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शरद पूर्णिमा व्रत की कथा || पूर्णमासी व्रत कथा || Sharad Purnima Vrat Ki Katha || Purnmaasi Vrat Katha || Lyrics in Hindi

शरद पूर्णिमा व्रत की कथा || पूर्णमासी व्रत कथा || Sharad Purnima Vrat Ki Katha || Purnmaasi Vrat Katha || Lyrics in Hindi आश्विन मास की पूर्णिमा ही शरद पूर्णिमा कहलाती हैं। इसे 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। धर्म शास्त्रों में इस दिन 'कोजागर व्रत' माना गया है। इसी को 'कौमुदी व्रत' भी कहते हैं। ज्योतिष मान्यता के अनुसार संपूर्ण वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा षोडश यानि 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। रासोत्सव का यह दिन वास्तव में भगवान श्री कृष्ण ने जगत की भलाई के लिए निर्धारित किया है, माना जाता है कि इस रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है।  मान्यता है कि घर में सुख-समृद्धि के लिए इस दिन सुहागिन महिलाओं को भोजन कराने के अलावा सूर्यास्त से पहले कुछ भेंट भी देनी चाहिए। इस दिन सूर्यास्त के बाद बालों में कंघी करना या अग्नि पर तवा चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता के अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण को 'कार्तिक स्नान' करते समय स्वयं (कृष्ण) को पति के रूप में प्राप्त करने की कामना से देवी पूजन करने वाली कुमारियों को दिए वरदान की याद आई थी और उन्होंने मुरलीव...

श्री दुर्गाष्टकम् || Shri Durga Astakam || कात्यायनि महामाये || Katyayani MahaMaye || Shri Durga Mata Stuti || Lyrics in Hindi and Samskrit

श्री दुर्गाष्टकम् || Shri Durga Astakam || कात्यायनि महामाये || Katyayani MahaMaye || Shri Durga Mata Stuti || Lyrics in Hindi and Samskrit  कात्यायनि महामाये खड्गबाणधनुर्धरे ।  खड्गधारिणि चण्डि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।१।। वसुदेवसुते कालि वासुदेवसहोदरी । वसुन्धराश्रिये नन्दे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।२।। योगनिद्रे महानिद्रे योगमाये महेश्वरी । योगसिद्धिकरी शुद्धे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।३।।  शङ्खचक्रगदापाणे शार्ङ्गज्यायतबाहवे ।  पीताम्बरधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।४।। ऋग्यजुस्सामाथर्वाणश्चतुस्सामन्तलोकिनी ।  ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मि दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।५।। वृष्णीनां कुलसम्भूते विष्णुनाथसहोदरी ।  वृष्णिरूपधरे धन्ये दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।६।। सर्वज्ञे सर्वगे शर्वे सर्वेशे सर्वसाक्षिणी ।  सर्वामृतजटाभारे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।७।। अष्टबाहु महासत्त्वे अष्टमी नवमी प्रिये ।  अट्टहासप्रिये भद्रे दुर्गादेवि नमोऽस्तु ते ।।८।। दुर्गाष्टकमिदं पुण्यं भक्तितो यः पठेन्नरः ।  सर्वकाममवाप्नोति दुर्गालोकं स गच्छति ।।९।। इति श्री दुर्गाष्टकम् ।...

सर्वदेव पूजा || Sarvadev Puja || Sarva Dev Puja Padhati || Shri Satyanarayan Sarva Dev Puja Vidhi || Lyrics in Hindi

 सर्वदेव पूजा || Sarvadev Puja || Sarva Dev Puja Padhati || Shri Satyanarayan Sarva Dev Puja Vidhi || Lyrics in Hindi  श्री गणेश जय गणनायक सिद्धि विनायक  मंगलदायक मोक्ष प्रदाता।  हो तुम ही सबके शुभदायक  कष्ट हरो हे भाग्य विधाता ।।  ऋद्धि औ सिद्धि के स्वामी तुम ही हो  पिता शुभ-लाभ के भवदाता।  छोड़ के गोदि माँ गौरी की आओ  तुम्हे आज भक्त तुम्हारा बुलाता।। वन्दहु शम्भु भवानी के नन्दन,  आनन्द कन्द निकन्द पति जै। दीनन दायक ऋद्धि वा सिद्धि के,  हे गणनायक मो पे पसीजै।।  बुद्धि के दाता गजानन आनन,  मोरी कुबुद्धि सुबुद्धि करीजै। मूषक वाहन छाड़ि विनायक,  पूजा में आयके आसन कीजै ।। जय गणनायक सिद्धि विनायक,  मंगल दायक मोक्ष प्रदाता। हो तुमही सबके शुभदायक,  कष्ट हरो हे भाग्यविधाता।।  ऋद्धि औ सिद्धि के स्वामी तुम्ही हो,  पिता शुभलाभ के हे भवदाता।  छोड़ के गोदी माँ गौरी की आओ,  तुम्हे आज भक्त तुम्हारा बुलाता। चतुःषष्ठि योगिनी ज्ञान की दायिनी बुद्धि प्रदायिनी,  दूर करो मन का अंधियारा। मूढ़ हूँ मैं असहाय...

भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || निर्जला एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha || Nirjala Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi PDF

भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || निर्जला एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha || Nirjala Ekadashi Vrat Katha Lyrics in Hindi PDF भीमसेनी एकादशी व्रत कथा || Bhimseni Ekadashi Vrat Katha  निर्जला एकादशी व्रत का महत्व एकादशी पूजा सामग्री बहुत समय पहले की बात है। एक बार भीमसेन व्यासजी से कहने लगे कि हे पितामह! भ्राता युधिष्ठिर, माता कुन्‍ती, द्रोपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सब एकादशी का व्रत करने को कहते हैं, परंतु महाराज मैं उनसे कहता हूँ कि भाई मैं भगवान की शक्ति पूजा आदि तो कर सकता हूँ, दान भी दे सकता हूँ परन्‍तु भोजन के बिना नहीं रह सकता। इस पर व्यासजी कहने लगे कि हे भीमसेन! यदि तुम नरक को बुरा और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रत्‍येक मास की दोनों एकादशियों को अन्न मत खाया करो। भीम कहने लगे कि हे पितामह! मैं तो पहले ही कह चुका हूँ कि मैं भूख सहन नहीं कर सकता। यदि वर्ष भर में कोई एक ही व्रत हो तो वह मैं रख सकता हूँ, क्योंकि मेरे पेट में वृक नाम वाली अग्नि है सो मैं भोजन किए बिना नहीं रह सकता। भोजन करने से वह शान्‍त रहती है, इसलिए पूरा उपवास तो क्या एक समय भी बिना भोजन किए रहन...

श्री तुलसी चालीसा || वृक्ष रूपिणी पावनी || नमो नमो तुलसी गुणकारी || Shri Tulsi Chalisa || Namo Namo Tulsi Gunkari Lyrics in Hindi

श्री तुलसी चालीसा || वृक्ष रूपिणी पावनी || नमो नमो तुलसी गुणकारी || Shri Tulsi Chalisa || Namo Namo Tulsi Gunkari Lyrics in Hindi  वृक्ष रूपिणी पावनी  तुलसी है तव नाम।  विश्‍वपूजिता कृष्‍ण जीवनी  वृंन्‍दा तुम्‍हें प्रणाम ।। नमो नमो तुलसी गुणकारी  तुम त्रिलोक में शुभ हितकारी।  वन उपवन में शोभा तुम्‍हारी  वृक्ष रूप में हो अवतारी।।  देवी देवता अरु नर नारी गावत महिता मात तुम्‍हारी।  जहॉं चरण हो तुम्‍हरे माता  स्‍थान वही पावन हो जाता।।  गोपी तुम्‍हीं गौ लोक निवासी  तुलसी नाम कृष्‍ण की दासी।  अंश रूप थी तुम भगवन की प्राण प्रिये जैसी मोहन की।।  मुरलीधर संग तुमको पाया क्रोध राधे को तुम पर आया। कहा राधा ने श्राप है मेरा मनुज योनि में जन्‍म हो तेरा।।  हरि बोले तुलसी तुम जाओ भरत खंड जा ध्‍यान लगाओ। ब्रह्मा के वरदान फलेंगे नारायण पति रूप मिलेंगे।। राजा धर्मध्‍वज माधवी रानी  जन्‍मी बनकर सुता सयानी।  उपमा कोई काम न आई तब से तुम तुलसी कहलाई।। बद्रिका आश्रम का पथ लीन्‍हा  उत्‍तम तप वहॉं जाकर कीन्‍हा।  फलदाई द...

