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श्री शारदा स्तोत्रम् | Shri Sharda Stotram Lyrics in Hindi, Sanskrit and English

श्री शारदा स्तोत्रम् | Shri Sharda Stotram Lyrics in Hindi, Sanskrit and English  *** *** श्री शारदा स्तोत्रम्: ज्ञान, बुद्धि और वाणी की देवी माँ सरस्वती की स्तुति भारतवर्ष में सनातन धर्म की परंपरा अत्यंत समृद्ध है, जहाँ देवी-देवताओं की स्तुति हेतु अनेकों स्तोत्र, मंत्र और स्रोत उपलब्ध हैं। इन्हीं में से एक विशेष और शक्तिशाली स्तुति है - श्री शारदा स्तोत्रम्, जो देवी सरस्वती को समर्पित है। देवी सरस्वती को "शारदा" भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है - ज्ञान देने वाली । यह स्तोत्र न केवल भक्तों के हृदय में भक्ति की भावना जागृत करता है, बल्कि उनके जीवन में ज्ञान, विवेक और वाणी की शक्ति भी प्रदान करता है। यह स्तोत्र ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी को प्रसन्न करने के लिए पढ़ा जाता है। शारदा स्तोत्र में देवी शारदा की महिमा का वर्णन है और उनसे ज्ञान, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मांगा जाता है। इसका पाठ करने से साधक की बुद्धि तीव्र होती है, वाणी मधुर बनती है और विद्या की प्राप्ति होती है। विशेषकर छात्र, लेखक, वक्ता और कलाकार इस स्तोत्र का नियमित पाठ करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। देवी सरस्व...

संकटमोचक पद्मावती स्‍तोत्र लिरिक्‍स || Sankatmochak Padmavati Stotra || Devi Maa Padmavati Jyoti Roop Mahan || देवी मां पद्मावती

संकटमोचक पद्मावती स्‍तोत्र || Sankatmochak Padmavati Stotra || Jay Jay Jay Padmavati Maata ||  जय-जय-जय पद्मावती माता ** ** ।। दोहा ।। ** देवी मां पद्मावती,  ज्योति रूप महान। विघ्न हरो मंगल करो,  करो मात कल्याण। ** ।। चौपाई।। ** जय-जय-जय पद्मावती माता,  तेरी महिमा त्रिभुवन गाता।  मन की आशा पूर्ण करो मां,  संकट सारे दूर करो मां ।। ** तेरी महिमा परम निराली,  भक्तों के दुख हरने वाली। धन-वैभव-यश देने वाली,  शान तुम्हारी अजब निराली।। ** बिगड़ी बात बनेगी तुम से,  नैया पार लगेगी तुम से।  मेरी तो बस एक अरज है,  हाथ थाम लो यही गरज है।। ** चतुर्भुजी मां हंसवाहिनी,  महर करो मां मुक्तिदायिनी।  किस विध पूजूं चरण तुम्हारे,  निर्मल हैं बस भाव हमारे।। ** मैं आया हूं शरण तुम्हारी,  तू है मां जग तारणहारी।  तुम बिन कौन हरे दुख मेरा,  रोग-शोक-संकट ने घेरा।। ** तुम हो कल्पतरु कलियुग की,  तुमसे है आशा सतयुग की।  मंदिर-मंदिर मूरत तेरी,  हर मूरत में सूरत तेरी।। ** रूप तुम्हारे हुए हैं अनगिन,  महिमा बढ़ती जा...

श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi // Lyrics in Hindi

श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता। मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।। रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैः क्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम्। दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रं ध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम्।। स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् । षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ।।1।। एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्। एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ।।2।। महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम्। महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ।।3।। कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्। कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ।।4।। रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्। रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।5।। पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्। पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।6।। धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम्। होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।7।। फा...

श्री अष्टविनायकस्तोत्रं // Shri Ashtavinayakstotram in Hindi // Lyrics in Hindi

श्री अष्टविनायकस्तोत्रं // Shri Ashtavinayakstotram in Hindi स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लालस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे। लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम्।।   इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम्। श्री अष्टविनायकस्तोत्रं का एक अन्‍य स्‍वरूप भी शास्‍त्रों में प्राप्‍त होता है जो कि निम्‍नानुसार है - स्वस्ति श्रीगणनायकं गजमुखं मोरेश्वरं सिद्धिदं बल्लालं मुरुडं विनायकं मढं चिन्तामणीस्थेवरम्। लेण्याद्रिं गिरिजात्मजं सुवरदं विघ्नेश्वरं ओझरं ग्रामे रांजणसंस्थितं गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम्।। ***** यह भी पढें - सोमवार के पूजन एवं व्रत कथायें   मंगलवार के पूजन एवं व्रत कथायें  बुधवार के पूजन एवं व्रत कथायें  गुरुवार के पूजन एवं व्रत कथायें  शुक्रवार के पूजन एवं व्रत कथायें  शनिवार के पूजन एवं व्रत कथायें रविवार के पूजन एवं व्रत कथायें  *****   *****

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru || कनकधारा स्तोत्र कथा

कनकधारास्तोत्रम् || Kanakdharastotram || शङ्कराचार्यकृत || Shankaracharya Krit || वन्दे वन्दारु || Vande Vandaru  श्री कनकधारा स्तोत्र कथा || Shri Kanak Dhara Stotra Katha श्री कनकधारा स्तोत्र अत्यंत दुर्लभ है। यह माता लक्ष्‍मी को अत्‍यधिक प्रिय है और लक्ष्मी प्राप्ति के लिये यह रामबाण उपाय है। दरिद्र भी एकाएक धनोपार्जन करने लगता है। यह अद्भुत स्तोत्र तुरन्‍त फलदायी है। सिर्फ इतना ही नहीं यह अपने आप में स्वयं सिद्ध है। ऐश्वर्य प्रदान करने में सर्वथा समर्थ है। इस स्तोत्र का प्रयोग करने से रंक भी राजा बन सकता है इसमें कोई संशय नहीं है। अगर यह स्तोत्र यंत्र के साथ किया जाये तो लाभ कई गुना अधिक हो जाता है। यह यन्त्र व स्तोत्र के विधान से व्यापारी व्यापार में वृद्धि करता है, दुःख दरिद्रता का विनाश हो जाता है। प्रसिद्ध शास्‍त्रोक्‍त ग्रन्थ "शंकर दिग्विजय" के "चौथे सर्ग में" इस कथा का उल्लेख है।  एक बार शंकराचार्यजी भिक्षा हेतु घूमते-घूमते एक सद्गृहस्थ निर्धन ब्राह्मण के घर पहुंच गए और भिक्षा हेतु याचना करते हुए कहा "भिक्षां देहि"। किन्तु संयोग से इन तेजस्वी अतिथ...

श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र || Shri Lalitasahasranam Stotra || सिन्दूरारुण विग्रहां || Sindurarun Vigraham || श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी || Shri Mata Shri Maharagyi// Lyrics in Hindi

श्रीललितासहस्रनामस्तोत्र || Shri Lalitasahasranam Stotra || सिन्दूरारुण विग्रहां || Sindurarun Vigraham || श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी || Shri Mata Shri Maharagyi अस्य श्रीललितासहस्रनामस्तोत्रमाला मन्त्रस्य । वशिन्यादिवाग्देवता ऋषयः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीललितापरमेश्वरी देवता । श्रीमद्वाग्भवकूटेति बीजम् । मध्यकूटेति शक्तिः । शक्तिकूटेति कीलकम् । श्रीललितामहात्रिपुरसुन्दरी-प्रसादसिद्धिद्वारा चिन्तितफलावाप्त्यर्थे जपे विनियोगः । ॥ ध्यानम् ॥ Dhyanam  सिन्दूरारुण विग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलि स्फुरत् तारा नायक शेखरां स्मितमुखी मापीन वक्षोरुहाम् । पाणिभ्यामलिपूर्ण रत्न चषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीं सौम्यां रत्न घटस्थ रक्तचरणां ध्यायेत् परामम्बिकाम् ॥ अरुणां करुणा तरङ्गिताक्षीं धृत पाशाङ्कुश पुष्प बाणचापाम् । अणिमादिभि रावृतां मयूखै- रहमित्येव विभावये भवानीम् ॥ ध्यायेत् पद्मासनस्थां विकसितवदनां पद्मपत्रायताक्षीं हेमाभां पीतवस्त्रां करकलितलसद्धेमपद्मां वराङ्गीम् । सर्वालङ्कार युक्तां सतत मभयदां भक्तनम्रां भवानीं श्रीविद्यां शान्त मूर्तिं सकल सुरनुतां सर्व सम्पत्प्रदात्रीम् ॥ सकुङ्कुम विलेपनामलिकच...