सोमवार, 16 मार्च 2026

श्री प्रेतराज चालीसा । Shri Pretraj Chalisa: प्रेतराज चालीसा के गायन से होती है हर ...। प्रेतराज चालीसा | Pretraj Chalisa मेहंदीपुर बालाजी के चमत्कार और ...

 !! दोहा !!
*
गणपति की कर वन्दना, 
गुरु चरणन चित लाए !
प्रेतराज जी का लिखूँ, 
चालीसा हरषाए !!
*
जय जय भूतादिक प्रबल, 
हरण सकल दुख भार !
वीर शिरोमणि जयति, 
जय प्रेतराज सरकार !!
*
!! चौपाई  !!
*
जय जय प्रेतराज जगपावन । 
महाप्रबल दुख ताप नसावन ।।
*
विकट वीर करुणा के सागर।  
भक्त कष्ट हर सब गुण आगर।।
*
रतन जडित सिंहासन सोहे। 
देखत सुर नर मुनि मन मोहे ।।
*
जगमग सिर पर मुकुट सुहावन। 
कानन कुण्डल अति मनभावन ।।
**
धनुष किरपाण बाण अरु भाला। 
वीर वेष अति भृकुटि कराला।।
**
गजारुढ संग सेना भारी। 
बाजत ढोल मृदंग जुझारी ।।
**
छ्त्र चँवर पंखा सिर डोलें ।
भक्त वृन्द मिल जय जय बोलें।।
**
भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा। 
दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा ।।
**
चलत सैन काँपत भु-तलहू ।  
दर्शन करत मिटत कलिमलहू।।
**
घाटा मेंहदीपुर में आकर।
 प्रगटे प्रेतराज गुण सागर ।।
*
लाल ध्वजा उड़ रही गगन में। 
नाचत भक्त मगन हो मन में ।।
*
भक्त कामना पूरन स्वामी। 
बजरंगी के सेवक नामी ।।
*
इच्छा पूरन करने वाले। 
दुख संकट सब हरने वाले ।।
*
जो जिस इच्छा से हैं आते। 
मनवांछित फल सब वे हैं पाते ।।
*
रोगी सेवा में जो हैं आते। 
शीघ्र स्वस्थ होकर घर हैं जाते।।
*
भूत पिशाच जिन्‍न बैताला । 
भागे देखत रुप विकराला।।
*
भौतिक शारीरिक सब पीड़ा । 
मिटा शीघ्र करते हैं क्रीड़ा ।।
*
कठिन काज जग में हैं जेते।
रटत नाम पूरा सब होते ।।
*
तन मन से सेवा जो करते। 
उनके कष्ट प्रभु सब हरते ।।
*
हे करुणामय स्वामी मेरे। 
पड़ा हुआ हूँ दर पे तेरे ।।
*
कोई तेरे सिवा ना मेरा। 
मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा ।।
*
लज्जा मेरी हाथ तिहारे। 
पड़ा हुआ हूँ चरण सहारे।।
*
या विधि अरज करे तन-मन से।
छूटत रोग-शोक सब तन से ।।
*
मेंहदीपुर अवतार लिया है। 
भक्तों का दुख दूर किया है ।।
*
रोगी पागल सन्तति हीना। 
भूत व्याधि सुत अरु धन हीना।।
*
जो जो तेरे द्वारे आते। 
मनवांछित फल पा घर जाते ।।
*
महिमा भूतल पर छाई है। 
भक्तों ने लीला गाई है ।।
*
महन्त गणेश पुरी तपधारी। 
पूजा करते तन-मन वारी ।।
*
हाथों में ले मुदगर घोटे। 
दूत खडे रहते हैं मोटे ।।
*
लाल देह सिन्दूर बदन में। 
काँपत थर-थर भूत भवन में।।
*
जो कोई प्रेतराज चालीसा। 
पाठ करे नित एक अरु बीसा।।
*
प्रातः काल स्नान करावै। 
तेल और सिन्दूर लगावै ।।
*
चन्दन इत्र फुलेल चढावै।
पुष्पन की माला पहनावै ।।
*
ले कपूर आरती उतारें। 
करें प्रार्थना जयति उचारें ।।
*
उन के सभी कष्ट कट जाते। 
हर्षित हो अपने घर जाते ।।
*
इच्छा पूरन करते जन की। 
होती सफल कामना मन की ।।
*
भक्त कष्ट हर अरि कुल घातक।
ध्यान करत छूटत सब पातक ।।
*
जय जय जय प्रेताधिराज जय। 
जयति भुपति संकट हर जय ।।
*
जो नर पढत प्रेत चालीसा। 
रहत ना कबहुँ दुख लवलेशा ।।
*
कह 'सुखराम' ध्यानधर मन में। 
प्रेतराज पावन चरनन में ।।
*
!! दोहा !!
*
दुष्ट दलन जग अघ हरन। 
समन सकल भव शूल ।।
*
जयति भक्त रक्षक सबल। 
प्रेतराज सुख मूल।।
*
विमल वेश अंजनि सुवन।
प्रेतराज बल धाम ।।
*
बसहु निरन्तर मम हृदय ।  
कहत दास सुखराम ।।
***

