि तथा वक दो पुत्र थे । * तपस्या के प्रभाव के कारण अन्धक देवताओं के लिए अबध्य हो गया था। एक बार जब अवन्ती के कालवन में महादेव पार्वती के साथ क्रीड़ा कर रहे थे, तब अन्धकासुर उन्मत्त-सा वहाँ पहुंचा और मॉं पार्वती का हरण करने की कोशिश करने लगा। तब क्रुद्ध हुए रुद्र तथा अन्धक में भीषण युद्ध हुआ और शङ्कर के पाशुपतास्त्र से घायल होने पर उसके रक्त से अनेक अन्धक उत्पन्न हो गए। रुद्र ने उन अन्धकों को बाणों से आहत कर दिया। किन्तु उन अन्धकों के रुधिर से पुनः सहस्रों अन्धक पैदा हो गये । उत्पन्न होते ही उन अन्धकों ने सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर लिया। तब उन मायावी अन्धकों के नाश के लिए रुद्र ने 197 मातृकाएँ उत्पन्न कीं, जिनमें माहेश्वरी, कौमारी, मालिनी, सौपर्णी, वायव्या आदि प्रमुख थीं । मातृकाओं ने उन अन्धकों का रुधिर पान करना प्रारम्भ किया; किन्तु वे पुनः बढ़ने लगे । तब खिन्न होकर शिव विष्णु की शरण में गए। तब उन्होंने...

Katha Prasang 001 || कथा प्रसंग 001 || जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे || Jo karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire

Katha Prasang 001 ||  कथा प्रसंग 001 || जो करते रहोगे  भजन धीरे धीरे || Jo karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire  एक बार की बात है। देवर्षि नारद जी भगवान श्रीहरि विष्‍णु जी से मिलने जा रहे थे। तभी उन्‍होंने मार्ग में देखा कि एक तपस्‍वी एक नीम के पेड के नीचे बैठ कर घोर तपस्‍या कर रहे हैं। नारद जी को विचार आया कि जाकर इनसे मिलना चाहिए। नारद जी तपस्‍वी के पास गये और बताया कि वे श्रीहरि विष्‍णुजी से मिलने जा रहे हैं। नारद जी ने यह भी कहा कि अगर आप कोई सन्‍देश प्रभु श्रीहरि विष्‍णु जी तक पहुँचाना चाहतें हों तो मैं उसे उन तक पहुँचा सकता हूँ। इस पर उन तपस्‍वी ने कहा कि आपकी अत्‍यन्‍त कृपा आज मुझ पर हुई है। आप केवल मेरे एक प्रश्‍न का उत्‍तर श्रीहरि विष्‍णु जी से पूछ कर आइयेगा। नारद जी ने कहा पूँछिये आपका प्रश्‍न क्‍या है। तपस्‍वी ने कहा कि आप उनसे केवल इतना पूँछ कर आइयेगा कि मुझे वे दर्शन कब देंगे। नारद जी नारायण नारायण जपते हुए श्री हरि विष्‍णु जी के श्रीधाम में पहुँचे और उनकी स्‍तुति करके सारा वृतान्‍त कह सुनाया। नारद जी ने तपस्‍वी के प्रश्‍न का उत्‍तर जानने की जिज्ञासा प्रकट की। इस ...