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श्री वैष्‍णो देवी माता की आरती || Shri Vaishno Devi Mata ki Aarti || हे मात मेरी, हे मात मेरी || He Maat Meri

श्री वैष्‍णो देवी माता की आरती || Shri Vaishno Devi Mata ki Aarti || हे मात मेरी, हे मात मेरी || He Maat Meri हे मात मेरी, हे मात मेरी, कैसी यह देर लगाई है दुर्गे। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।१।। भवसागर में गिरा पड़ा हूँ, काम आदि गृह में घिरा पड़ा हूँ। मोह आदि जाल में जकड़ा पड़ा हूँ। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।२।। न मुझ में बल है न मुझ में विद्या, न मुझ में भक्ति न मुझमें शक्ति। शरण तुम्हारी गिरा पड़ा हूँ। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।३।। न कोई मेरा कुटुम्ब साथी, ना ही मेरा शारीर साथी। आप ही उबारो पकड़ के बाहीं। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।४।। चरण कमल की नौका बनाकर, मैं पार होउँगा ख़ुशी मनाकर। यमदूतों को मार भगाकर। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।५।। सदा ही तेरे गुणों को गाऊँ, सदा ही तेरे स्वरूप को ध्याऊँ। नित प्रति तेरे गुणों को गाऊँ। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।६।। न मैं किसी का न कोई मेरा, छाया है चारों तरफ अन्धेरा। पकड़ के ज्योति दिखा दो रास्ता। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।७।। शरण पड़े है हम तुम्हारी, करो यह नैया पार हमारी। कैसी यह देर लगाई है दुर्गे। हे मात मेरी, हे मात मेरी।।८।। विनम्र अनुरोध:...

जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English श्री प्रेतराज सरकार बालाजी मंदिर में प्रेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। प्रेतराज सरकार के विग्रह पर भी चोला चढ़ाया जाता है। प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्तिभाव से उनकी आरती , चालीसा , कीर्तन , भजन आदि किए जाते हैं। बालाजी के सहायक देवता के रूप में ही प्रेतराज सरकार की आराधना की जाती है। प्रेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है।   ** ** जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English ** जय प्रेतराज कृपालु मेरी  अरज अब सुन लीजिये। ** मैं शरण तुम्हारी आ गया हूँ,  नाथ दर्शन दीजिये।।  ** मैं करूं विनती आपसे अब,  तुम दयामय चित धरो। ** चरणों का ले लिया आसरा,  प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो।।  ** सिर पर मोर मुकुट कर में धनुष,  गलबीच मोतियन माल है। ** जो करे दर्शन प्रेम से सब,  कटत तन के जाल हैं।।  ** जब पहन बख्तर ले ख...

श्री बृहस्‍पति देव जी की आरती || Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti || जय बृहस्पति देवा || Jay Brihaspati Deva

श्री बृहस्‍पति देव जी की आरती || Shri Brihaspati Dev Ji Ki Aarti || जय बृहस्पति देवा || Jay Brihaspati Deva जय बृहस्पति देवा, ॐ जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा॥ ॐ जय बृहस्पति देवा ।।१।। तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय बृहस्पति देवा।।२।। चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता। सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।३।। तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े। प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥ ॐ जय बृहस्पति देवा।।४।। दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी। पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी॥ ॐ जय बृहस्पति देवा।।५।। सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारी। विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी॥ ॐ जय बृहस्पति देवा।।६।। जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे। जेष्‍ठानंद आनंदकर, सो निश्चय पावे॥ ॐ जय बृहस्पति देवा।।७।। सब बोलो विष्णु भगवान की जय! बोलो बृहस्पतिदेव की जय!! ***** विनम्र अनुरोध:  अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comments) में   जय श्री बृहस्पति देेव अवश्य अंकित करें। ***** Click Here to Join ...

नर्मदाष्टकं || Narmadashtakam || सविंदुसिंधु-सुस्खलत्तरंगभंग-रंजितं || Savindusindhu

 नर्मदाष्टकं || Narmadashtakam || सविंदुसिंधु-सुस्खलत्तरंगभंग-रंजितं || Savindusindhu  सविंदुसिंधु-सुस्खलत्तरंगभंग-रंजितं , द्वि षत्सु पापजात-जातकारि-वारिसंयुतम्। कृतान्‍त-दूतकालभूत-भीतिहारि वर्मदे , त्वदीयपादपंकजं नमामि देवि नर्मदे।।१।।  त्वदम्‍बु-लीनदीन-मीन-दिव्य संप्रदायकं , कलौ मलौध-भारहारि सर्वतीर्थनायकम्। सुमत्स्य-कच्छ-नक्र-चक्र-चक्रवाक्-शर्मदे , त्वदीय पादपंकजं नमामि देवी नर्मदे।।२।। महागम्‍भीर-नीरपूर-पापधूत-भूतलं , ध्वनत-समस्त-पातकारि-दारितापदाचलम्। जगल्लये महामये मृकंडुसून-हर्म्यदे , त्वदीय पादपंकजं नमामि देवी नर्मदे।।३।। गतं तदैव मे भयं त्वदंबुवीक्षितं यदा , मृकंडुसूनु-शौनकासुरारिसेवि सर्वदा। पुनर्भवाब्धि-जन्मजं भवाब्धि-दु:खवर्मदे , त्वदीय पादपंकजं नमामि देवी नर्मदे।।४।। अलक्ष-लक्ष-किन्नरामरासुरादिपूजितं , सुलक्ष नीरतीर-धीरपक्षि-लक्षकूजितं। वशिष्ठशिष्ट पिप्पलाद कर्दमादि शर्मदे , त्वदीय पादपंकजं नमामि देवी नर्मदे।।५।। सनत्कुमार-नाचिकेत कश्यपात्रि-षट्पदै , धृतं स्वकीयमानसेषु नारदादिषट्पदै:। रवींदु-रन्तिदेव...