श्री बालाजी चालीसा - संपूर्ण संग्रह | Shri Balaji Chalisa | Shri Balaji Chalisa with Lyrics _ मेहंदीपुर बालाजी की चालीसा _

॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय,
के धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखे,
दास स्नेही कल्याण॥
विश्व विदित वर दानी,
संकट हरण हनुमान।
मैंहदीपुर में प्रगट भये,
बालाजी भगवान॥
**
॥ चौपाई ॥
**
जय हनुमान बालाजी देवा।
प्रगट भये यहां तीनों देवा॥
*
प्रेतराज भैरव बलवाना।
कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥
*
मैंहदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का उद्धार किया है॥
*
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर।
संकट वाले आते जहाँ पर॥
*
डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं।
मशान चुड़ैल भूत भूतनीं॥
*
जाके भय ते सब भाग जाते।
स्याने भोपे यहाँ घबराते॥
*
चौकी बन्धन सब कट जाते।
दूत मिले आनन्द मनाते॥
*
सच्चा है दरबार तिहारा।
शरण पड़े सुख पावे भारा॥
*
रूप तेज बल अतुलित धामा।
सन्मुख जिनके सिय रामा॥
*
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।
सबकी होवत पूर्ण आशा॥
*
महन्त गणेशपुरी गुणीले।
भये सुसेवक राम रंगीले॥
*
अद्भुत कला दिखाई कैसी।
कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥
*
ऊँची ध्वजा पताका नभ में।
स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥
*
धर्म सत्य का डंका बाजे।
सियाराम जय शंकर राजे॥
*
आन फिराया मुगदर घोटा।
भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥
*
राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा।
बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥
*
जय हनुमन्त हठीले देवा।
पुरी परिवार करत हैं सेवा॥
*
लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।
अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥
*
दया करे सब विधि बालाजी।
संकट हरण प्रगटे बालाजी॥
*
जय बाबा की जन जन ऊचारे।
कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥
*
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।
तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥
*
देवन विनती की अति भारी।
छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥
*
लांघि उदधि सिया सुधि लाये।
लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥
*
रामानुज प्राण दिवाकर।
शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥
*
केशरी नन्दन दुख भव भंजन।
रामानन्द सदा सुख सन्दन॥
*
सिया राम के प्राण पियारे।
जब बाबा की भक्त ऊचारे॥
*
संकट दुख भंजन भगवाना।
दया करहु हे कृपा निधाना॥
*
सुमर बाल रूप कल्याणा।
करे मनोरथ पूर्ण कामा॥
*
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।
भक्त जन आवे बहु भारी॥
*
मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना।
भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥
*
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे।
रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥
*
अर्जी का आदेश मिलते ही।
भैरव भूत पकड़ते तबही॥
*
कोतवाल कप्तान कृपाणी।
प्रेतराज संकट कल्याणी॥
*
चौकी बन्धन कटते भाई।
जो जन करते हैं सेवकाई॥
*
रामदास बाल भगवन्ता।
मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥
*
जो जन बालाजी में आते।
जन्म जन्म के पाप नशाते॥
*
जल पावन लेकर घर जाते।
निर्मल हो आनन्द मनाते॥
*
क्रूर कठिन संकट भग जावे।
सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥
*
जो सत पाठ करे चालीसा।
तापर प्रसन्न होय बागीसा॥
*
कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे।
सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥
*
॥ दोहा ॥
*
मन्द बुद्धि मम जानके,
क्षमा करो गुणखान।
संकट मोचन क्षमहु मम,
दास स्नेही कल्याण॥
***

