हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ जग सिरमौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ** साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमर कर दे, संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ** लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम, मानवता का त्रास हरें हम, सीता, सावित्री, दुर्गा मां, फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ******
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