प्राचीन काल में एक बार युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है। पुत्रदा एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूजा के बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए, ऐसा करने से व्रत पूर्ण होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अब आप शांतिपूर्वक इसकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी व्रत कथा! द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था, कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुला...
सरस्वती आरती का परिचय सरस्वती आरती विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित श्रद्धापूर्ण आरती है। इसमें माँ के दिव्य स्वरूप, वीणा, माला, हंस की सवारी और उनकी महिमा का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्तजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आरती का पाठ कर ज्ञान, विवेक और सकारात्मकता की प्रार्थना करते हैं। इस लेख में सरस्वती आरती के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सरलता से इसका पाठ और गायन कर सकें। ** जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता सद्गुण वैभव शालिनि त्रिभुवन विख्याता ** ॐ जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता ** चंद्रवदन पद्मासिनि द्युति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी अतुल तेजधारी, ** ॐ जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता ** बाँए कर में वीणा दाँए कर माला शीश मुकुट मणि सोहे गल मोतियन माला ** ॐ जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता ** देवी शरण जो आए उनका उद्धार किया पैठ मंथरा दासी रावण संहार किया ** ॐ जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता ** Saraswati Aarti Ka Parichay...