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

जय जगदीश हरे आरती — अर्थ, इतिहास, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Aarti Lyrics in Hindi and English

जानिए “जय जगदीश हरे” आरती का भाव, प्रसार और कैसे यह भक्ति जीवन में शांति एवं समृद्धि ला सकती है। जरूर पढ़ें
*
“जय जगदीश हरे” आरती हिंदू भक्ति परंपरा की अत्यंत प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु / जगदीश को समर्पित है और प्रायः प्रातः और संध्या समय पूजा आयोजन में पाठ की जाती है। आरती के मूल भाव है — प्रभु की स्तुति, आश्रय प्रार्थना, भक्त की अनुग्रह याचना। यह आरती ईश्वर को अनादि, अनंत, अविनाशी, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी मानते हुए स्तुति करती है। भक्त स्वयम् को पापी, कलुषित एवं छोटा मानता है और ईश्वर से दया, आश्रय एवं मोक्ष की याचना करता है। यह आरती हमारे देश में सबसे अधिक गायी जाने वाली आरतियों में गिनी जाती है। मंदिरों, घरों, भजन मंडली और धार्मिक आयोजनों में इसे संध्या और आरती समय नियमित रूप से गाया जाता है। इसके भाव एवं सरलता से यह आम भक्तों तक भी पहुँची। यह भजन गीतप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्‍तक भजन संग्रह (पॉंचवाँ भाग) पत्र पुष्‍प से लिया गया है। इस हेतु हम पुस्‍तक के सम्‍पादक, प्रकाशक एवं लेखक के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हैं। 

*
जय जगदीश हरे 
प्रभु ! जय जगदीश हरे ! 
मायातीत, महेश्वर, 
मन-वच-बुद्धि परे ॥ जय
*
आदि, अनादि, अगोचर, 
अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनंत, अनामय, 
अमित शक्ति-राशी ॥1॥ जय
*
अमल, अकल, अज, 
अक्षय, अव्यय, अविकारी ।
सत-चित-सुखमय, सुंदर, 
शिव, सत्ताधारी ॥2॥ जय
*
विधि, हरि, शंकर, गणपति, 
सूर्य, शक्तिरूपा ।
विश्व-चराचर तुमहीं, 
तुमहीं जग-भूपा ॥3॥ जय
*
माता-पिता-पितामह-
स्वामि-सुहृद-भर्ता ।
विश्वोत्पादक-पालक-
रक्षक-संहर्ता ।।4।। जय
*
साक्षी, शरण, सखा, प्रिय, 
प्रियतम, पूर्ण, प्रभो ।
केवल, काल, कलानिधि, 
कालातीत, विभो ॥5॥ जय
*
राम-कृष्ण, करुणामय, 
प्रेमामृत-सागर ।
मनमोहन, मुरलीधर, 
नित-नव, नटनागर ॥6॥ जय
*
सब विधि हीन, मलिनमति, 
हम अति पातकिजन ।
प्रभु-पद-विमुख अभागी, 
कलि-कलुषित तन-मन ॥7॥ जय
*
आश्रय-दान दयार्णव ! 
हम सबको दीजे ।
पाप-ताप हर हरि ! सब, 
निज-जन कर लीजे ॥ 8 ॥ जय
***

जय जगदीश हरे | जगदीश्‍वर की आरती | Aarti Lyrics in Hindi and English

***
Jai Jagdish Hare
Prabhu! Jai Jagdish Hare!
Mayateet, Maheshwar,
Man-Vach-Buddhi Pare ॥ Jai
*
Aadi, Anaadi, Agochar,
Avichal, Avinaashi.
Atul, Anant, Anamay,
Amit Shakti-Raashi ॥1॥ Jai
*
Amal, Akal, Aj,
Akshay, Avyay, Avikaari.
Sat-Chit-Sukhmay, Sundar,
Shiv, Sattadhaari ॥2॥ Jai
*
Vidhi, Hari, Shankar, Ganpati,
Surya, Shaktirupa.
Vishv-Charachar Tumheen,
Tumheen Jag-Bhoopa ॥3॥ Jai
*
Mata-Pita-Pitamah-
Swami-Suhrit-Bharta.
Vishvotpaadak-Paalak-
Rakshak-Sanharta ॥4॥ Jai
*
Saakshee, Sharan, Sakha, Priya,
Priyatam, Poorn, Prabho.
Keval, Kaal, Kalaanidhi,
Kaalateet, Vibho ॥5॥ Jai
*
Ram-Krishn, Karunamay,
Premamrit-Sagar.
Manmohan, Murlidhar,
Nit-Nav, Natnaagar ॥6॥ Jai
*
Sab Vidhi Heen, Malinmati,
Hum Ati Paatakijan.
Prabhu-Pad-Vimukh Abhaagi,
Kali-Kalushit Tan-Man ॥7॥ Jai
*
Aashray-Daan Dayaarṇav 
Hum Sabko Deeje.
Paap-Taap Har Hari! Sab,
Nij-Jan Kar Leeje ॥8॥ Jai
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मंगलवार, 30 सितंबर 2025

⚔️👁️ पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध 🕉️🔥

कौन था अन्धकासुर | पौराणिक कथा प्रसंग
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दिति का एक महाबलशाली पुत्र अन्धक था । नेत्र रहते हुए भी वह मदान्ध होने के कारण अन्धों की तरह चलता था। इसी से उसका नाम अन्धक पड़ गया था । उसके आडि तथा वक दो पुत्र थे ।
*
तपस्या के प्रभाव के कारण अन्धक देवताओं के लिए अबध्य हो गया था। एक बार जब अवन्ती के कालवन में महादेव पार्वती के साथ क्रीड़ा कर रहे थे, तब अन्धकासुर उन्मत्त-सा वहाँ पहुंचा और मॉं पार्वती का हरण करने की कोशिश करने लगा। तब क्रुद्ध हुए रुद्र तथा अन्धक में भीषण युद्ध हुआ और शङ्कर के पाशुपतास्त्र से घायल होने पर उसके रक्त से अनेक अन्धक उत्पन्न हो गए। रुद्र ने उन अन्धकों को बाणों से आहत कर दिया। किन्तु उन अन्धकों के रुधिर से पुनः सहस्रों अन्धक पैदा हो गये । उत्पन्न होते ही उन अन्धकों ने सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर लिया। तब उन मायावी अन्धकों के नाश के लिए रुद्र ने 197 मातृकाएँ उत्पन्न कीं, जिनमें माहेश्वरी, कौमारी, मालिनी, सौपर्णी, वायव्या आदि प्रमुख थीं । मातृकाओं ने उन अन्धकों का रुधिर पान करना प्रारम्भ किया; किन्तु वे पुनः बढ़ने लगे । तब खिन्न होकर शिव विष्णु की शरण में गए। तब उन्होंने 'शुष्क-रेवती' नामक एक मातृका को उत्पन्न किया। शुष्क रेवती ने क्षणभर में ही उन अन्धकों का रक्त, पी डाला और वे विनाश को प्राप्त हो गये । अन्धकों के नष्ट हो जाने पर अन्धक निराश हो गया। तब भगवान् शङ्कर ने शूलास्‍त्र से उस पर प्रहार किया; किन्तु अन्धक ने शङ्कर को प्रसन्‍न कर लिया और शिव-गणों का स्वामित्व प्राप्त किया।
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पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध

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Diti ka ek Mahabalshaali putra Andhak tha. Netra rahte huye bhi vah madandh hone ke kaaran andhon ki tarah chalta tha. Isi se uska naam Andhak pad gaya tha. Uske Aadi tatha Vaka do putra the.
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Tapasya ke prabhav ke kaaran Andhak devtaon ke liye abadhya ho gaya tha. Ek baar jab Avanti ke Kalavan me Mahadev Parvati ke saath kreeda kar rahe the, tab Andhakasur unmatt-sa vahan pahuncha aur Maa Parvati ka haran karne ki koshish karne laga. Tab kruddh huye Rudra tatha Andhak me bhishan yudh hua aur Shankar ke Pashupatastra se ghaayal hone par uske rakt se anek Andhak utpann ho gaye. Rudra ne un Andhakon ko baanon se aahat kar diya. Kintu un Andhakon ke rudhir se punah sahasron Andhak paida ho gaye. Utpann hote hi un Andhakon ne sampoorn jagat ko vyapt kar liya. Tab un mayavi Andhakon ke naash ke liye Rudra ne 197 Maatrikaayen utpann ki, jinme Maheshwari, Kaumari, Malini, Sauparni, Vaivya adi pramukh thin. Maatrikaon ne un Andhakon ka rudhir paan karna praarambh kiya; kintu ve punah badhne lage. Tab khinn hokar Shiv Vishnu ki sharan me gaye. Tab unhone 'Shushk-Revati' naamak ek Maatrika ko utpann kiya. Shushk Revati ne kshanbhar me hi un Andhakon ka rakt pee daala aur ve vinaash ko praapt ho gaye. Andhakon ke nasht ho jaane par Andhak niraash ho gaya. Tab Bhagwan Shankar ne Shoolastra se us par prahaar kiya; kintu Andhak ne Shankar ko prasann kar liya aur Shiv-ganon ka swaamitva praapt kiya.
***
आभार - यह कहानी श्री गौरीनाथ शास्‍त्री द्वारा सम्‍पादित पुस्‍तक पुराण कथा कोष अध्‍ययनमाला तृतीय-पुष्‍पम् से ली गयी है। पुस्‍तक का प्रकाशन 1983 में पौराणिक तथा वैदिक अध्‍ययन अनुसंधान संस्‍थान नैमिषारण्‍य सीतापुर के द्वारा किया गया है।  

