रविवार, 5 जुलाई 2026

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै | Nagdev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
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श्रीनागदेव आरती पंचमी की कीजै ।
तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
नेत्र लाल भिरकुटी विशाला ।
चले बिन पैर सुने बिन काना ।
उनको अपना सर्वस्व दीजे।।
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पाताल लोक में तेरा वासा ।
शंकर विघन विनायक नासा ।
भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।।
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शीश मणि मुख विषम ज्वाला ।
दुष्ट जनों का करे निवाला ।
भगत तेरो अमृत रस पिजे।।
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वेद पुराण सब महिमा गावें ।
नारद शारद शीश निवावें ।
सावल सा से वर तुम दीजे।।
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नोंवी के दिन ज्योत जगावे ।
खीर चूरमे का भोग लगावे ।
रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै ।
आरती श्री नागदेव जी कीजै ।।
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Shri Naagdev Aarti Panchami ki keejai.
Tan man dhan sab arpan keejai.
Netra laal bhirkuti vishaala.
Chale bin pair sune bin kaana.
Unko apna sarvasva deeje.
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Pataal lok mein tera vaasa.
Shankar vighan vinaayak naasa.
Bhagton ka sarv kasht har lijai.
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Sheesh mani mukh visham jwala.
Dusht janon ka kare nivaala.
Bhagat tero amrit ras pije.
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Ved Puraan sab mahima gaaven.
Narad Sharad sheesh nivaaven.
Saaval sa se var tum deeje.
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Nonvi ke din jyot jagaave.
Kheer choorme ka bhog lagaave.
Raamnivaas tan man dhan sab arpan keejai.
Aarti Shri Naagdev ji keejai.
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आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English

आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English
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आरती श्री भैरवनाथ जी की भक्तों के लिए श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। भगवान भैरवनाथ को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप माना जाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं तथा भय, संकट, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं का नाश करते हैं। इस आरती में भक्त विनम्र भाव से भैरवनाथ जी से कृपा, मार्गदर्शन और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की प्रार्थना करता है।
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आरती के प्रत्येक पद में भैरवनाथ जी की महिमा, उनकी श्वान (कुत्ते) की सवारी, भूत-प्रेतों पर उनके आधिपत्य तथा मेहंदीपुर बालाजी से उनके दिव्य संबंध का सुंदर वर्णन मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से इस आरती का नियमित पाठ करने से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है तथा जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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सुनो जी भैरव लाडिले, 
कर जोड़ कर विनती करूँ।
कृपा तुम्हारी चाहिए, 
मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ।
मैं चरण छूता आपके, 
अर्ज़ी मेरी सुन लीजिये।
मैं हूँ मति का मंद, 
मेरी कुछ मदद तो कीजिये।
महिमा तुम्हारी बहुत, 
कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ।
सुनो जी भैरव…
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करते सवारी श्वान की, 
चारों दिशा में राज्य है।
जितने भूत और प्रेत, 
सबके आप ही सरताज हैं।
हथियार हैं जो आपके, 
उसका क्या वर्णन करूँ।
सुनो जी भैरव…
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माता जी के सामने तुम, 
नृत्य भी करते सदा।
गा गा के गुण अनुवाद से, 
उनको रिझाते हो सदा।
एक सांकली है आपकी, 
तारीफ़ उसकी क्या करूँ।
सुनो जी भैरव…
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बहुत सी महिमा तुम्हारी, 
मेहंदीपुर सरनाम है।
आते जगत के यात्री, 
बजरंग का स्थान है।
श्री प्रेतराज सरकार के, 
मैं शीश चरणों में धरूँ।
सुनो जी भैरव…
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निशिदिन तुम्हारे खेल से, 
माताजी खुश रहें।
सिर पर तुम्हारे हाथ रख कर, 
आशीर्वाद देती रहें।
कर जोड़ कर विनती करूँ, 
अरु शीश चरणों में धरूँ।
सुनो जी भैरव…
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Aarti Shri Bhairavnath Ji Ki
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Suno Ji Bhairav Laadile, 
Kar Jod Kar Vinati Karun.
Kripa Tumhari Chahiye, 
Main Dhyan Tumhara Hi Dharun.
Main Charan Chhoota Aapke, 
Arzi Meri Sun Lijiye.
Main Hoon Mati Ka Mand, 
Meri Kuchh Madad To Kijiye.
Mahima Tumhari Bahut, 
Kuchh Thodi Si Main Varnan Karun.
Suno Ji Bhairav...
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Karte Savaari Shwaan Ki, 
Charon Disha Mein Rajya Hai.
Jitne Bhoot Aur Pret, 
Sabke Aap Hi Sartaaj Hain.
Hathiyaar Hain Jo Aapke, 
Uska Kya Varnan Karun.
Suno Ji Bhairav...
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Maata Ji Ke Saamne Tum, 
Nritya Bhi Karte Sada.
Ga Ga Ke Gun Anuvaad Se, 
Unko Rijhaate Ho Sada.
Ek Saankali Hai Aapki, 
Taarif Uski Kya Karun.
Suno Ji Bhairav...
*
Bahut Si Mahima Tumhari, 
Mehandipur Sarnaam Hai.
Aate Jagat Ke Yaatri, 
Bajrang Ka Sthaan Hai.
Shri Pretraj Sarkar Ke, 
Main Sheesh Charanon Mein Dharun.
Suno Ji Bhairav...
*
Nishidin Tumhare Khel Se, 
Mataji Khush Rahen.
Sir Par Tumhare Haath Rakh Kar, 
Aashirvaad Deti Rahen.
Kar Jod Kar Vinati Karun, 
Aru Sheesh Charanon Mein Dharun.
Suno Ji Bhairav...
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जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English 
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सूर्य देव आरती हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली आरती मानी जाती है। भगवान सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य, सफलता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह आरती विशेष रूप से रविवार के दिन और सूर्य उपासना के समय श्रद्धा एवं भक्ति के साथ गाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
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इस लेख में आपको Jai Kashyap-Nandan Om Jai Aditi-Nandan, जो कि प्रसिद्ध सूर्य देव आरती है, के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्राप्त होंगे। साथ ही इसका सरल उच्चारण (Transliteration), पूजा विधि और आरती का धार्मिक महत्व भी बताया गया है। सूर्य देव को त्रिभुवन के अंधकार को दूर करने वाला और भक्तों के हृदय को शुद्ध करने वाला देव माना गया है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की आराधना से स्वास्थ्य में सुधार, आत्मविश्वास में वृद्धि, नेत्र रोगों में राहत तथा करियर में सफलता प्राप्त होती है। यह आरती व्यक्ति के जीवन में तेज, शक्ति और सकारात्मकता का संचार करती है।
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जय कश्यप-नन्दन, 
ॐ जय अदिति-नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, 
भक्त-हृदय-चन्दन।। टेक।।
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सप्त-अश्व-रथ राजित, 
एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, 
मानस-मल-हारी।। जय।।
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सुर-मुनि-भूसुर-वंदित, 
विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, 
दिव्य किरण माली।। जय।।
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सकल-सुकर्म-प्रदाता, 
सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, 
भव-बंधन भारी।। जय।।
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कमल-समूह-विकासक, 
नाशक जय तापा।
सेवत सहज हत अति 
मनुजनि-संतापा।। जय।।
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नेत्र-व्याधि-हर सुन्दर, 
भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि-विमोचन संतत 
परहित-व्रतधारी।। जय।।
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सूर्यदेव करुणाकर, 
अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, 
तत्त्वज्ञान दीजै।। जय।।
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Jai Kashyap-Nandan,
Om Jai Aditi-Nandan.
Tribhuvan-Timir-Nikandan,
Bhakt-Hriday-Chandan.. Tek..
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Sapt-Ashva-Rath Rajit,
Ek Chakradhari.
Dukhahari, Sukhkari,
Manas-Mal-Hari.. Jai..
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Sur-Muni-Bhusur-Vandit,
Vimal Vibhavshali.
Agha-Dal-Dalan Divakar,
Divya Kiran Mali.. Jai..
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Sakal-Sukarm-Pradata,
Savita Shubhkari.
Vishva-Vilochan Mochan,
Bhav-Bandhan Bhari.. Jai..
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Kamal-Samuh-Vikasak,
Nashak Jai Tapa.
Sevat Sahaj Hata Ati
Manujani-Santapa.. Jai..
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Netra-Vyadhi-Har Sundar,
Bhu-Peeda-Hari.
Vrishti-Vimochan Santat
Parahit-Vratdhari.. Jai..
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Suryadev Karunakar,
Ab Karuna Kijai.
Har Agyan-Moh Sab,
Tattvagyan Dijai.. Jai..
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आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English

आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English
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आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English

 आरती युगलकिशोर की कीजै भगवान राधा-कृष्ण (युगल किशोर) को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय और मधुर आरती है, जिसका पाठ भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिदिन तथा विशेष अवसरों पर करते हैं। यह आरती श्रीकृष्ण और राधारानी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक शोभा और भक्तों पर बरसने वाली कृपा का सुंदर वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती का नियमित गायन करने से मन को शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

इस लेख में आपको आरती युगलकिशोर की कीजै के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी और English (Transliteration) में उपलब्ध हैं। साथ ही आरती का महत्व, पाठ करने का सही समय, पूजा में इसका स्थान तथा श्री राधा-कृष्ण की आराधना से जुड़े धार्मिक लाभों की जानकारी भी मिलेगी। यदि आप Aarti Yugalkishor Ki Kijiye Lyrics in Hindi, Aarti Yugalkishor Ki Lyrics in English, राधा कृष्ण आरती, युगल किशोर आरती, या Radha Krishna Aarti Lyrics खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण और उपयोगी स्रोत है।

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आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन धन न्योछावर कीजै॥
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गौरश्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का रूप नयन भरि पीजै॥
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रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
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ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी॥
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फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
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कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
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श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल नर नारी॥
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नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
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Aarti Yugalkishor Ki Kijiye
Tan Man Dhan Nayochawar Kijiye
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Gorshyam Mukh Nirkhan Lijiye
Hari Ka Rup Nayan Bhari Pijiye
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Ravi Shashi Koti Badan Ki Shobha
Tahi Nirkhi Mero Mann Lobha
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Odhe Neel Peet Pat Sari
Kunjbihari Girivardhari
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Fulan Sej  Phul Ki Mala
Ratan Singhasan Baatai Nandlal
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Kanchan Thar Kapoor Ki Baati 
Hari Aae Nirmal Bhai Chati
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Sri Purushotam Girivardhari
Aarti Kare Sakal Nar Nari 
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Nandnandan Brijbhan Kishori 
Parmanand Sawami Avichal Jori 
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बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English 
बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की नियमित पूजा, उपासना और आरती करने से कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। इसलिए श्रद्धा और विधिपूर्वक बुध देव की आराधना करने से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा बोलने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
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ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह के शुभ होने पर शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बुध देव की कृपा लाभ, आर्थिक प्रगति और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके साथ ही, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मधुरता और बेहतर संवाद स्थापित होने में सहायता मिलती है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह के मजबूत होने से त्वचा, तंत्रिका तंत्र (नसों) तथा मानसिक संतुलन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित चिकित्सा आवश्यक है। बुध देव की पूजा को आध्यात्मिक आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
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ॐ जय बुध देव हरे, 
प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट, 
क्षण में दूर करे।। 
ॐ जय बुध देव हरे
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शीत चंद के सुत तुम, 
शीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे, 
नैन छवि अटके।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
रूप रूप धर तुम ही, 
जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते, 
सब जग के सुखकारी।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
तन पर पीत अम्बर, 
माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु, 
सुर नर मुनि मोहे।। 
ॐ जय बुध देव हरे
*
जो जन तेरी आरती, 
प्रेम सहित गावै।
सो निश्चय ही मनवांछित, 
फल पावै।। 
ॐ जय बुध देव हरे
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बुध देव की आरती, 
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी, 
मनवांछित फल पावै।। 
ॐ जय बुध देव हरे
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Om Jai Budh Dev Hare,
Prabhu Jai Budh Dev Hare.
Bhakt Janon Ke Sankat,
Kshan Mein Door Kare.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Sheet Chand Ke Sut Tum,
Sheer Samudra Pragate.
Hem Mukut Sir Sohe,
Nain Chhavi Atake.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Roop Roop Dhar Tum Hi,
Jag Ke Hitkari.
Bhakton Ki Peeda Harte,
Sab Jag Ke Sukhkari.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Tan Par Peet Ambar,
Mala Gal Sohe.
Darshan Pavat Sadhu,
Sur Nar Muni Mohe.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Jo Jan Teri Aarti,
Prem Sahit Gaavai.
So Nishchay Hi Manvanchhit,
Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
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Budh Dev Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaavai.
Kahat Shivanand Swami,
Manvanchhit Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
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