ॐ जय सूर्य भगवान आरती के सम्पूर्ण बोल पढ़ें और गुनगुनाएं। यह पावन आरती भगवान सूर्यदेव को समर्पित है, जो जगत के प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के आधार हैं। इस पोस्ट में आपको आरती के लिरिक्स, अर्थ और पूजा का महत्व मिलेगा। प्रतिदिन या रविवार के दिन सूर्य भगवान की आरती करने से रोग, अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है तथा सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। ** ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।। * सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।। अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। * ॐ जय सूर्य भगवान।। * ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।। फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। * ॐ जय सूर्य भगवान।। * संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।। गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।। * ॐ जय सूर्य भगवान।। * देव दनुज...
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