शनिवार, 20 सितंबर 2025

जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती

***
Goga Jaharveer ki Aarti
***
जय -जय जाहरवीर हरे
जय -जय गोगावीर हरे
धरती पर आकर के 
भक्तों के कष्ट हरे ||जय जय||
*
जो कोई भक्ति करे प्रेम से 
निसादिन करे प्रेम से 
भागे दुःख परे
*
विघ्न हरन  मंगल के दाता
जन -जन का कष्ट हरे
*
जेवर राव के पुत्र कहाए
रानी बाछल माता 
*
बागड़ में जन्म लिया गुगा ने 
सब जय -जयकार करे ||जय जय||
*
धर्म कि बेल बढाई निशदिन 
तपस्या रोज करे
*
दुष्ट जनों को दण्ड दिया
जग में रहे आप खरे ||जय -जय||
*
सत्य अहिंसा का व्रत धारा 
झूठ से सदा डरे
*
वचन भंग को बुरा समझ कर
घर से आप निकरे || जय-जय ||
*
माडी में करी तपस्या 
अचरज सभी करे
*
चारों दिशाओं  से भगत आ रहे 
जोड़े हाथ खड़े || जय-जय || 
*
अजर अमर है नाम तुम्हारा 
हे प्रसिद्ध जगत उजियारा
*
भूत  पिशाच निकट नहीं आवे 
जो कोई जाहर  नाम गावे || जय जय ||
*
सच्चे मन से जो ध्यान लगावे 
सुख सम्पति घर आवे 
*
नाम तुम्हारा जो कोई गावे 
जन्म जन्म के दुःख बिसरावे || जय-जय ||
*
भादो कृष्‍ण नोमी के दिन जो पूजे 
वह विघ्नों से नहीं डरे 
*
जय-जय जाहर वीर हरे
जय श्री गोगा वीर हरे
***
जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती
***
Jai -Jai Jaharveer Hare
Jai -Jai Gogaveer Hare
*
Dharti par aakar ke
Bhakton ke kasht hare ||Jai Jai||
*
Jo koi bhakti kare prem se
Nisadin kare prem se
Bhaage dukh pare
*
Vighn haran mangal ke data
Jan -jan ka kasht hare
*
Jewar Rao ke putra kahaaye
Rani Bachhal mata
*
Bagad mein janm liya Guga ne
Sab jai -jaikaar kare ||Jai Jai||
*
Dharm ki bel badhaai nishdin
Tapasya roj kare
*
Dusht janon ko dand diya
Jag mein rahe aap khare ||Jai -Jai||
*
Satya ahinsa ka vrat dhara
Jhooth se sada dare
*
Vachan bhang ko bura samajh kar
Ghar se aap nikre || Jai-Jai ||
*
Madi mein kari tapasya
Acharaj sabhi kare
*
Charon dishaon se bhagat aa rahe
Jode haath khade || Jai-Jai ||
*
Ajar amar hai naam tumhara
He prasiddh jagat ujiyaara
*
Bhoot pishaach nikat nahin aave
Jo koi Jahar naam gaave || Jai Jai ||
*
Sachche man se jo dhyan lagave
Sukh sampati ghar aave
*
Naam tumhara jo koi gaave
Janm janm ke dukh bisraave || Jai-Jai ||
*
Bhado Krishn Nomi ke din jo pooje
Vah vighnon se nahin dare
*
Jai-Jai Jahar Veer Hare
Jai Shri Goga Veer Hare
***