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ओउम जय श्री श्याम हरे प्रभु जय श्री श्याम हरे | आरती श्री खाटू श्याम जी की | Shri Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi

ओउम जय श्री श्याम हरे प्रभु जय श्री श्याम हरे | आरती श्री खाटू श्याम जी की | Shri Khatu Shyam Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi ** ओउम जय श्री श्याम हरे  प्रभु जय श्री श्याम हरे निज भक्तन के तुमने  पूरण काम करे ओउम जय श्री श्याम हरे  ** गल पुष्पों की माला  सिर पर मुकुट धरे पीत बसन पीताम्बर  कुण्डल कर्ण पड़े ओउम जय श्रीश्याम हरे ** रत्नसिंहासन राजत  सेवक भक्त खड़े खेवत धूप अग्नि पर  दीपक ज्योति जरे ओउम जय श्रीश्याम हरे ** मोदक खीर चूरमा  सुवर्ण थाल भरे सेवक भोग लगावत  सिर पर चंवर ढुरे ओउम जय श्रीश्याम हरे ** झांझ नगारा और घडि़यावल  शंख मृदंग घुरे भक्त आरती गावें  जय जयकार करें ओउम जय श्रीश्याम हरे ** जो ध्यावे फल पावे  सब दुख से उबरे सेवक जब निज मुख से  श्री श्याम श्याम उचरे ओउम जय श्रीश्याम हरे ** श्री श्याम बिहारी जी की आरती  जो कोई नर गावे गावत दासमनोहर  मन वांछित फल पावे ओउम जय श्री श्याम हरे  प्रभु जय श्री श्याम हरे ***** ओउम जय श्री श्याम हरे प्रभु जय श्री श्याम हरे | आरती श्री खाटू श्याम जी की | Shri Khatu S...

श्री खाटू श्याम चालीसा || Shri Khatu Shyam Ji Chalisa ||

श्री खाटू श्याम चालीसा || Shri Khatu Shyam Ji Chalisa || ** दोहा ** श्री गुरु चरण ध्यान धर  सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भजत हूँ  रच चैपाई छन्द।। ** चौपाई ** श्याम श्याम भजि बारम्बारा  सहज ही हो भवसागर पारा। इन सम देव न दूजा कोई  दीन दयालु न दाता होई। ** भीमसुपुत्र अहिलवती जाया  कहीं भीम का पौत्र कहाया। यह सब कथा सही कल्पान्तर  तनिक न मानों इनमें अन्तर। ** बर्बरीक विष्णु अवतारा  भक्तन हेतु मनुज तनु धारा। वसुदेव देवकी प्यारे  यशुमति मैया नन्द दुलारे। ** मधुसूदन गोपाल मुरारी  बृजकिशोर गोवर्धन धारी। सियाराम श्री हरि गोविन्दा  दीनपाल श्री बाल मुकुन्दा। ** दामोदर रणछोड़ बिहारी  नाथ द्वारिकाधीश खरारी। नरहरि रूप प्रहलद प्यारा  खम्भ फारि हिरनाकुश मारा। ** राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता  गोपी बल्लभ कंस हनंता। मनमोहन चितचोर कहाये  माखन चोरि चोरि कर खाये। ** मुरलीधर यदुपति घनश्याम  कृष्ण पतितपावन अभिराम। मायापति लक्ष्मीपति ईसा  पुरुषोत्तम केशव जगदीशा। ** विश्वपति त्रिभुवन उजियारा  दीनबन्धु भक्तन रखवारा। प्रभु का भे...

आरती श्री सरस्वती माँ की || Shri Saraswati Maa Ki Aarti ||

आरती श्री सरस्वती माँ की || Shri Saraswati Maa Ki Aarti || आरती करूं सरस्वती मातु, हमारी हो भव भय हारी हो। हंस वाहन पदमासन तेरा, शुभ्र वस्त्र अनुपम है तेरा।। रावण का मन कैसे फेरा, वर मांगत बन गया सवेरा। यह सब कृपा तिहारी, उपकारी हो मातु हमारी हो।। तमोज्ञान नाशक तुम रवि हो, हम अम्बुजन विकास करती हो। मंगल भवन मातु सरस्वती हो, बहुमूकन वाचाल करती हो। विद्या देने वाली वीणा, धारी हो मातु हमारी। तुम्हारी कृपा गणनायक, लायक विष्णु भये जग के पालक। अम्बा कहायी सृष्टि ही कारण, भये शम्भु संसार ही घालक। बन्दों आदि भवानी जग, सुखकारी हो मातु हमारी। सदबुद्धि विद्याबल मोही दीजै, तुम अज्ञान हटा रख लीजै। जन्मभूमि हित अर्पण कीजै, कर्मवीर भस्महिं कर दीजै।। ऐसी विनय हमारी भवभय हरी, मातु हमरी हो, आरती करूँ सरस्वती मातु।। चित्र theoldgiftshop.com  से साभार 

श्री सरस्वती चालीसा || Shri Saraswati Chalisa ||

श्री सरस्वती चालीसा || Shri Saraswati Chalisa || दोहा जनक जननि पदम दुरज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि। पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। राम सागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु।। चौपाई जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी, जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी। जय जय जय वीणाकर धारी, करती सदा सुहंस सवारी। रूप चतुर्भुजधारी माता, सकल विश्व अन्दर विख्याता। जग में पाप बुद्धि जब होती, तबही धर्म की फीकी ज्योति। तबहि मातु का निज अवतारा, पाप हीन करती महि तारा। बाल्मीकि जी थे हत्यारे, तव प्रसाद जानै संसारा। रामचरित जो रचे बनाई, आदि कवि पदवी को पाई। कालिदास जो भये विख्याता, तेरी कृपा दृष्टि से माता। तुलसी सूर आदि विद्वाना, भे और जो ज्ञानी नाना। तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा, केवल कृपा आपकी अम्बा। करहु कृपा सोई मातु भवानी, दुखित दीन निज दासहि जानी। पुत्र करई अपराध बहूता, तेहि न धरइ चित सुन्दर माता। राखु लाज जननि अब मेरी, विनय करू भाँति बहुतेरी। मैं अनाथ तेरी अवलम्बा, कृपा करउ जय जय जगदम्बा। मधु कैटभ जो अति बलवाना, बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना। समर हजार पांच मे...

