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श्री संतोषी माता की व्रत कथा || Shri Santoshi Mata Ki Vrat Katha || शुक्रवार की व्रत कथा

 श्री संतोषी माता की व्रत कथा || Shri Santoshi Mata Ki Vrat Katha || शुक्रवार की व्रत कथा || Shukravar Ki Vrat Katha व्रत करने की विधि  इस व्रत को करने वाला कथा कहते वह सुनते समय हाथ में गुड़ व भुने हुए चने रखेा। सुनने वाले ''संतोषी माता की जय'', ''संतोषी माता की जय'' इस प्रकार जय-जयकार मुख से बोलते जाए। कथा समाप्त होने पर कथा का गुड़-चना गौ माता को खिलायें। कलश में रखा हुआ गुड़-चना सब को प्रसाद के रूप में बांट दें। कथा से पहले कलश को जल से भरें। उसके ऊपर गुड़-चने से भरा कटोरा रखें।  कथा समाप्त होने और आरती होने के बाद कलश के जल को घर में सब जगहों पर छिड़कें और बचा हुआ जल तुलसी की क्यारी में डाल देवें। सवा आने का गुण चना लेकर माता का व्रत करें। सवा पैसे का ले तो कोई आपत्ति नहीं। गुड़ घर में हो तो ले लेवें, विचार न करें।  क्योंकि माता भावना की भूखी है, कम ज्यादा का कोई विचार नहीं, इसलिए जितना भी बन पड़े अर्पण करें।  श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न मन हो व्रत करना चाहिए।  व्रत के उद्यापन में अढ़ाई सेर खाजा मोमनदार पूड़ी, खीर, चने का साग नैवेद्य रखें। घी का दीप...

श्री गणपति जी की आरती || Shri Ganapati Ji Ki Aarti || ओम जय गौरीनन्‍दा || Om Jay Gaurinanda

श्री गणपति जी की आरती || Shri Ganapati Ji Ki Aarti || ओम जय गौरीनन्‍दा || Om Jay Gaurinanda ओम जय गौरीनन्‍दा,  हरि जय गिरिजानन्‍दा ।  गणपति आनन्‍दकन्‍दा,  गुरुगणपति आनन्‍दकन्‍दा ।  मैं चरणन वंदा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  सूंंड सूंडालो नेत्रविशालो कुण्‍डल झलकन्‍दा,  हरि कुण्‍डल झलकन्‍दा।   कुंकुम केशर चन्‍दन, कुंकुम केशर चन्‍दन,  सिंदुर वदन बिंदा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  मुकुट सुघड सोहंता मस्‍तक शोभन्‍ता,  हरि मस्‍तक शोभन्‍ता।  बहियां बाजूबन्‍दा हरि बहियां बाजूबन्‍दा,  पहुंची निरखन्‍ता।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  रत्‍न जडित सिंहासन सोहत गणपति आनंदा,  हरि गणपति आनन्‍दा।  गले मोतियन की माला गले वैजयन्‍ती माला  सुरनर मुनि वृन्‍दा । ओम जय गौरीनन्‍दा।  मूषक वाहन राजत शिवसुत आनन्‍दा  हरि शिवसुत आनन्‍दा।  भजत शिवानन्‍द स्‍वामी जपत हरि हर स्‍वामी  मेटत भवफन्‍दा।  ओम जय गौरीनन्‍दा।  ****** विनम्र अनुरोध:  अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comm...

श्री शनि देव चालीसा || Shri Sani Dev Shalisa || जयति जयति शनिदेव दयाला || Jayati Jayati Shanidev Dayala

दोहा (Jay Ganesh Girija Suvan) जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ।।  जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।  करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।। जयति जयति शनिदेव दयाला।  करत सदा भक्तन प्रतिपाला।।  चारि भुजा तनु श्याम विराजै।  माथे रतन मुकुट छबि छाजै।।  परम विशाल मनोहर भाला।  टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।  कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके।। कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा।। पिंगल, कृष्णों, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन।। सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा।। जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं ।। पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत।। राज मिलत बन रामहिं दीन्ह्यो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्ह्यो।। बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई।। लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा।। रावण की गतिमति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई।। दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका।। नृप विक्रम पर तुहि पगु ध...

