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विष्णु स्तोत्रम‌ | Vishu Stotram Lyrics in Hindi and English

मङ्गलं भगवान् विष्णुः  मङ्गलं गरुडध्वजः । मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः  मङ्गलाय तनो हरिः ॥१॥ * मङ्गलं लक्ष्मण-भ्राता  मङ्गलं जानकीवरः । मङ्गलं सुन्दरो रामो  मङ्गलं हनुमत्प्रियः ॥२॥ * मङ्गलं परमानन्दो  मङ्गलं परमेश्वरः । मङ्गलं श्रीपद्मनाभो  मङ्गलं पद्मलोचनः ॥३॥ * मङ्गलं करुणासिन्धुः  मङ्गलं विश्वपालकः । मङ्गलं सच्चिदानन्दो  मङ्गलं जगदीश्वरः ॥४॥ * मङ्गलं श्रीरङ्गनाथो  मङ्गलं पुरुषोत्तमः । मङ्गलं कमलाकान्तो  मङ्गलं भक्तवत्सलः ॥५॥ * मङ्गलं कमलानन्दो  मङ्गलं कमलालयः । मङ्गलं भगवान् कृष्णो  मङ्गलं विश्वजीवनः ॥६॥ * मङ्गलं माधवो धीरो  मङ्गलं धरणीधरः । मङ्गलं देवकीपुत्रो  मङ्गलं पुरुषोर्वर्द्धनः ॥७॥ * मङ्गलं रघुनामानो  मङ्गलं बन्धुवान्धवः । मङ्गलं रुक्मिणीनाथो  मङ्गलं शोभतिप्रियः ॥८॥ * मङ्गलं गोकुलाधीशो  मङ्गलं देवकीसुतः । मङ्गलं लोकसारङ्गो  मङ्गलं धर्मवर्द्धनः ॥९॥ * मङ्गलं सर्वशास्त्रज्ञो  मङ्गलं साधुवल्लभः ।१०॥ * इदं स्तोत्रं महदिव्यं  महापापान्नाशनम् । व्यासेन् कथितं पूर्वं  महापातकनाशनम् ॥११॥ * ...
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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा। Papankusha Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi and English

पापांकुशा एकादशी की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं, भगवान श्री हरि विष्णु जी की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे । पापांकुशा एकादशी व्रत का माहात्म्य  युधिष्ठिर ने पूछा : हे मधुसूदन! अब आप कृपा करके यह बताइये कि आश्विन के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है और उसका माहात्म्य क्या है ?   भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन्! आश्विन के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, वह ‘पापांकुशा’ के नाम से विख्यात है। वह सब पापों को हरने वाली, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली, शरीर को निरोग बनाने वाली तथा सुन्दर स्त्री, धन तथा मित्र देने वाली है। यदि अन्य कार्य के प्रसंग से भी मनुष्य इस एकमात्र एकादशी को उपास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं प्राप्त होती ।   राजन्! एकादशी के दिन उपवास और रात्रि में जागरण करने वाले मनुष्य अनायास ही दिव्य रुपधारी, चतुर्भुज, गरुड़ की ध्वजा से युक्त, हार से सुशोभित और पीताम्बरधारी होकर भगवान विष्णु के धाम को जाते हैं । राजेन्द्र! ऐसे पुरुष मातृपक्ष की दस, पितृपक्ष की दस तथा पत्नी के पक्ष की भी दस पीढ़ियों का उद्धार कर देते हैं । उस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति क...

श्री युगलाष्टकम् | Shri Yugalastakam Lyrics in Hindi and English

॥ श्री युगलाष्टकम् ॥ ** कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेम मयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 1 ॥ ** कृष्णस्य द्रविणं राधा राधायाः द्रविणं हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 2 ॥ ** कृष्णप्राणमयी राधा राधाप्राणमयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 3 ॥ ** कृष्णद्रवामयी राधा राधाद्रवामयो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 4 ॥ ** कृष्ण गेहे स्थिता राधा राधा गेहे स्थितो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 5 ॥ ** कृष्णचिन्तास्थिता राधा राधाचिन्तास्थितो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 6 ॥ ** नीलाम्बरा धरा राधा पीताम्बरो धरो हरिः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 7 ॥ ** वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः । जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम ॥ 8 ॥ ** ॥ श्री युगलाष्टकम् सम्पूर्ण ॥ ***** ॥ Shree Yugalaashtakam ॥ ** Krishnapremamayee Raadha Raadhaaprem Mayo Harih. Jeevanen Dhanen Nityam Raadhaakrishnagathirmam ॥ 1 ॥ ** Krishnasya Dravinam Raadha Raadhaayaah Dravinam Harih. Jeevanen Dhanen Nityam Raadhaakrishnagathirmam ॥ 2 ॥ ** Kri...

पुत्रदा / पवित्रा एकादशी व्रतकथा । Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi and English

प्राचीन काल में एक बार युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है। पुत्रदा एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूजा के बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए, ऐसा करने से व्रत पूर्ण होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अब आप शांतिपूर्वक इसकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है। पुत्रदा एकादशी व्रत कथा! द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था, कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुला...