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हनुमान स्‍तुति || Hanuman Stuti || नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम् || Namo Anjani Nandanam Vayuputam

हनुमान स्‍तुति || Hanuman Stuti || नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्  || Namo Anjani Nandanam Vayuputam   नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्   सदा मंगलागार श्री राम दूतम्  महावीर वीरेश त्रिकाल वेशम्  घनानन्द निर्द्वन्द हर्तां कलेशम्  सजीवन जड़ी लाय नागेश काजे गयी मूर्छना राम भ्राता निवाजे सकल दीन जन के हरो दुःख स्वामी नमो वायुपुत्रं नमामि नमामि नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्   सदा मंगलागार श्री राम दूतम् विनम्र अनुरोध: अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comments) में जय श्री राम अवश्य अंकित करें। ***** यह भी पढें - भगवान भोले शंकर की स्‍तुतियॉं   सोमवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें   मंगलवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  बुधवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  गुरुवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  शुक्रवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  शनिवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें रविवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें 

ऋणमोचन मंगल स्‍तोत्र || Rin Mochan Mangal Stotra || मङ्गलो भूमिपुत्रश्च || Mangalo Bhumiputrashcha

ऋणमोचन मंगल स्‍तोत्र || Rin Mochan Mangal Stotra || मङ्गलो भूमिपुत्रश्च || Mangalo Bhumiputrashcha भूमिपुत्र भगवान मंगलदेव ऋणमोचक हैं एवं सुखों को देने वाले हैं। जब किसी व्‍यक्ति पर कर्ज की स्थिति बहुत अधिक बढ़ जाये तब किसी शुभ तिथि से लाल वस्त्र धारण कर मंगल देव (मंगल यन्त्र को प्राण प्रतिष्ठित कर) व हनुमान जी के समक्ष इस स्तोत्र का नियमित 3, 5, 8, 9  अथवा 11 पाठ 45 दिन तक प्रतिदिन करे | इस पाठ को करने से पूर्व लाल वस्त्र बिछा कर मंगल यन्त्र व महावीर हनुमान जी को स्थापित करे , सिंदूर व चमेली के तेल का चोला अर्पित कर अपने बाये हाथ की तरफ देसी घी का दीपक व दाहिने हाथ की तरफ सरसो के तेल या तिल के तेल का दीपक स्थापित करे साथ ही हनुमान जी को गुड चने व बेसन का कुछ भोग अवश्य लगाये |  इस पाठ को करने से निश्‍चय ही ऋणमुक्ति मिलेगी।  ऋणमोचन मंगल स्‍तोत्र इस प्रकार है- ** ऋणमोचन मंगल स्‍तोत्र || Rin Mochan Mangal Stotra || मङ्गलो भूमिपुत्रश्च || Mangalo Bhumiputrashcha ** मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः। स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः ॥१॥ ** लोहितो लोहिताक्षश्च...

मंगलवार व्रत की आरती Mangalvar Vrat Ki Aarti // मंगल मूरति जय जय हनुमन्ता // Mangal Murati Jay Jay Hanumanta

मंगलवार व्रत की आरती // Mangalvar Vrat Ki Aarti // मंगल मूरति जय जय हनुमन्ता // Mangal Murati Jay Jay Hanumanta मंगल मूरति जय जय हनुमन्ता, मंगल मंगल देव अनन्ता हाथ वज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेउ साजे शंकर सुवन केसरी नन्दन, तेज प्रताप महा जग वन्दन॥ लाल लंगोट लाल दोउ नयना, पर्वत सम फारत है सेना काल अकाल जुद्ध किलकारी, देश उजारत क्रुद्ध अपारी॥ राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनि पुत्र पवन सुत नामा महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥ भूमि पुत्र कंचन बरसावे, राजपाट पुर देश दिवाव शत्रुन काट-काट महिं डारे, बन्धन व्याधि विपत्ति निवारें॥ आपन तेज सम्हारो आपे, तीनो लोक हांक ते कांपै सब सुख लहैं तुम्हारी शरणा, तुम रक्षक काहू को डरना॥ तुम्हरे भजन सकल संसारा, दया करो सुख दृष्टि अपारा रामदण्ड कालहु को दण्डा, तुमरे परस होत सब खण्डा॥ पवन पुत्र धरती के पूता, दो मिल काज करो अवधूता हर प्राणी शरणागत आये, चरण कमल में शीश नवाये॥ रोग शोक बहुत विपत्ति घिराने, दरिद्र दुःख बन्धन प्रकटाने तुम तज और न मेटन हारा, दोउ तुम हो महावीर अपारा॥ दारिद्र दहन...

श्री मंगलवार व्रत कथा Shri Mangalvar Vrat Katha Lyrics in Hindi | Shri Hanuman Ji Vrat Katha

श्री मंगलवार व्रत कथा Shri Mangalvar Vrat Katha Lyrics in Hindi | Shri Hanuman Ji Vrat Katha  मंगलवार के व्रत की महत्ता | Mangalwar Ke Vrat Ki Mahatta हमारा देश भारतवर्ष धर्म-परायण एवं व्रतों का देश है , हमारे यहां वार , मास , संक्रान्ति , तिथि आदि सभी के लिए अलग-अलग व्रत हैं। प्रत्येक व्रत का अलग-अलग महत्त्व और फल है। व्रत न केवल अपने आराध्य देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए , सुख शान्ति की कामना , धन , पति , पुत्र प्राप्ति हेतु बल्कि महाकष्ट , असाध्य रोगों के समूद दमन , अपने पूर्व पापकर्मों के फलस्वरूप मिलने वाले दुःखों के निवारण हेतु प्रायश्चित्त रूप में भी किये जाते हैं। वास्तव में संसार महासागर में मानव मात्र के जीवन रूपी नौका को पार लगाने वाले , मोह-माया के बंधनों से मुक्त हो भगवान के ध्यान में लग मोक्ष की प्राप्ति में सहायक अगर कोई है तो यह व्रत है। बीमारी एवं शारीरिक कष्टों को दूर कने लिए विभिन्न प्रकार के व्रतों का उल्लेख हमारे शास्त्रों में किया गया है। मानव को मिलने वाले सुखों-दुःखों का मूल कारण उसके पाप एवं पुण्य कर्मों का फल है। पाप कर्मों के फलस्वरूप मिलने वाले ...