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जीवित्पुत्रिका व्रत : महत्व, पूजन विधि व जितिया व्रत की कथाएँ | Jitiya Vrat Katha PDF Download

** जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत का महत्‍व एवं विधि (Jitiya Vrat Ka Mahatva evam Vidhi) ** धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो कोई भी महिला जीवित्पुत्रिका व्रत या जितिया व्रत करती है उसकी संतान पर कभी कोई बड़ा संकट नहीं आता। साथ ही संतान का जीवन सुख से भर जाता है। महिलायें इस व्रत में अन्‍न-जल ग्रहण नहीं करती हैं अर्थात इस दिन निर्जला रहती हैं। इस दिन कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा की पूजा करने का विधान है। साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से चील और सियारिन की मूर्ति भी बनायी जाती है। महिलायें शुभ मुहूर्त में विधि विधान पूजा करके जितिया की कथा सुनती हैं। ** जितिया व्रत कथा / चील और सियारिन की कथा (Jitiya Vrat Katha / Cheel aur Siyari Ki Katha) ** किसी समय में एक वन में एक चील और सियारिन रहती थी। दोनों में पक्‍की मित्रता थी और वे हर काम को आपस में मिल-बांट के किया करती थीं। एक बार कुछ महिलाएं जंगल में आई जो जितिया व्रत की आपस में बात कर रही थीं। चील के मन में इस व्रत के बारे में जानने की इच्‍छा हुई। वह महिलाओं के पास जाकर उनसे व्रत के बारे में पूछने लगी। महिलाओं ने जितिया व्रत के विधान के...

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा | Shukravar Vrat Katha | शुक्रवार व्रत कथा

श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा || Shri Vaibhav Laxmi Vrat Katha || शुक्रवार व्रत कथा || Shukravar Vrat Katha ** ** सुख, शांति, वैभव और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए अद्भुत चमत्कारी प्राचीन व्रत ** वैभव लक्ष्मी व्रत करने का नियम Vaibhav Lakshmi Vrat Karne Ka Niyam ** 1. यह व्रत सौभाग्यशाली स्त्रियां करें तो उनका अति उत्तम फल मिलता है, पर घर में यदि सौभाग्यशाली स्त्रियां न हों तो कोई भी स्त्री एवं कुमारिका भी यह व्रत कर सकती है। 2. स्त्री के बदले पुरुष भी यह व्रत करें तो उसे भी उत्तम फल अवश्य मिलता है। 3. यह व्रत पूरी श्रद्धा और पवित्र भाव से करना चाहिए। खिन्न होकर या बिना भाव से यह व्रत नहीं करना चाहिए।  4. यह व्रत शुक्रवार को किया जाता है। व्रत शुरु करते वक्त 11 या 21 शुक्रवार की मन्नत रखनी पड़ती है और बताई गई शास्त्रीय विधि अनुसार ही व्रत करना चाहिए। मन्नत के शुक्रवार पूरे होने पर विधिपूर्वक और बताई गई शास्त्रीय रीति के अनुसार उद्यापन करना चाहिए। यह विधि सरल है। किन्तु शास्त्रीय विधि अनुसार व्रत न करने पर व्रत का जरा भी फल नहीं मिलता है।  5. एक बार व्रत पूरा करने के पश्चात फिर मन्नत कर...

श्री शारदा स्तोत्रम् | Shri Sharda Stotram Lyrics in Hindi, Sanskrit and English

श्री शारदा स्तोत्रम् | Shri Sharda Stotram Lyrics in Hindi, Sanskrit and English  *** *** श्री शारदा स्तोत्रम्: ज्ञान, बुद्धि और वाणी की देवी माँ सरस्वती की स्तुति भारतवर्ष में सनातन धर्म की परंपरा अत्यंत समृद्ध है, जहाँ देवी-देवताओं की स्तुति हेतु अनेकों स्तोत्र, मंत्र और स्रोत उपलब्ध हैं। इन्हीं में से एक विशेष और शक्तिशाली स्तुति है - श्री शारदा स्तोत्रम्, जो देवी सरस्वती को समर्पित है। देवी सरस्वती को "शारदा" भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है - ज्ञान देने वाली । यह स्तोत्र न केवल भक्तों के हृदय में भक्ति की भावना जागृत करता है, बल्कि उनके जीवन में ज्ञान, विवेक और वाणी की शक्ति भी प्रदान करता है। यह स्तोत्र ज्ञान, बुद्धि और विद्या की देवी को प्रसन्न करने के लिए पढ़ा जाता है। शारदा स्तोत्र में देवी शारदा की महिमा का वर्णन है और उनसे ज्ञान, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मांगा जाता है। इसका पाठ करने से साधक की बुद्धि तीव्र होती है, वाणी मधुर बनती है और विद्या की प्राप्ति होती है। विशेषकर छात्र, लेखक, वक्ता और कलाकार इस स्तोत्र का नियमित पाठ करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। देवी सरस्व...

आरती संग्रह ।। सभी देवी देवताओं की आरतियों का संग्रह ।। Aarti Sangrah || Sabhi Devi Devtaon Ki Aartiyon ka Sangrah || Arti Sangrah - All Arti Lyrics : Aarti

आरती संग्रह ।। सभी देवी देवताओं की आरतियों का संग्रह ।। Aarti Sangrah || Sabhi Devi Devtaon Ki Aartiyon ka Sangrah|| ** ** आरती वृहस्पति देव की । ॐ जय वृहस्पति देवा । Om Jay Brihaspati Deva | Brihaspati Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi & English ** ॐ जय वृहस्पति देवा  जय वृहस्पति देवा  छिन छिन भोग लगाऊँ  कदली फल मेवा ॥ॐ॥  ** तुम पूर्ण परमात्मा  तुम अन्तर्यामी   जगत पिता जगदीश्वर  तुम सबके स्वामी ॥ ॐ ॥  ** चरणामृत निज निर्मल  सब पातक हर्ता   सकल मनोरथ दायक  कृपा करो भर्ता ॥ॐ॥  ** तन, मन, धन, अर्पणकर  जो जन शरण पड़े  प्रभु प्रकट तब होकर  आकर द्वार खड़े ॥ॐ ॥  ** दीन दयाल दयानिधि  भक्तन हितकारी  पाप दोष सब हर्ता  भव बन्धन हारी ॥ॐ॥  ** सकल मनोरथ दायक  सब संशय तारी   विषय विकार मिटाओ  सन्तन सुखकारी ॥ॐ॥  ** जो कोई आरती तेरी  प्रेम सहित गावे   जेष्टानन्द, बंद सो  सो निश्चय पावे ॥ॐ॥ ** सब बोलो विष्णु भगवान् की जय  बोलो वृहस्पति देव भगवान्...