Katha Prasang 001 || कथा प्रसंग 001 || जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे || Jo karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire
Katha Prasang 001 || कथा प्रसंग 001 || जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे || Jo karte Rahoge Bhajan Dhire Dhire एक बार की बात है। देवर्षि नारद जी भगवान श्रीहरि विष्णु जी से मिलने जा रहे थे। तभी उन्होंने मार्ग में देखा कि एक तपस्वी एक नीम के पेड के नीचे बैठ कर घोर तपस्या कर रहे हैं। नारद जी को विचार आया कि जाकर इनसे मिलना चाहिए। नारद जी तपस्वी के पास गये और बताया कि वे श्रीहरि विष्णुजी से मिलने जा रहे हैं। नारद जी ने यह भी कहा कि अगर आप कोई सन्देश प्रभु श्रीहरि विष्णु जी तक पहुँचाना चाहतें हों तो मैं उसे उन तक पहुँचा सकता हूँ। इस पर उन तपस्वी ने कहा कि आपकी अत्यन्त कृपा आज मुझ पर हुई है। आप केवल मेरे एक प्रश्न का उत्तर श्रीहरि विष्णु जी से पूछ कर आइयेगा। नारद जी ने कहा पूँछिये आपका प्रश्न क्या है। तपस्वी ने कहा कि आप उनसे केवल इतना पूँछ कर आइयेगा कि मुझे वे दर्शन कब देंगे। नारद जी नारायण नारायण जपते हुए श्री हरि विष्णु जी के श्रीधाम में पहुँचे और उनकी स्तुति करके सारा वृतान्त कह सुनाया। नारद जी ने तपस्वी के प्रश्न का उत्तर जानने की जिज्ञासा प्रकट की। इस ...