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जय जगदीश हरे आरती — अर्थ, इतिहास, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Aarti Lyrics in Hindi and English

* “जय जगदीश हरे” आरती हिंदू भक्ति परंपरा की अत्यंत प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु / जगदीश को समर्पित है और प्रायः प्रातः और संध्या समय पूजा आयोजन में पाठ की जाती है। आरती के मूल भाव है — प्रभु की स्तुति, आश्रय प्रार्थना, भक्त की अनुग्रह याचना। यह आरती ईश्वर को अनादि, अनंत, अविनाशी, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी मानते हुए स्तुति करती है। भक्त स्वयम् को पापी, कलुषित एवं छोटा मानता है और ईश्वर से दया, आश्रय एवं मोक्ष की याचना करता है। यह आरती हमारे देश में सबसे अधिक गायी जाने वाली आरतियों में गिनी जाती है। मंदिरों, घरों, भजन मंडली और धार्मिक आयोजनों में इसे संध्या और आरती समय नियमित रूप से गाया जाता है। इसके भाव एवं सरलता से यह आम भक्तों तक भी पहुँची। यह भजन गीतप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्‍तक भजन संग्रह (पॉंचवाँ भाग) पत्र पुष्‍प से लिया गया है। इस हेतु हम पुस्‍तक के सम्‍पादक, प्रकाशक एवं लेखक के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हैं।  * जय जगदीश हरे  प्रभु ! जय जगदीश हरे !  मायातीत, महेश्वर,  मन-वच-बुद्धि परे ॥ जय * आदि, अनादि, अगोचर,  अविचल, अवि...

⚔️👁️ पौराणिक कथा – कौन था अन्धकासुर? | भगवान शिव और अन्धकासुर का युद्ध 🕉️🔥

कौन था अन्धकासुर | पौराणिक कथा प्रसंग ** दिति का एक महाबलशाली पुत्र अन्धक था । नेत्र रहते हुए भी वह मदान्ध होने के कारण अन्धों की तरह चलता था। इसी से उसका नाम अन्धक पड़ गया था । उसके आडि तथा वक दो पुत्र थे । * तपस्या के प्रभाव के कारण अन्धक देवताओं के लिए अबध्य हो गया था। एक बार जब अवन्ती के कालवन में महादेव पार्वती के साथ क्रीड़ा कर रहे थे, तब अन्धकासुर उन्मत्त-सा वहाँ पहुंचा और मॉं पार्वती का हरण करने की कोशिश करने लगा। तब क्रुद्ध हुए रुद्र तथा अन्धक में भीषण युद्ध हुआ और शङ्कर के पाशुपतास्त्र से घायल होने पर उसके रक्त से अनेक अन्धक उत्पन्न हो गए। रुद्र ने उन अन्धकों को बाणों से आहत कर दिया। किन्तु उन अन्धकों के रुधिर से पुनः सहस्रों अन्धक पैदा हो गये । उत्पन्न होते ही उन अन्धकों ने सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त कर लिया। तब उन मायावी अन्धकों के नाश के लिए रुद्र ने 197 मातृकाएँ उत्पन्न कीं, जिनमें माहेश्वरी, कौमारी, मालिनी, सौपर्णी, वायव्या आदि प्रमुख थीं । मातृकाओं ने उन अन्धकों का रुधिर पान करना प्रारम्भ किया; किन्तु वे पुनः बढ़ने लगे । तब खिन्न होकर शिव विष्णु की शरण में गए। तब उन्होंने...

जाहरवीर आरती | Goga Jaharveer ki Aarti | जाहर बीर गोगा जी की आरती

*** जय -जय जाहरवीर हरे जय -जय गोगावीर हरे *  धरती पर आकर के  भक्तों के कष्ट हरे ||जय जय|| * जो कोई भक्ति करे प्रेम से  निसादिन करे प्रेम से  भागे दुःख परे * विघ्न हरन  मंगल के दाता जन -जन का कष्ट हरे * जेवर राव के पुत्र कहाए रानी बाछल माता  * बागड़ में जन्म लिया गुगा ने  सब जय -जयकार करे ||जय जय|| * धर्म कि बेल बढाई निशदिन  तपस्या रोज करे * दुष्ट जनों को दण्ड दिया जग में रहे आप खरे ||जय -जय|| * सत्य अहिंसा का व्रत धारा  झूठ से सदा डरे * वचन भंग को बुरा समझ कर घर से आप निकरे || जय-जय || * माडी में करी तपस्या  अचरज सभी करे * चारों दिशाओं  से भगत आ रहे  जोड़े हाथ खड़े || जय-जय ||  * अजर अमर है नाम तुम्हारा  हे प्रसिद्ध जगत उजियारा * भूत  पिशाच निकट नहीं आवे  जो कोई जाहर  नाम गावे || जय जय || * सच्चे मन से जो ध्यान लगावे  सुख सम्पति घर आवे  * नाम तुम्हारा जो कोई गावे  जन्म जन्म के दुःख बिसरावे || जय-जय || * भादो कृष्‍ण नोमी के दिन जो पूजे  वह विघ्नों से नहीं डरे  * जय-जय जाहर वीर हरे...

महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा : शिकारी चित्रभानु और शिवलिंग पूजन की अद्भुत गाथा

महाशिवरात्रि व्रत की प्रामाणिक और पौराणिक कथा ** ** पूर्व काल में चित्रभानु नामक एक शिकारी था। जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था। वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी। ** शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला। लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया। जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी। वह वन एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा। * बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला। पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती च...

Kanya Sankranti 2025: कन्या संक्रांति व्रत कथा, पूजा विधि, दान का महत्व और लाभ

Kanya Sankranti: कन्या संक्रांति के दिन इस कथा का करें पाठ, सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा! ** ** कन्‍या संक्रांति का परिचय (Kanya Sankranti Kya Hai) ** सनातन धर्म में सूर्य देव का विशेष महत्व है। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन को संक्रांति (Sankranti) कहा जाता है। वर्ष भर में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं और प्रत्येक का अपना आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व है। ** कन्या संक्रांति (Kanya Sankranti) तब होती है जब सूर्य कन्या राशि (Virgo) में प्रवेश करते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद पवित्र और शुभ दिन माना गया है। इस दिन सूर्य देव की उपासना, व्रत, कथा पाठ और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, संतान सुख और परिवार में खुशहाली आती है। ** कन्या संक्रांति पूजा विधि (Kanya Sankranti Ki Pooja Vidhi) ** कन्या संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद निम्नलिखित विधि से पूजा करने का विधान है – 1. स्नान और अर्घ्यदान – तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, गुड़...

श्री झूलेलाल चालीसा हिंदी में | Jhulelal Chalisa Lyrics in Hindi and English

श्री झूलेलाल चालीसा हिंदी में | Jhulelal Chalisa Lyrics in Hindi and English *** *** जलदेवता झूलेलाल जी की स्तुति हेतु चालीसा पाठ के लाभ, महत्व और संपूर्ण पाठ ** झूलेलाल जी को सिंधी समाज और जल के देवता के रूप में पूजा जाता है। इन्हें वरुण देवता का अवतार माना जाता है। जलदेवता झूलेलाल जी की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति प्राप्त होती है। भक्तजन उनकी कृपा के लिए झूलेलाल चालीसा का नियमित पाठ करते हैं। यह चालीसा न केवल भक्ति का अद्भुत माध्यम है बल्कि जीवन के दुखों को दूर करने और इच्छाओं की पूर्ति का भी साधन है। ** झूलेलाल चालीसा का महत्व (Jhulelal Chalisa Ka Mahatva) ** झूलेलाल जी की स्तुति करने से व्यक्ति को आत्मिक शांति और शक्ति मिलती है। जलदेवता झूलेलाल जी की कृपा से जीवन के संकट दूर होते हैं। और यदि जीवन में कोई संकट आ भी जाये तो श्री झूलेलाल जी की कृपा से वे शीघ्र ही दूर हो जाते हैं। परिवार में सुख-समृद्धि और एकता बनी रहती है। भक्त की मनोकामनाएं श्रीझूलेलाल जी अवश्‍य पूर्ण करते हैं। भक्‍तों में सकारात्‍मकता का संचार होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं। म...

श्री झूलेलाल आरती लिरिक्स|| श्री झूलेलाल जी की आरती पाठ: लाभ, महत्व और धार्मिक मान्यताएँ | Jhulelal Ji Aarti Benefits

श्री  झूलेलाल जी की आरती पाठ: लाभ, महत्व और धार्मिक मान्यताएँ | Jhulelal Ji Aarti Benefits ** ** सनातन धर्म का स्वरूप अत्यन्त व्यापक और समावेशी है। इसमें प्रत्येक वर्ग, जाति और समुदाय के लोग अपनी आस्था और भक्ति के साथ जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि सनातन परंपरा में अनगिनत देवी–देवताओं की पूजा और आराधना देखने को मिलती है। प्रत्येक समाज ने अपनी आवश्यकताओं, जीवनशैली और परिस्थितियों के अनुसार किसी न किसी आराध्य देवता को मान्यता दी है। इन्हीं में से एक आराध्य देवता हैं – श्री झूलेलाल जी, जिन्हें विशेष रूप से सिंध समाज का इष्ट देवता माना जाता है। ** सिंधी समाज का इतिहास और संस्कृति प्राचीन काल से ही जल से गहराई से जुड़ा रहा है। सिंधु नदी के किनारे बसा यह समाज अपने जीवनयापन और अस्तित्व के लिए सदैव जल पर निर्भर रहा है। इसी कारण जल और जीवन की रक्षा करने वाले देवता के रूप में महाराज झूलेलाल जी का प्रकट होना और उनका आराध्य बनना, ऐतिहासिक तथा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झूलेलाल जी केवल सिंध समाज के ही नहीं, बल्कि उन सभी भक्तों के रक्षक और पालनकर्ता हैं ज...