हनुमान स्‍तुति || Hanuman Stuti || नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम् || Namo Anjani Nandanam Vayuputam

हनुमान स्‍तुति || Hanuman Stuti || नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्  || Namo Anjani Nandanam Vayuputam   नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्   सदा मंगलागार श्री राम दूतम्  महावीर वीरेश त्रिकाल वेशम्  घनानन्द निर्द्वन्द हर्तां कलेशम्  सजीवन जड़ी लाय नागेश काजे गयी मूर्छना राम भ्राता निवाजे सकल दीन जन के हरो दुःख स्वामी नमो वायुपुत्रं नमामि नमामि नमो अंजनि नंदनं वायुपूतम्   सदा मंगलागार श्री राम दूतम् विनम्र अनुरोध: अपनी उपस्थिति दर्ज करने एवं हमारा उत्साहवर्धन करने हेतु कृपया टिप्पणी (comments) में जय श्री राम अवश्य अंकित करें। ***** यह भी पढें - भगवान भोले शंकर की स्‍तुतियॉं   सोमवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें   मंगलवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  बुधवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  गुरुवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  शुक्रवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें  शनिवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें रविवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें 

वट सावित्री व्रत कथा || Vat Savitri Vrat Katha || सत्‍यवान-स‍ाावित्री की कथा || Satyavan Savitri Ki Katha

वट सावित्री व्रत कथा || Vat Savitri Vrat Katha || सत्‍यवान-स‍ाावित्री की कथा || Satyavan Savitri Ki Katha वट सावित्री व्रत : एक परिचय || Vat Savitri Vrat : Ek Parichay : An Introduction ऐसा कहा जाता है कि वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों का सबसे बड़ा त्यौहार है । ज्येष्ठ कृष्ण की अमावस्या के दिन इस व्रत को करने का विधान है। इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा की जाती है। इस दिन सत्यवान सावित्री के साथ-साथ यमराज की पूजा भी की जाती है। स्त्रियां इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य कामना तथा उन्नति के लिए करती हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी व्रत के प्रभाव से सावित्री अपने पति सत्यवान को यमराज से मुक्त करा सकी थी।  व्रत का विधि विधान || Vrat ka vidhi vidhan || Vat Savitri Vrat Kaise Kare इस दिन स्त्रियां सुबह सवेरे स्नान आदि से निवृत्त होकर एक बांस की टोकरी में रेत भरकर ब्रह्मा जी की मूर्ति की स्थापना करें। उसके बाद ब्रह्मा जी के बाएं तरफ सावित्री की मूर्ति की स्थापना करें। इसी तरह एक दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्ति स्थापित करें और दोनों टोकरियों को वटवृक्ष के नीचे रखें। सर...

सिया रघुवर जी की आरती || Siya Raghubar Ji Ki Aarti || राम भजन || Ram Bhajan

सिया रघुवर जी की आरती || Siya Raghubar Ji Ki Aarti || राम भजन || Ram Bhajan सिया रघुवर जी की आरती , शुभ आरती कीजै। ** शीश मुकुट काने कुंडल सोहे -२ राम लखन सिया जानकी, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती , शुभ आरती कीजै। ** मोर मुकुट माथे पर सोहे -२ राधा सहित घनश्याम की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** अक्षत चंदन घी की बाती -२ उमा सहित महादेव की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** मम दुख हरणी मंगल करणी-२ आरती लक्ष्मी गणेश की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** अलख निरंजन असुर निकन्दन-२ अंजनि लला हनुमान की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** रामदेव अउरी कुलदेवता -२ माता पिता गुरुदेव की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ****

श्री भागवत भगवान की है आरती लिरिक्‍स || Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti Lyrics in Hindi and English

श्री भागवत भगवान की है आरती लिरिक्‍स || Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti Lyrics in Hindi and English ** ** श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती।  ** ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ ये पंचम वेद निराला नव ज्योति जलाने वाला हरि नाम यही हरि धाम यही-२ जग के मंगल की आरती पापियों को पाप से है तारती श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती। ** ये शान्ति गीत पावन पुनीत पापों को मिटाने वाला हरि दरश कराने वाला ये सुख करनी, ये दुःख हरिनी-२ श्री मधुसूदन की आरती पापियों को पाप से है तारती श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती।   ** ये मधुर बोल, जग फन्द खोल सतमार्ग बताने वाला बिगड़ी को बनानेवाला श्री राम यही, घनश्याम यही-२ प्रभु की महिमा की आरती पापियों को पाप से है तारती श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती। ** श्री भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती। ** श्री भागवत भगवान की है आरती लिरिक्‍स || Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti Lyrics in Hindi and English ** Shrī bhāgavat bhagavān kī hai āratī, Pāpiyoan...