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सुख कर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची || सिद्धिविनायक जी की आरती || Shri Siddhivinayak Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & English

सुख कर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची || सिद्धिविनायक जी की आरती || Shri Siddhivinayak Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ** वक्रतुण्ड महाकाय  सूर्यकोटि समप्रभ  निर्विघ्नम् कुरु मे देव  सर्व कार्येषु सर्वदा ** ॐ गं गणपतये नमो नम:  श्री सिध्धी-विनायक नमो नम:  अष्ट-विनायक नमो नम:  गणपती बाप्पा मौर्य  मंगल मूर्ति मौर्य  ** सुख कर्ता दुखहर्ता  वार्ता विघ्नाची  नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची  सर्वांगी सुन्दर  उटी-शेंदु राची  कंठी-झलके माल  मुकता फळांची  जय देव जय देव  जय देव जय देव  जय मंगल मूर्ति  दर्शन मात्रे मनःकामना पूर्ति  जय देव जय देव  ** रत्न खचित फरा  तुझ गौरी कुमरा  चंदनाची उटी  कुमकुम केशरा  हीरे जडित मुकुट  शोभतो बरा  रुन्झुनती नूपुरे  चरनी घागरिया  जय देव जय देव  जय देव जय देव  जय मंगल मूर्ति  दर्शन मात्रे मनःकामना पूर्ति  जय देव जय देव  ** लम्बोदर पीताम्बर  फनिवर वंदना  सरल सोंड  वक्रतुंडा त्रि...

जय गोरख देवा || गोरखनाथ जी की आरती || Baba Gorakhnath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & English

जय गोरख देवा || गोरखनाथ जी की आरती || Baba Gorakhnath Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ** जय गोरख देवा  जय गोरख देवा  कर कृपा मम ऊपर  नित्य करू सेवा  ** शीश जटा अति सुंदर  भाल चन्द्र सोहे  कानन कुंडल झलकत  निरखत मन मोहे  ** गल सेली विच नाग सुशोभित  तन भस्मी धारी  आदि पुरुष योगीश्वर  संतन हितकारी  ** नाथ निरंजन आप ही  घट घट के वासी  करत कृपा निज जन पर  मेटत यम फांसी  ** रिद्धि सिद्धि चरणों में लोटत  माया है दासी  आप अलख अवधूता  उतराखंड वासी  ** अगम अगोचर अकथ  अरुपी सबसे हो न्यारे   योगीजन के आप ही  सदा हो रखवारे  ** ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा  निशदिन गुण गावे  नारद शारद सुर मिल  चरनन चित लावे  ** चारो युग में आप विराजत  योगी तन धारी  सतयुग द्वापर त्रेता  कलयुग भय टारी  ** गुरु गोरख नाथ की आरती  निशदिन जो गावे  विनवित बाल त्रिलोकी  मुक्ति फल पावे  ** जय गोरख देवा || गोरखनाथ जी की आरती || Baba Gorak...

ॐ जय नरसिंह हरे || नरसिंह जी की आरती || Narsingh Bhagwan Ki Aarti Lyrics in Hindi & English

ॐ जय नरसिंह हरे || नरसिंह जी की आरती || Narsingh Bhagwan Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ** श्री नरसिंह अवतार और नरसिंह भगवान की पूजा के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी आरती सहित    परिचय    नरसिंह अवतार भगवान विष्‍णु के दशावतार में से एक है और यह भगवान विष्‍णु का एक विशिष्‍ट रूप है जिसमें भगवान नर एवं सिंह के रूप में अपने भक्‍तों के कष्‍टों का हरण करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्‍णु अपने महान भक्‍त प्रहलाद की रक्षा के लिए आधा नर एवं आधा सिंह के रूप में प्रकट हुए और हिरण्‍यकश्‍यप का वध करके धरती को राक्षसों के आतंक से मुक्‍त किया। भगवान नरसिंह अवतार भक्‍तों के मन में अटूट श्रद्धा एवं विश्‍वास पैदा करती है और हमें बताती है कि अगर हम भगवान में हटूट विश्‍वास रखते हैं तो एक न एक दिन वे अवश्‍य ही हमें अपनी शरणागति प्रदान करते हैं।  नरसिंह अवतार की पौराणिक कथा   भगवान नरसिंह अवतार की कथा रोचक होने के साथ ही साथ अत्‍यन्‍त प्रेरणादायी भी है। एक बार की बात है कि असुर राज हिरण्‍यकश्‍यप ने अपना आतंक पूरी पृथ्‍वी पर फैला रखा था। हिरण्‍यकश्‍यप ने ब्रह्म...