ओउम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता | आरती भगवती महालक्ष्मी जी की | Om Jay Laxmi Mata | Shri Mahalaxmi Ji Ki Aarti

ओउम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता | आरती भगवती महालक्ष्मी जी की | Om Jay Laxmi Mata | Shri Mahalaxmi Ji Ki Aarti   ओउम जय लक्ष्मी माता  मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत  हर विष्णु विधाता।। ओउम।। ***** उमा रमा ब्रह्माणी  तुम ही जग-माता। सूर्य चन्द्रमा ध्यावत  नारद ऋषि गाता।। ओउम।। ***** दुर्गा रूप निरंजनि  सुख-सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्याता  ऋद्धि-सिद्धि पाता।। ओउम।। ***** तुम पाताल निवासिनि  तुम ही शुभ दाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि  भव निधि की त्राता।। ओउम।। ***** जिस घर में तुम रहती  सब सद्गुण आता। सब संभव हो जाता  मन नहीं घबराता।। ओउम।। ***** तुम बिन यज्ञ न होवे  वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव  सब तुमसे आता।। ओउम।। ***** शुभगुण मंदिर सुंदर  क्षीरोदधि जाता।। रत्न चतुर्दश तुम बिन  कोई नहीं पाता।। ओउम।। ***** महालक्ष्मी जी की आरति  जो कोई नर गाता। उर आनन्द समाता  पाप उतर जाता।। ओउम।। *****

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा || Shri Vaibhav Laxmi Vrat Katha || शुक्रवार व्रत कथा || Shukravar Vrat Katha

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा || Shri Vaibhav Laxmi Vrat Katha || शुक्रवार व्रत कथा || Shukravar Vrat Katha सुख, शांति, वैभव और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अद्भुत चमत्कारी प्राचीन व्रत वैभव लक्ष्मी व्रत करने का नियम Vaibhav Lakshmi Vrat Karne Ka Niyam 1. यह व्रत सौभाग्यशाली स्त्रियां करें तो उनका अति उत्तम फल मिलता है, पर घर में यदि सौभाग्यशाली स्त्रियां न हों तो कोई भी स्त्री एवं कुमारिका भी यह व्रत कर सकती है। 2. स्त्री के बदले पुरुष भी यह व्रत करें तो उसे भी उत्तम फल अवश्य मिलता है। 3. यह व्रत पूरी श्रद्धा और पवित्र भाव से करना चाहिए। खिन्न होकर या बिना भाव से यह व्रत नहीं करना चाहिए।  4. यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है। व्रत शुरु करते वक्त 11 या 21 शुक्रवार की मन्नत रखनी पड़ती है और बताई गई शास्त्रीय विधि अनुसार ही व्रत करना चाहिए। मन्नत के शुक्रवार पूरे होने पर विधिपूर्वक और बताई गई शास्त्रीय रीति के अनुसार उद्यापन करना चाहिए। यह विधि सरल है। किन्तु शास्त्रीय विधि अनुसार व्रत न करने पर व्रत का जरा भी फल नहीं मिलता है।  5. एक बार व्रत पूरा करने के पश्चात फ...

आरती श्री परशुराम जी की || Aarti Shri Parashuram Ji Ki ||

आरती श्री परशुराम जी की Aarti Shri Parashuram Ji Ki  ** ओउम जय परशुधारी  स्वामी जय परशुधारी सुर नर मुनिजन सेवत  श्रीपति अवतारी  ओउम जय परशुधारी  ** जमदग्नी सुत नरसिंह  मां रेणुका जाया मार्तण्ड भृगु वंशज  त्रिभुवन यश छाया ओउम जय परशुधारी  ** कांधे सूत्र जनेऊ  गल रुद्राक्ष माला चरण खड़ाऊँ शोभे  तिलक त्रिपुण्ड भाला ओउम जय परशुधारी  ** ताम्र श्याम घन केशा  शीश जटा बांधी सुजन हेतु ऋतु मधुमय  दुष्ट दलन आंधी ओउम जय परशुधारी  ** मुख रवि तेज विराजत रक्त वर्ण नैना दीन-हीन गो विप्रन  रक्षक दिन रैना ओउम जय परशुधारी  ** कर शोभित बर परशु  निगमागम ज्ञाता कंध चार-शर वैष्णव  ब्राह्मण कुल त्राता ओउम जय परशुधारी  ** माता पिता तुम स्वामी मीत सखा मेरे मेरी बिरत संभारो  द्वार पड़ा मैं तेरे ओउम जय परशुधारी  ** अजर-अमर श्री परशुराम की आरती जो गावे पूर्णेन्दु शिव साखी  सुख सम्पति पावे ओउम जय परशुधारी  ***** आरती श्री परशुराम जी की Aarti Shri Parashuram Ji Ki  ** Oum jaya parashudhārī  Svā...