श्री नर्मदा जी की आरती || Shri Narmada Ji Ki Aarti || जय जगदानन्‍दी, मैया जय जगदानन्‍दी || Jay Jagadanandi

जय जगदानन्‍दी || नर्मदा मैया की आरती || Narmada Mata Ki Aarty Lyrics in Hindi and English ** ** जय जगदानन्‍दी,  मैया जय जगदानन्‍दी। जय जगदानन्दी,  मैया जय जगदानन्‍दी। ब्रह्मा हरिहर शंकर,  रेवा शिव हर‍ि शंकर,  रुद्री पालन्ती। ॐ जय जगदानन्दी।। ** नारद शारद तुम वरदायक,  अभिनव पद चण्डी। हो मैया अभिनव पद चण्डी। सुर नर मुनि जन सेवत,  सुर नर मुनि जन सेवत। शारद पद वन्‍दी। ॐ जय जगदानन्दी।। ** धूम्रक वाहन राजत,  वीणा वादन्‍ती। हो मैया वीणा वादन्‍ती। झुमकत-झनकत-झननन,  झुमकत-झनकत-झननन रमती राजन्ती। ॐ जय जगदानन्दी।। ** बाजत ताल मृदंगा,  सुर मण्डल रमती।  हो मैया सुर मण्डल रमती। तुडितान- तुडितान- तुडितान,  तुरडड तुरडड तुरडड रमती सुरवन्ती। ॐ जय जगदानन्दी।। ** सकल भुवन पर आप विराजत,  निशदिन आनन्दी। हो मैया निशदिन आनन्दी। गावत गंगा शंकर,  सेवत रेवा शंकर तुम भव भय हंती। ॐ जय जगदानन्दी।।  ** कंचन थाल विराजत,  अगर कपूर बाती। हो मैया अगर कपूर बाती। अमरकंटक में राजत,  घाट घाट में राजत कोटि रतन ज्योति। ॐ जय जगदानन्दी।।  ** मैय...

नर्मदा माता की चालीसा || जय-जय-जय नर्मदा भवानी || Narmada Chalisa Lyrics in Hindi and English

नर्मदा माता की चालीसा || जय-जय-जय नर्मदा भवानी || Narmada Chalisa Lyrics in Hindi and English ** ** ॥ दोहा ॥ ** देवि पूजित, नर्मदा,  महिमा बड़ी अपार। चालीसा वर्णन करत,  कवि अरु भक्त उदार॥ ** इनकी सेवा से सदा,  मिटते पाप महान। तट पर कर जप दान नर,  पाते हैं नित ज्ञान ॥ ** ॥ चौपाई ॥ ** जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। ** अमरकण्ठ से निकली माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता। ** कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी। ** सप्तमी सूर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा। ** वाहन मकर आपको साजैं, कमल पुष्प पर आप विराजैं। ** ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं, तब ही मनवांछित फल पावैं। ** दर्शन करत पाप कटि जाते, कोटि भक्त गण नित्य नहाते। ** जो नर तुमको नित ही ध्यावै, वह नर रुद्र लोक को जावैं। ** मगरमच्‍छ तुम में सुख पावैं, अंतिम समय परमपद पावैं। ** मस्तक मुकुट सदा ही साजैं, पांव पैंजनी नित ही राजैं। ** कल-कल ध्वनि करती हो माता, पाप ताप हरती हो माता। ** पूरब से पश्चिम की ओरा, बहतीं माता नाचत मोरा। ** शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं, सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं। ** शिव ...

गायत्री मंत्र || Gayatri Mantra || Savita Mantra || ॐ भूर्भुवः स्वः || Om Bhurbhuvah Swah

गायत्री मंत्र || Gayatri Mantra || Savita Mantra || ॐ भूर्भुवः स्वः || Om Bhurbhuvah Swah गायत्री मंत्र के जाप से हृदय में शुद्धता आती है और विचार सकारात्‍मक हो जाते हैं तथा शरीर में अद्भुत शक्ति का संचार होता है। परिणामस्‍वरूप समस्‍त मानसिक अथवा शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं। गायत्री मंत्र के निरंतर उच्‍चारण से मेधा बढ्ती है, स्‍मरण शक्ति  तेज होती है और ज्ञान व़ृद्धि भी होती है। गायत्री मंत्र का जाप करने के तीन समय बताये गये हैं। पहला सूर्योदय से पूर्व, दूसरा मध्‍याह्न में एवं तीसरा सूर्यास्‍त से पहले। गायत्री मंत्र का जाप सदैव शुद्ध उच्‍चारण के साथ ही करना श्रेयस्‍कर है। साथ ही यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि बिना अर्थ जाने जपे गये किसी भी मंत्र का कोई फल प्राप्‍त नहीं होता है। अर्थ से तात्‍पर्य केवल शाब्द‍िक अर्थ ही नहीं है वरन भावार्थ भी है। गायत्री मंत्र इस प्रकार है- || ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् , भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् || अर्थ उस प्राण स्वरूप , दुःखनाशक , सुखस्वरूप , श्रेष्ठ , तेजस्वी , पापनाशक , देवस्वरूप परमात्मा को हम अंतःकरण में ध...