ॐ जय एकादशी जय एकादशी || एकादशी जी की आरती || Ekadashi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English

ॐ जय एकादशी जय एकादशी || एकादशी जी की आरती || Ekadashi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ** एकादशी का व्रत : एक परिचय   एकादशी व्रत हिन्‍दू धर्म का एक विशेष व्रत माना गया है। यह व्रत प्रत्येक मास की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को रखा जाता है। संस्‍कृत में 'एकादश' शब्द का अर्थ ग्‍यारह होता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे धार्मिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को सुख एवं समृद्धि के साथ साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। मान्यता है कि एकादशी के दिन उपवास करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है जिससे उसका आत्‍मबल जाग्रत होता है। स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने एक राक्षसी 'मुर' का वध करने के लिए एकादशी के दिन उपवास किया था। इस घटना से एकादशी का महत्व और भी बढ़ गया। इसके अलावा, एकादशी व्रत का पालन करने से भक्तों को ध्यान और साधना में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत करने वाला केवल जल का सेवन करे या फल-फूल खाकर दिन व्‍यती...

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी || संकटा जी की आरती || Sankata Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English

जय जय संकटा भवानी, करहूं आरती तेरी || संकटा जी की आरती || Sankata Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी   शरण पड़ी हूँ तेरी माता  अरज सुनहूं अब मेरी   ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी   ** नहिं कोउ तुम समान जग दाता  सुर-नर-मुनि सब टेरी   कष्ट निवारण करहुँ हमारा  लावहु तनिक न देरी  ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी  ** काम-क्रोध अरु लोभन के वश  पापहि किया घनेरी   सो अपराधन उर में आनहु  छमहु भूल बहु मेरी  ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी  ** हरहुँ सकल सन्ताप हृदय का  ममता मोह निबेरी   सिंहासन पर आज बिराजें  चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी  ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी  ** खप्पर खड्ग हाथ में धारे  वह शोभा नहिं कहत बनेरी  ब्रह्मादिक सुर पार न पाये  हारि थके हिय हेरी  ** जय जय संकटा भवानी  करहुँ आरती तेरी  ** असुरन्ह का वध किन्हा  प्रकटेउ अमत दिले...

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी राजेश्वरी जय नमो नमः || ललिता जी की आरती || Lalita Mata Ji Ki Aati Lyrics in Hindi & English

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी राजेश्वरी जय नमो नमः || ललिता जी की आरती || Lalita Mata Ji Ki Aati Lyrics in Hindi & English ** ** श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी  राजेश्वरी जय नमो नमः ** करुणामयी सकल अघ हारिणी  अमृत वर्षिणी नमो नमः ** जय शरणं वरणं नमो नमः  श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी  राजेश्वरी जय नमो नमः ** अशुभ विनाशिनी सब सुख दायिनी खल-दल नाशिनी नमो नमः ** भण्डासुर वधकारिणी जय मा  करुणा कलिते नमो नम: ** जय शरणं वरणं नमो नमः  श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी  राजेश्वरी जय नमो नमः ** भव भय हारिणी कष्ट निवारिणी शरण गति दो नमो नमः ** शिव भामिनी साधक मन हारिणी  आदि शक्ति जय नमो नमः ** जय शरणं वरणं नमो नमः जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः ** श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी  राजेश्वरी जय नमो नमः ** श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी राजेश्वरी जय नमो नमः || ललिता जी की आरती || Lalita Mata Ji Ki Aati Lyrics in Hindi & English ** Shri Mateshwari Jai Tripureshwari Rajeshwari Jai Namo Namah ** Karunamayi Sakal Agh Haarini Amrit Varshini Namo Namah ...

धर्मराज कर सिद्ध काज प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी || धर्मराज जी की आरती || Dharmaraj Ji Ki Aarti Lyric in Hindi & English

धर्मराज कर सिद्ध काज प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी || धर्मराज जी की आरती || Dharmaraj Ji Ki Aarti Lyric in Hindi & English ** ** धर्मराज कर सिद्ध काज  प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी   पड़ी नाव मझदार भंवर में  पार करो न करो देरी ** धर्मराज कर सिद्ध काज  प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी   ** धर्मलोक के तुम स्वामी  श्री यमराज कहलाते हो  जों जों प्राणी कर्म करत हैं  तुम सब लिखते जाते हो  ** अंत समय में सब ही को  न्‍याय नीति ऐसी तेरी ** धर्मराज कर सिद्ध काज  प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी   ** दूत भयंकर तेरे स्वामी  बड़े बड़े डर जाते हैं  पापी जन तो जिन्हें देखते  ही भय से थर्राते हैं  ** बांध गले में रस्सी वे  पापी जन को ले जाते हैं  चाबुक मार लाते  जरा रहम नहीं मन में लाते हैं  ** नरक कुंड भुगताते उनको  नहीं मिलती जिसमें सेरी ** धर्मराज कर सिद्ध काज  प्रभु मैं शरणागत हूं तेरी   ** धर्मी जन को धर्मराज  तुम खुद ही लेने आते हो  सादर ले जाकर उनको तुम  स्वर्ग धाम पहु...