॥ श्री युगलाष्टकम् ॥ ** कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेम मयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 1 ॥ ** कृष्णस्य द्रविणं राधा राधायाः द्रविणं हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 2 ॥ ** कृष्णप्राणमयी राधा राधाप्राणमयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 3 ॥ ** कृष्णद्रवामयी राधा राधाद्रवामयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 4 ॥ ** कृष्ण गेहे स्थिता राधा राधा गेहे स्थितो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 5 ॥ ** कृष्णचिन्तास्थिता राधा राधाचिन्तास्थितो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 6 ॥ ** नीलाम्बरा धरा राधा पीताम्बरो धरो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 7 ॥ ** वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 8 ॥ ** ॥ श्री युगलाष्टकम् सम्पूर्ण ॥ ***** ॥ Shree Yugalaashtakam ॥ ** Krishnapremamayee Raadha Raadhaaprem Mayo Harih. Jeevanen Dhanen Nityam Raadhaakrishnagathirmam ॥ 1 ॥ ** Krishnasya Dravinam Raadha Raadhaayaah Dravinam Harih. Jeevanen Dhanen Nityam Raadhaakrishnagathirmam ॥ 2 ॥ ** Kri...
प्राचीन काल में एक बार युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है। पुत्रदा एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूजा के बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए, ऐसा करने से व्रत पूर्ण होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अब आप शांतिपूर्वक इसकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी व्रत कथा! द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था, कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुला...