जाहरवीर जी की आरती लोकदेवता श्री गोगाजी महाराज की श्रद्धापूर्ण आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भक्तजन इस आरती के माध्यम से जाहरवीर जी का स्मरण कर उनकी कृपा, संरक्षण और सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। आरती में उनके दिव्य स्वरूप, वीरता, लोक-आस्था और भक्तों के प्रति कृपा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। इस लेख में जाहरवीर आरती के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी में तथा Goga Jaharveer Ki Aarti English Transliteration के साथ प्रस्तुत किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सरलता से इसका पाठ और गायन कर सकें।
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जय -जय जाहरवीर हरे
जय -जय गोगावीर हरे
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धरती पर आकर के
भक्तों के कष्ट हरे ||जय जय||
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जो कोई भक्ति करे प्रेम से
निसादिन करे प्रेम से
भागे दुःख परे
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विघ्न हरन मंगल के दाता
जन -जन का कष्ट हरे
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जेवर राव के पुत्र कहाए
रानी बाछल माता
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बागड़ में जन्म लिया गुगा ने
सब जय -जयकार करे ||जय जय||
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धर्म कि बेल बढाई निशदिन
तपस्या रोज करे
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दुष्ट जनों को दण्ड दिया
जग में रहे आप खरे ||जय -जय||
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सत्य अहिंसा का व्रत धारा
झूठ से सदा डरे
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वचन भंग को बुरा समझ कर
घर से आप निकरे || जय-जय ||
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माडी में करी तपस्या
अचरज सभी करे
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चारों दिशाओं से भगत आ रहे
जोड़े हाथ खड़े || जय-जय ||
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अजर अमर है नाम तुम्हारा
हे प्रसिद्ध जगत उजियारा
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भूत पिशाच निकट नहीं आवे
जो कोई जाहर नाम गावे || जय जय ||
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सच्चे मन से जो ध्यान लगावे
सुख सम्पति घर आवे
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नाम तुम्हारा जो कोई गावे
जन्म जन्म के दुःख बिसरावे || जय-जय ||
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भादो कृष्ण नोमी के दिन जो पूजे
वह विघ्नों से नहीं डरे
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जय-जय जाहर वीर हरे
जय श्री गोगा वीर हरे
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जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती
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Jai -Jai Jaharveer Hare
Jai -Jai Gogaveer Hare
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Dharti par aakar ke
Bhakton ke kasht hare ||Jai Jai||
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Jo koi bhakti kare prem se
Nisadin kare prem se
Bhaage dukh pare
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Vighn haran mangal ke data
Jan -jan ka kasht hare
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Jewar Rao ke putra kahaaye
Rani Bachhal mata
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Bagad mein janm liya Guga ne
Sab jai -jaikaar kare ||Jai Jai||
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Dharm ki bel badhaai nishdin
Tapasya roj kare
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Dusht janon ko dand diya
Jag mein rahe aap khare ||Jai -Jai||
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Satya ahinsa ka vrat dhara
Jhooth se sada dare
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Vachan bhang ko bura samajh kar
Ghar se aap nikre || Jai-Jai ||
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Madi mein kari tapasya
Acharaj sabhi kare
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Charon dishaon se bhagat aa rahe
Jode haath khade || Jai-Jai ||
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Ajar amar hai naam tumhara
He prasiddh jagat ujiyaara
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Bhoot pishaach nikat nahin aave
Jo koi Jahar naam gaave || Jai Jai ||
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Sachche man se jo dhyan lagave
Sukh sampati ghar aave
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Naam tumhara jo koi gaave
Janm janm ke dukh bisraave || Jai-Jai ||
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Bhado Krishn Nomi ke din jo pooje
Vah vighnon se nahin dare
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Jai-Jai Jahar Veer Hare
Jai Shri Goga Veer Hare
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