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करवा चौथ व्रत कथा (कहानी) //Karva Chauth Vrat Katha Book & Pooja Vidhi// Lyrics in Hindi PDF // Lyrics in English

करवा चौथ व्रत कथा (कहानी) //Karva Chauth Vrat Katha Book & Pooja Vidhi// Lyrics in Hindi PDF // Lyrics in English हिन्दू धर्म की मान्‍यता के अनुसार कार्तिक महीने में पूर्णिमा के चौथे दिन करवा चौथ वाला त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएँ अपने पति की लम्‍बी आयु की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन शाम को करवा चौथ कथा पढ़ / सुन कर चंद्रमा निकलने के बाद वे चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पति का तिलक आदि करने के बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन भगवान शिव, गणेश जी और स्कन्द यानि कार्तिकेय के साथ बनी गौरी के चित्र की सभी उपचारों के साथ पूजा की जाती है। कहते हैं कि इस व्रत को करने से जीवन में पति का साथ हमेशा बना रहता है। साथ ही, सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन में सुख-शान्ति बनी रहती है। क्या है करवा चौथ की सरगी? What is Sargi in Karwa Chauth सरगी के माध्‍यम से सास अपनी बहू को सुहाग का आशीर्वाद देती है। सरगी की थाल में 16 श्रृंगार की सभी समाग्री, मेवा, फल, मिष्ठान आदि होते हैं। सरगी में रखे गए व्यंजनों को ग्रहण करके ही इस व्रत का आरंभ किया जाता है। सा...

अम्बे तू है जगदम्बे काली //Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics in Hindi and English // Navratri Special Aarti

अम्बे तू है जगदम्बे काली |Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Lyrics in Hindi | Navratri Special Aarti अम्बे तू है जगदम्बे काली जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे ही गुण गायें भारती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ***** तेरे भक्त जनों पे माता  भीड़ पड़ी है भारी मैया भीड़ पड़ी है भारी दानव दल पर टूट पड़ो माँ  करके सिंह सवारी  मॉं करके सिंह सवारी सौ-सौ सिहों से भी बलशाली अष्टभुजाओं वाली दुश्टों को तू ही घन तारती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ***** माँ-बेटे का है इस जग में  बड़ा ही निर्मल नाता मैया बड़ा ही निर्मल नाता पूत-कपूत सुने हैं पर ना  माता सुनी कुमाता माता सुनी कुमाता सब पे करुणा करने वाली अमृत बरसाने वाली दुखियों के दुखड़े निवारती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ***** नहीं मांगते धन और दौलत  ना चांदी ना सोना ना चांदी ना सोना हम तो मांगे माँ तेरे चरणों में  एक छोटा सा कोना मैया एक छोटा सा कोना सबकी बिगड़ी बनाने वाली लाज बचाने वाली सतियों के सत को संवारती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ***** चरण शरण में खड़े तुम्हारी,  ले पूजा की थाली मैया ले पूजा की थ...

श्री ग्‍वेल अष्‍टक \\ Shri Gwel Ashtak Lyrics in Hindi \\ जन्‍म समय मॉं की सौतन ने \\ Janm Samay Maa ki Sautan ne

जन्‍म समय मॉं की सौतन ने | Janm Samay Maa ki Sautan ne | Shri Golu Ashtak |  श्री ग्‍वेल अष्‍टक | Shri Gwail Ashtak Lyrics in Hindi   जन्‍म समय मॉं की सौतन ने  हे ग्‍वेल दियो तुमको दुख भारी  ***** काली के पास में प्रस्‍तर डारिके डारो तुम्‍हें जहॉं थी बहु झारी  ***** बाल न बॉंका हुआ गोरिया तेरो पा करके यह वेदना सारी  ***** मौसानी क्‍या कर लेती उसे जाके नाम से संकट जात है टारी  नाम से संकट जात हैं टारी  ***** मौसेरी मॉंओं ने जीवित जानके मारन की तोहि बात बिचारी  ***** रात समय उस बालक को धरी आए नदी मह वे अत्‍याचारी  ***** होके प्रसन्‍न नदी जल में उस बालक ने वह रात गुजारी  ***** मौसानी क्‍या कर लेती उसे जाके नाम से संकट जात है टारी  नाम से संकट जात हैं टारी  ***** स्‍वप्‍न दियो भाना धेवर को  समझाई कथा उसको यह सारी  ***** स्‍वप्‍न के बीच लखी उसने  वह देव स्‍वरूप महाछवि न्‍यारी  ***** टूटत स्‍वप्‍न विचारिकैं बात कैं शोक भयो मन में अति भारी  ***** मौसानी क्‍या कर लेती उसे जाके नाम से संकट जात है टारी ...

ललही छठ (हलछठ) की पौराणिक व्रत कथा || Lalahi Chhath (Hal Chhath) ki Pauranik Katha Lyrics in Hindi

ललही छठ (हलछठ) की पौराणिक व्रत कथा || Lalahi Chhath (Hal Chhath) ki Pauranik Katha Lyrics in Hindi || Lyrics in English हलछठ की कथा, पूजा विधि ललही छठ कब मनाया जाता है Lalahi Chhath Kab Manate Hain-  भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को ललही छठ व्रत का त्योहार मनाया जाता है।  ललही छठ को और किन नामों से जाना जाता है Lalahi Ke Aur Kya Naam Hain -  इसे हलछठ, हरछठ, पीन्नी छठ, खमर छठ, राधन छठ, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ आदि नामों से जाना जाता है|  ललही छठ में किस देवी की पूजा की जाती है Lalahi Chhath me Kis Devi Ke Puja Hoti Hai -  इस दिन षष्ठी माता की पूजा की जाती है। जन्माष्टमी से से ठीक दो दिन  पहले मनाए जाने वाले  हलछठ  के पर्व  को श्री कृष्ण भगवान के बड़े भ्राता बलराम  की जयंती के रूप में भी जाना जाता है। बलराम जिन्हें बलदेव, बलभद्र और बलदाऊ के नाम से भी जाना जाता है  वास्तव में शेषनाग  के अवतार थे। बलराम को हल और मूसल से खास प्रेम था। यही उनके प्रमुख अस्त्र भी थे। इसलिए ललही छठ के दिन किसान हल, मूसल और बैल की पूजा क...

श्री गोलू देव की आरती || Shri Golu Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi \\जय गोलज्यू महाराज \\ Jay Goljyu Maharaj

श्री गोलू देव की आरती || Shri Golu Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi || Lyrics in English जय गोलज्यू महाराज, जय हो जय गोलज्यू महाराज ..! जय गोल ज्यू महाराज, जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! ज्योत जगुनों तेरी… सुफल करिए काज….! जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! जय गोल ज्यू महाराज, जय हो जय गोल ज्यू महाराज .. ज्योति जगुनों तेरी… सुफल करिए काज….! जय गोल ज्यू महाराज !! पाड़ी में बगन तू आछे , लुवे को पिटार में नादान, (देवा लुवे को पीटार में नादान) गोरी घाट भाना पायो.. पड़ी गयो गोरिया नाम..! जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! जय हो जय गोल ज्यू महाराज .. जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! ज्योति जलूनों तेरी… सुफल करिए काज….! जय गोल ज्यू महाराज !! हरुआ, कलुवा भाई तेरो, बड़ छेना जो दीवान..! माता कालिंका तेरी… बाबू झालो राज…! जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! जय हो जय गोल ज्यू महाराज जय हो जय गोल ज्यू महाराज ज्योति जलूनों तेरी… सुफल करिए काज….! जय गोल ज्यू महाराज !! सुखिले लुकड़ टांक तेरो कांठ का घोड़ में सवार ! (देवा काठ को घोड़ में सवार ) लुवे की लगाम हाथयू में.. चाबुक छू हथियार…!! जय हो जय गोल ज्यू महाराज ..!! जय हो जय ...

श्री गोलू देव चालीसा || Shri Golu Dev Chalisa Lyrics in Hindi || Lyrics in English

श्री गोलू देव चालीसा || Shri Golu Dev Chalisa Lyrics in Hindi || Lyrics in English ॥ दोहा ॥   बुद्धिहीन हूँ नाथ मैं , करो बुद्धि का दान। सत्य न्याय के धाम तुम , हे गोलू भगवान।।   जय काली के वीर सुत , हे गोलू भगवान। सुमिरन करने मात्र से , कटते कष्ट महान।।   जप कर तेरे नाम को , खुले सुखों के द्वार। जय जय न्याय गौरिया नमन करे स्वीकार।।   ।। चौपाई ।।   जय जय ग्वेल महाबलवाना। हम पर कृपा करो भगवाना।।   न्याय सत्य के तुम अवतारा। दुखियों का दुख हरते सारा ।।   द्वार पे आके जो भी पुकारे। मिट जाते पल में दुख सारे।।   तुम जैसा नहीं कोई दूजा । पुनित होके भी बिन सेवा पूजा ।।   शरण में आये नाथ तिहारी। रक्षा करना हे अवतारी ।।   माँ की सौत थी अत्याचारी । तुमको कष्ट दिये अतिभारी ।।   झाड़ी में तुमको गिरवाया। विविध भांतिथा तुम्हे सताया ।।   नदी मध्य जल में डुबवाया। फिर भी मार तुम्हें नहीं पाया ।।   सरल हृदय था धेवरहे का। हरिपद रति बहुनिगुनविवेका।।   भाना नाम...