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जय श्री नंदी सती | Jay Shri Nandi Sati Aarti Lyrics in Hindi and English

जय श्री नंदी सती | Jay Shri Nandi Sati Aarti Lyrics in Hindi and English * जय श्री नंदी सती आरती माता जगदम्बा की महिमा, दिव्य स्वरूप, भव्य मंदिर और अखण्ड ज्योति का सुंदर वर्णन करती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करने से भय, दुख और संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस लेख में आरती के बोल हिंदी और English Transliteration में दिए गए हैं, ताकि सभी श्रद्धालु सरलता से पाठ कर सकारात्मक ऊर्जा और माँ की असीम कृपा प्राप्त कर सकें। * जय श्री नंदी सती,  मैया जय जगदम्बा माता। अपने भक्त जनों की मैया,  दूर करो विपत्ति। जय...॥ * अवनि अनन्तर ज्योति अखण्डित,  पीड़ित चहुँ कुंभमा। दुर्जन दलन दुखहर्ता की,  विलस सदा प्रतिपाला। जय...॥ * मरकत मणि मन्दिर अति मनोहर,  शोभा लखे न परे। ललित ध्वजा चहुँ ओर,  कंचन कलश धरे। जय...॥ * घण्टा घनन घड़ियाल बाजत,  शंख मृदंगा घुरे। किन्नर गायन करते,  देव-बन्दन उचरे। जय...॥ * सप्त मातृका करे आरती,  पुराण ध्यान धरे। विविध प्रकार के व्यंजन,  श्री फल भेंट धरे। जय...॥ * संकट विकट विदारिणी,...
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श्री खाटू श्याम जी आरती | ॐ जय श्री श्याम हरे | Om Jay Shyam Hare Lyrics in Hindi and English

श्री खाटू श्याम जी आरती | ॐ जय श्री श्याम हरे | Om Jay Shyam Hare Lyrics in Hindi and English * श्री खाटू श्याम जी की आरती श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। “ॐ जय श्री श्याम हरे” आरती के पाठ से भक्तों को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और बाबा श्याम का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। इस लेख में श्री खाटू श्याम जी की आरती के हिंदी और English Lyrics उपलब्ध हैं, जिससे सभी भक्त आसानी से पाठ कर सकें। आरती में बाबा श्याम के दिव्य स्वरूप, पूजा, भोग और उनकी कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। जय श्री श्याम! * ॐ जय श्री श्याम हरे,  बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत,  अनुपम रूप धरे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * रतन जड़ित सिंहासन,  सिर पर चंवर ढुरे। तन केसरिया बागो,  कुण्डल श्रवण पड़े॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * गल पुष्पों की माला,  सिर पर मुकुट धरे। खेवत धूप अग्नि पर,  दीपक ज्योति जले॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * मोदक खीर चूरमा,  सुवरण थाल भरे। सेवक भोग लगावत,  सेवा नित्य करे॥ ॐ जय श्री श्याम हरे॥ * झांझ कटोरा और घड़ियाल,  शंख मृदंग घुरे। भक्त आरती गावें,  जय-जयकार करे...

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English * श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै । तन मन धन सब अर्पण कीजै । नेत्र लाल भिरकुटी विशाला । चले बिन पैर सुने बिन काना । उनको अपना सर्वस्व दीजे।। * पाताल लोक में तेरा वासा । शंकर विघन विनायक नासा । भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।। * शीश मणि मुख विषम ज्वाला । दुष्ट जनों का करे निवाला । भगत तेरो अमृत रस पिजे।। * वेद पुराण सब महिमा गावें । नारद शारद शीश निवावें । सावल सा से वर तुम दीजे।। * नोंवी के दिन ज्योत जगावे । खीर चूरमे का भोग लगावे । रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै । आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। *** Shri Naagdev Aarti Panchami ki keejai. Tan man dhan sab arpan keejai. Netra laal bhirkuti vishaala. Chale bin pair sune bin kaana. Unko apna sarvasva deeje. * Pataal lok mein tera vaasa. Shankar vighan vinaayak naasa. Bhagton ka sarv kasht har lijai. * Sheesh mani mukh visham jwala. Dusht janon ka kare nivaala. Bhagat tero amrit ras pije. * Ved Puraan sab mahima gaaven. Narad Sharad sheesh nivaaven. Saaval sa se var tum dee...

आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English

आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English * आरती श्री भैरवनाथ जी की श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। भगवान भैरवनाथ को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है, जो भक्तों की रक्षा करते हैं तथा भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश करते हैं। इस आरती में उनकी महिमा, श्वान की सवारी, भूत-प्रेतों पर आधिपत्य और मेहंदीपुर बालाजी से संबंध का वर्णन मिलता है। श्रद्धापूर्वक पाठ से भय दूर, आत्मविश्वास, सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। यहाँ आरती हिंदी एवं अंग्रेज़ी लिप्यंतरण सहित उपलब्ध है। * सुनो जी भैरव लाडिले,  कर जोड़ कर विनती करूँ। कृपा तुम्हारी चाहिए,  मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ। मैं चरण छूता आपके,  अर्ज़ी मेरी सुन लीजिये। मैं हूँ मति का मंद,  मेरी कुछ मदद तो कीजिये। महिमा तुम्हारी बहुत,  कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ। सुनो जी भैरव… * करते सवारी श्वान की,  चारों दिशा में राज्य है। जितने भूत और प्रेत,  सबके आप ही सरताज हैं। हथियार हैं जो आपके,  उसका क्या वर्णन करूँ।...