सोमवार, 16 मार्च 2026

श्री बालाजी चालीसा - संपूर्ण संग्रह | Shri Balaji Chalisa | Shri Balaji Chalisa with Lyrics _ मेहंदीपुर बालाजी की चालीसा _

॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय,
के धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखे,
दास स्नेही कल्याण॥
विश्व विदित वर दानी,
संकट हरण हनुमान।
मैंहदीपुर में प्रगट भये,
बालाजी भगवान॥
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॥ चौपाई ॥
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जय हनुमान बालाजी देवा।
प्रगट भये यहां तीनों देवा॥
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प्रेतराज भैरव बलवाना।
कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥
*
मैंहदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का उद्धार किया है॥
*
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर।
संकट वाले आते जहाँ पर॥
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डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं।
मशान चुड़ैल भूत भूतनीं॥
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जाके भय ते सब भाग जाते।
स्याने भोपे यहाँ घबराते॥
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चौकी बन्धन सब कट जाते।
दूत मिले आनन्द मनाते॥
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सच्चा है दरबार तिहारा।
शरण पड़े सुख पावे भारा॥
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रूप तेज बल अतुलित धामा।
सन्मुख जिनके सिय रामा॥
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कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।
सबकी होवत पूर्ण आशा॥
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महन्त गणेशपुरी गुणीले।
भये सुसेवक राम रंगीले॥
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अद्भुत कला दिखाई कैसी।
कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥
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ऊँची ध्वजा पताका नभ में।
स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥
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धर्म सत्य का डंका बाजे।
सियाराम जय शंकर राजे॥
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आन फिराया मुगदर घोटा।
भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥
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राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा।
बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥
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जय हनुमन्त हठीले देवा।
पुरी परिवार करत हैं सेवा॥
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लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।
अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥
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दया करे सब विधि बालाजी।
संकट हरण प्रगटे बालाजी॥
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जय बाबा की जन जन ऊचारे।
कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥
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बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।
तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥
*
देवन विनती की अति भारी।
छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥
*
लांघि उदधि सिया सुधि लाये।
लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥
*
रामानुज प्राण दिवाकर।
शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥
*
केशरी नन्दन दुख भव भंजन।
रामानन्द सदा सुख सन्दन॥
*
सिया राम के प्राण पियारे।
जब बाबा की भक्त ऊचारे॥
*
संकट दुख भंजन भगवाना।
दया करहु हे कृपा निधाना॥
*
सुमर बाल रूप कल्याणा।
करे मनोरथ पूर्ण कामा॥
*
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।
भक्त जन आवे बहु भारी॥
*
मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना।
भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥
*
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे।
रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥
*
अर्जी का आदेश मिलते ही।
भैरव भूत पकड़ते तबही॥
*
कोतवाल कप्तान कृपाणी।
प्रेतराज संकट कल्याणी॥
*
चौकी बन्धन कटते भाई।
जो जन करते हैं सेवकाई॥
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रामदास बाल भगवन्ता।
मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥
*
जो जन बालाजी में आते।
जन्म जन्म के पाप नशाते॥
*
जल पावन लेकर घर जाते।
निर्मल हो आनन्द मनाते॥
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क्रूर कठिन संकट भग जावे।
सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥
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जो सत पाठ करे चालीसा।
तापर प्रसन्न होय बागीसा॥
*
कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे।
सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥
*
॥ दोहा ॥
*
मन्द बुद्धि मम जानके,
क्षमा करो गुणखान।
संकट मोचन क्षमहु मम,
दास स्नेही कल्याण॥
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