बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की नियमित पूजा, उपासना और आरती करने से कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। इसलिए श्रद्धा और विधिपूर्वक बुध देव की आराधना करने से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा बोलने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
*
ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह के शुभ होने पर शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बुध देव की कृपा लाभ, आर्थिक प्रगति और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके साथ ही, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मधुरता और बेहतर संवाद स्थापित होने में सहायता मिलती है।
*
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह के मजबूत होने से त्वचा, तंत्रिका तंत्र (नसों) तथा मानसिक संतुलन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित चिकित्सा आवश्यक है। बुध देव की पूजा को आध्यात्मिक आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
*
ॐ जय बुध देव हरे,
प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
शीत चंद के सुत तुम,
शीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे,
नैन छवि अटके।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
रूप रूप धर तुम ही,
जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते,
सब जग के सुखकारी।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
तन पर पीत अम्बर,
माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु,
सुर नर मुनि मोहे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
जो जन तेरी आरती,
प्रेम सहित गावै।
सो निश्चय ही मनवांछित,
फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
बुध देव की आरती,
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी,
मनवांछित फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
***
*
Om Jai Budh Dev Hare,
Prabhu Jai Budh Dev Hare.
Bhakt Janon Ke Sankat,
Kshan Mein Door Kare.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Sheet Chand Ke Sut Tum,
Sheer Samudra Pragate.
Hem Mukut Sir Sohe,
Nain Chhavi Atake.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Roop Roop Dhar Tum Hi,
Jag Ke Hitkari.
Bhakton Ki Peeda Harte,
Sab Jag Ke Sukhkari.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Tan Par Peet Ambar,
Mala Gal Sohe.
Darshan Pavat Sadhu,
Sur Nar Muni Mohe.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Jo Jan Teri Aarti,
Prem Sahit Gaavai.
So Nishchay Hi Manvanchhit,
Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Budh Dev Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaavai.
Kahat Shivanand Swami,
Manvanchhit Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
***
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की नियमित पूजा, उपासना और आरती करने से कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। इसलिए श्रद्धा और विधिपूर्वक बुध देव की आराधना करने से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा बोलने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
*
ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह के शुभ होने पर शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बुध देव की कृपा लाभ, आर्थिक प्रगति और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके साथ ही, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मधुरता और बेहतर संवाद स्थापित होने में सहायता मिलती है।
*
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह के मजबूत होने से त्वचा, तंत्रिका तंत्र (नसों) तथा मानसिक संतुलन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित चिकित्सा आवश्यक है। बुध देव की पूजा को आध्यात्मिक आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
*
ॐ जय बुध देव हरे,
प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
शीत चंद के सुत तुम,
शीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे,
नैन छवि अटके।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
रूप रूप धर तुम ही,
जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते,
सब जग के सुखकारी।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
तन पर पीत अम्बर,
माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु,
सुर नर मुनि मोहे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
जो जन तेरी आरती,
प्रेम सहित गावै।
सो निश्चय ही मनवांछित,
फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
बुध देव की आरती,
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी,
मनवांछित फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
***
*
Om Jai Budh Dev Hare,
Prabhu Jai Budh Dev Hare.
Bhakt Janon Ke Sankat,
Kshan Mein Door Kare.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Sheet Chand Ke Sut Tum,
Sheer Samudra Pragate.
Hem Mukut Sir Sohe,
Nain Chhavi Atake.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Roop Roop Dhar Tum Hi,
Jag Ke Hitkari.
Bhakton Ki Peeda Harte,
Sab Jag Ke Sukhkari.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Tan Par Peet Ambar,
Mala Gal Sohe.
Darshan Pavat Sadhu,
Sur Nar Muni Mohe.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Jo Jan Teri Aarti,
Prem Sahit Gaavai.
So Nishchay Hi Manvanchhit,
Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Budh Dev Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaavai.
Kahat Shivanand Swami,
Manvanchhit Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
***
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
हमें खुशी होगी यदि आप हमारे टेलीग्राम चैनल https://t.me/e_stuti से भी जुड़ेंगे। आभार