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श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi // Lyrics in Hindi

श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् // Shri Rinmochanmahaganapatistotram in Hindi अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता। मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।। रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैः क्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम्। दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रं ध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम्।। स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् । षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ।।1।। एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्। एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ।।2।। महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम्। महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ।।3।। कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्। कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ।।4।। रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्। रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।5।। पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्। पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।6।। धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम्। होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ।।7।। फा...

श्री गणपति जी की आरती || Shri Ganapati Ji Ki Aarti || ओम जय गौरीनन्‍दा || Om Jay Gaurinanda

श्री गणपति जी की आरती || Shri Ganapati Ji Ki Aarti || ओम जय गौरीनन्‍दा || Om Jay Gaurinanda ओम जय गौरीनन्‍दा,  हरि जय गिरिजानन्‍दा ।  गणपति आनन्‍दकन्‍दा,  गुरुगणपति आनन्‍दकन्‍दा ।  मैं चरणन वंदा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  सूंंड सूंडालो नेत्रविशालो कुण्‍डल झलकन्‍दा,  हरि कुण्‍डल झलकन्‍दा।   कुंकुम केशर चन्‍दन, कुंकुम केशर चन्‍दन,  सिंदुर वदन बिंदा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  मुकुट सुघड सोहंता मस्‍तक शोभन्‍ता,  हरि मस्‍तक शोभन्‍ता।  बहियां बाजूबन्‍दा हरि बहियां बाजूबन्‍दा,  पहुंची निरखन्‍ता।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  रत्‍न जडित सिंहासन सोहत गणपति आनंदा,  हरि गणपति आनन्‍दा।  गले मोतियन की माला गले वैजयन्‍ती माला  सुरनर मुनि वृन्‍दा । ओम जय गौरीनन्‍दा।  मूषक वाहन राजत शिवसुत आनन्‍दा  हरि शिवसुत आनन्‍दा।  भजत शिवानन्‍द स्‍वामी जपत हरि हर स्‍वामी  मेटत भवफन्‍दा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  ****** विनम्र अनुरोध:  अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comm...

सरस्‍वती वन्‍दना || Saraswati Vandana || हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी || He Hansvahini Gyandayini

हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ जग सिरमौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ** साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमर कर दे, संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ** लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम, मानवता का त्रास हरें हम, सीता, सावित्री, दुर्गा मां, फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥ हे हंसवाहिनी-ज्ञानदायिनी अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥ ******

सरस्वती वंदना || वीणावादिनी बुद्धि की दाता || Saraswati Vandana || Veena Vadini Buddhi Ki Data

वीणावादिनी बुद्धि की दाता वीणावादिनी, स्वरदायिनी माँ नारायणी स्वर दो ! सिद्धि दायिनी वीणाधारिणी कर करतब करि कारिणी माँ स्वर्दायिनी स्वर दो ! ब्रह्माणी, शिव पूजनी दिन रात सदा मनभावनी माँ वीणावादिनी स्वर दो ! जय -जय -जय माँ दाता जय -जय -जय जयकारिणी वीणा वादिनी स्वर दो ! जिह्वा पर नित वास करो हिय में माँ उल्लास भरो वीणा वादिनी स्वर दो ! परमारथ हो ह्रदय में माँ निर्मल मन मेरा कर दो वीणा वादिनी स्वर दो ! काया कल्प करो तनका प्रतिपल माँ तूँ वर दो वीणा वादिनी स्वर दो ! करुणा तेज भरो तन में सागर सा वाणी मन दो वीणा वादिनी स्वर दो !! आभार - यह वन्‍दना श्री सुखमंगल सिंह जी द्वारा उपलब्‍ध कराई गयी है  इस हेतु हार्दिक आभार।  विनम्र अनुरोध: अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comments) में जय मॉं सरस्‍वती अवश्य अंकित करें।

आरती श्री सरस्वती माँ की || Shri Saraswati Maa Ki Aarti ||

आरती श्री सरस्वती माँ की || Shri Saraswati Maa Ki Aarti || आरती करूं सरस्वती मातु, हमारी हो भव भय हारी हो। हंस वाहन पदमासन तेरा, शुभ्र वस्त्र अनुपम है तेरा।। रावण का मन कैसे फेरा, वर मांगत बन गया सवेरा। यह सब कृपा तिहारी, उपकारी हो मातु हमारी हो।। तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो, हम अम्बुजन विकास करती हो। मंगल भवन मातु सरस्वती हो, बहुमूकन वाचाल करती हो। विद्या देने वाली वीणा, धारी हो मातु हमारी। तुम्हारी कृपा गणनायक, लायक विष्णु भये जग के पालक। अम्बा कहायी सृष्टि ही कारण, भये शम्भु संसार ही घालक। बन्दों आदि भवानी जग, सुखकारी हो मातु हमारी। सदबुद्धि विद्याबल मोही दीजै, तुम अज्ञान हटा रख लीजै। जन्मभूमि हित अर्पण कीजै, कर्मवीर भस्महिं कर दीजै।। ऐसी विनय हमारी भवभय हरी, मातु हमरी हो, आरती करूँ सरस्वती मातु।। चित्र theoldgiftshop.com  से साभार 

श्री सरस्वती चालीसा || Shri Saraswati Chalisa ||

श्री सरस्वती चालीसा || Shri Saraswati Chalisa || दोहा जनक जननि पदम दुरज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि। पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। राम सागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु।। चौपाई जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी, जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी। जय जय जय वीणाकर धारी, करती सदा सुहंस सवारी। रूप चतुर्भुजधारी माता, सकल विश्व अन्दर विख्याता। जग में पाप बुद्धि जब होती, तबही धर्म की फीकी ज्योति। तबहि मातु का निज अवतारा, पाप हीन करती महि तारा। बाल्मीकि जी थे हत्यारे, तव प्रसाद जानै संसारा। रामचरित जो रचे बनाई, आदि कवि पदवी को पाई। कालिदास जो भये विख्याता, तेरी कृपा दृष्टि से माता। तुलसी सूर आदि विद्वाना, भे और जो ज्ञानी नाना। तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा, केवल कृपा आपकी अम्बा। करहु कृपा सोई मातु भवानी, दुखित दीन निज दासहि जानी। पुत्र करई अपराध बहूता, तेहि न धरइ चित सुन्दर माता। राखु लाज जननि अब मेरी, विनय करू भाँति बहुतेरी। मैं अनाथ तेरी अवलम्बा, कृपा करउ जय जय जगदम्बा। मधु कैटभ जो अति बलवाना, बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना। समर हजार पांच मे...