** जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत का महत्व एवं विधि (Jitiya Vrat Ka Mahatva evam Vidhi) ** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो कोई भी महिला जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत करती है उसकी संतान पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आता। साथ ही संतान का जीवन सुख से भर जाता है। महिलायें इस व्रत में अन्न-जल ग्रहण नहीं करती हैं अर्थात इस दिन निर्जला रहती हैं। इस दिन कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा की पूजा करने का विधान है। साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्ति भी बनायी जाती है। महिलायें शुभ मुहूर्त में विधि विधान पूजा करके जितिया की कथा सुनती हैं। ** जितिया व्रत कथा / चील और सियारिन की कथा (Jitiya Vrat Katha / Cheel aur Siyari Ki Katha) ** किसी समय में एक वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में पक्की मित्रता थी और वे हर काम को आपस में मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जितिया व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की इच्छा हुई। वह महिलाओं के पास जाकर उनसे व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के...
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