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आरती श्री महावीर जी की ||Shri Mahaveer Swami Ki Aarti || जय महावीर प्रभो || Jay Mahaveer Prabho

आरती श्री महावीर जी की ||Shri Mahaveer Swami Ki Aarti || जय महावीर प्रभो || Jay Mahaveer Prabho  ** जय महावीर प्रभो।  स्वामी जय महावीर प्रभो। जगनायक सुखदायक,  अति गम्भीर प्रभो।।ओउम।। ***** कुण्डलपुर में जन्में,  त्रिशला के जाये। पिता सिद्धार्थ राजा,  सुर नर हर्षाए।।ओउम।। ***** दीनानाथ दयानिधि,  हैं मंगलकारी। जगहित संयम धारा,  प्रभु परउपकारी।।ओउम।। ***** पापाचार मिटाया,  सत्पथ दिखलाया। दयाधर्म का झण्डा,  जग में लहराया।।ओउम।। ***** अर्जुनमाली गौतम,  श्री चन्दनबाला। पार जगत से बेड़ा,  इनका कर डाला।।ओउम।। ***** पावन नाम तुम्हारा,  जगतारणहारा। निसिदिन जो नर ध्यावे,  कष्ट मिटे सारा।।ओउम।। ***** करुणासागर!  तेरी महिमा है न्यारी। ज्ञानमुनि गुण गावे,  चरणन बलिहारी।।ओउम।। ***** आरती श्री महावीर जी की ||Shri Mahaveer Swami Ki Aarti || जय महावीर प्रभो || Jay Mahaveer Prabho ** Jaya mahāvīr prabho  Svāmī jaya mahāvīr prabho Jaganāyak sukhadāyaka,  Ati gambhīr prabho।।ouma ***** Kuṇḍalapur mean ...

जय महावीर दयालु स्वामी || महावीर स्‍वामी की चालीसा || Mahaveer Chalisa Lyrics in Hindi and English

जय महावीर दयालु स्वामी || महावीर स्‍वामी की चालीसा || Mahaveer Chalisa Lyrics in Hindi and English ** ** दोहा ** शीश नवा अरिहन्त को,  सिद्धन करूँ प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का,  ले सुखकारी नाम। सर्व साधु और सरस्वती,  जिन मन्दिर सुखकार। महावीर भगवान को,  मन-मन्दिर में धार। ** चौपाई ** जय महावीर दयालु स्वामी,  वीर प्रभु तुम जग में नामी। ** वर्धमान है नाम तुम्हारा,  लगे हृदय को प्यारा प्यारा। ** शांति छवि और मोहनी मूरत,  शान हँसीली सोहनी सूरत। ** तुमने वेश दिगम्बर धारा,  कर्म-शत्रु भी तुम से हारा। ** क्रोध मान अरु लोभ भगाया,  महा-मोह तुमसे डर खाया। ** तू सर्वज्ञ सर्व का ज्ञाता,  तुझको दुनिया से क्या नाता। ** तुझमें नहीं राग और द्वेष,  वीर रण राग तू हितोपदेश। ** तेरा नाम जगत में सच्चा,  जिसको जाने बच्चा बच्चा। ** भूत प्रेत तुम से भय खावें,  व्यन्तर राक्षस सब भग जावें। ** महा व्याध मारी न सतावे,  महा विकराल काल डर खावे। ** काला नाग होय फन धारी,  या हो शेर भयंकर भारी। ** ना हो कोई बचाने वाला,  स्वामी तुम्हीं करो प्रत...

आरती श्री पितर जी की Shri Pitar (Pittar) Ji ki Aarti (Arti) || जय जय पितर महाराज || Jay Jay Pitar Maharaj

आरती श्री पितर जी की Shri Pitar (Pittar) Ji ki Aarti (Arti) || जय जय पितर महाराज || Jay Jay Pitar Maharaj जय जय पितर महाराज, मैं शरण पड़यों हूँ थारी। शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी।। आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे। मैं मूरख हूँ कछु नहिं जाणूं, आप ही हो रखवारे।। जय।। आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी। हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी।। जय।। देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई। काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई।। जय।। भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार। रक्षा करो आप ही सबकी, रटूँ मैं बारम्बार।। जय।। चित्र  tips4india.in  से साभार