श्री गुरु चालीसा || ॐ नमो गुरुदेव दयाला || Om Namo Gurudev Dayala || Shri Gurudev Chalisa Lyrics in Hindi || Guru Dev Chalisa || Guru Purnima Chalisa

श्री गुरु चालीसा ||ॐ नमो गुरुदेव दयाला || Om Namo Gurudev Dayala || Shri Gurudev Chalisa Lyrics in Hindi || Guru Dev Chalisa || Guru Purnima Chalisa ।। दोहा ।। ॐ नमो गुरुदेवजी, सबके सरजन हार। व्यापक अंतर बाहर में, पार ब्रह्म करतार।। देवन के भी देव हो, सिमरुं मैं बारम्बार। आपकी किरपा बिना, होवे न भव से पार।। ऋषि-मुनि सब संत जन, जपें तुम्हारा जाप। आत्मज्ञान घट पाय के, निर्भय हो गये आप।। गुरु चालीसा जो पढ़े, उर गुरु ध्यान लगाय। जन्म-मरण भव दुःख मिटे, काल कबहुँ नहिं खाय।। गुरु चालीसा पढ़े-सुने, रिद्धि-सिद्धि सुख पाय। मन वांछित कारज सरें, जन्म सफल हो जाय।। ।। चौपाई ।।   ॐ नमो गुरुदेव दयाला,  भक्तजनों के हो प्रतिपाला।  पर उपकार धरो अवतारा,  डूबत जग में हंस उबारा।।  तेरा दरश करें बड़भागी,  जिनकी लगन हरि से लागी।  नाम जहाज तेरा सुखदाई,  धारे जीव पार हो जाई।।  पारब्रह्म गुरु हैं अविनाशी,  शुद्ध स्वरूप सदा सुखराशी।  गुरु समान दाता कोई नाहीं,  राजा प्रजा सब आस लगायी।।  गुरु सन्मुख जब जीव हो जावे,  कोटि कल्प के पाप नसावे।  ज...

श्री गंगा चालीसा || जय जग जननी हरण अघखानी || Shri Ganga Chalisa || Jay Jag Janani Haran Aghkhani || Lyrics in Hindi

श्री गंगा चालीसा || जय जग जननी हरण अघखानी || Shri Ganga Chalisa || Jay Jag Janani Haran Aghkhani || Lyrics in Hindi ।। दोहा ।।  जय जय जय जग पावनी,  जयति देवसरि गंग।  जय शिव जटा निवासिनी  अनुपम तुंग तरंग।। ।। चौपाई ।। जय जग जननी हरण अघखानी।  आनंद करनि गंग महारानी।।  जय भगीरथी सुरसरि माता।  कलिमल मूल दलिनि विख्याता।।  जय जय जय हनु सुता अघ हननी।  भीष्म की माता जय जय जननी।।  धवल कमल दल सम तनु सजे।  लखी शत शरद चंद्र छवि लाजै।।  वाहन मकर विमल शुचि सोहें।  अमिया कलश कर लखी मन मोहें।।  जाड़त रत्ना कंचन आभूषण।  हिया मणि हार हरणि तम दूषण।।  जग पावनी त्रय ताप नासवनी।  तरल तरंग तंग मन भावनी।।  जो गणपति अति पूज्य प्रधाना।  तिहूं ते प्रथम गंग अस्नाना।।  ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी।  श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवी।।  साथी सहस्त्र सगर सुत तारयो।  गंगा सागर तीरथ धारयो।।  अगम तरंग उठ्यो मन भावन।  लखि तीरथ हरिद्वार सुहावन।।  तीरथ राज प्रयाग अक्षयवट।  धरयो मातु पुनि काशी करवट।।...