श्री पितर चालीसा Shri Pitar Chalisa (Pittar Chalisa) || हे पितरेश्वर आपको || He Pitareshwar Aapko

श्री पितर चालीसा Shri Pitar Chalisa (Pittar Chalisa) || हे पितरेश्वर आपको || He Pitareshwar Aapko दोहा हे पितरेश्वर आपको दे दियो आशीर्वाद, चरणाशीश नवा दियो रखदो सिर पर हाथ। सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी। हे पितरेश्वर दया राखियो, करियो मन की चाया जी।। चौपाई पितरेश्वर करो मार्ग उजागर, चरण रज की मुक्ति सागर। परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा, मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा। मातृ-पितृ देव मन जो भावे, सोई अमित जीवन फल पावे। जै-जै-जै पित्तर जी साईं, पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं। चारों ओर प्रताप तुम्हारा, संकट में तेरा ही सहारा। नारायण आधार सृष्टि का, पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का। प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते, भाग्य द्वार आप ही खुलवाते। झुंझनू में दरबार है साजे, सब देवों संग आप विराजे। प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा, कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा। पित्तर महिमा सबसे न्यारी, जिसका गुणगावे नर नारी। तीन मण्ड में आप बिराजे, बसु रुद्र आदित्य में साजे। नाथ सकल संपदा तुम्हारी, मैं सेवक समेत सुत नारी। छप्पन भोग नहीं हैं भाते, शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते। तुम्हारे भजन परम हितकारी, छोट...

आरती श्री साईं जी की Shri Sai Baba Ki Aarti (Arti Sainath Ki), Sai Ram ki Arti

आरती श्री साईं गुरुवर की, परमानन्द सदा सुरवर की। जा की कृपा विपुल सुखकारी, दुख शोक संकट भयहारी। शिरडी में अवतार रचाया, चमत्कार से तत्व दिखाया। कितने भक्त चरण पर आये, वे सुख शान्ति चिरंतन पाये। भाव धरै जो मन में जैसा, पावत अनुभव वो ही वैसा। गुरु की उदी लगवे तन को, समाधान लाभत उस मन को। साईं नाम सदा जो गावे, सो फल जग में शाश्वत पावे। गुरुवासर करि पूजा-सेवा, उस पर कृपा करत गुरुदेवा। राम, कृष्ण, हनुमान रूप में, दे दर्शन, जानत जो मन में। विविध धर्म के सेवक आते, दर्शन इच्छित फल पाते। जै बोलो साईं बाबा की, जै बोलो अवधूत गुरु की। साईंदास आरती को गावै, घर में बसि सुख, मंगल पावे। चित्र  saibabaofshirdi.net  से साभार

श्री साई चालीसा Shri Sai Chalisa (Sai Baba Chalisa) || पहले साईं के चरणों में || Pahle Sai Ke Charano me

श्री साई चालीसा Shri Sai Chalisa (Sai Baba Chalisa) || पहले साईं के चरणों में || Pahle Sai Ke Charano me पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नवाऊँ मैं। कैसे शिर्डी साईं आए सारा हाल सुनाऊँ मैं। कौन हैं माता, पिता कौन हैं, यह न किसी ने भी जाना। कहाँ जनम साईं ने धारा, प्रश्न पहेली सा रहा बना। कोई कहे अयोध्या के, ये रामचन्द्र भगवान हैं। कोई कहता साईं बाबा, पवन-पुत्र हनुमान हैं। कोई कहता है मंगल मूर्ति, श्री गजानन  हैं साईं। कोई कहता गोकुल मोहन देवकी नन्दन हैं साईं। शंकर समझे भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते। कोई कहे अवतार दत्त का, पूजा साई की करते। कुछ भी मानो उनको तुम, पर साईं हैं सच्चे भगवान। बड़े दयालु, दीनबन्धु, कितनों को दिया जीवन दान। कई वर्ष पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊँगा मैं बात। किसी भाग्यशाली की, शिर्डी में आई थी बारात। आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुन्दर। आया, आकर वहीं बस गया, पावन शिर्डी किया नगर। कई दिनों तक रहा भटकता, भिक्षा माँगी उसने दर-दर। और दिखायी ऐसी लीला, जग में जो हो गई अमर। जैसे-जैसे उमर बढ़ी, बढ़ती गई वेसे ही शान। घर-घर होने लगा नगर में, स...