पूर्णमासी व्रत कथा || Purnamasi Vrat Katha || Purnima Vrat Katha || Sharad Purnima Vrat Katha || Kartik Purnima Vrat Katha
पूर्णमासी व्रत कथा || Purnamasi Vrat Katha || Purnima Vrat Katha || Sharad Purnima Vrat Katha || Kartik Purnima Vrat Katha पूर्णमासी व्रत की पूजन सामग्री || Purnmasi Vrat Ki Pujan Samagri दूध, दही, घी, शर्करा, गंगाजल, रोली, मौली, ताम्बूल, पूंगीफल, धूप, फूल (सफेद कनेर), यज्ञोपवीत, श्वेत वस्त्र, लाल वस्त्र, आक, बिल्व-पत्र, फूलमाला, धतूरा, बांस की टोकरी, आम के पत्ते, चावल, तिल, जौ, नारियल (पानी वाला), दीपक, ऋतुफल, अक्षत, नैवेद्य, कलष, पंचरंग, चन्दन, आटा, रेत, समिधा, कुश, आचार्य के लिए वस्त्र, शिव-पार्वती की स्वर्ण मूर्ति (अथवा पार्थिव प्रतिमा), दूब, आसन आदि। पूर्णमासी व्रत की पूजन विधि || Purnmasi Vrat Ki Pujan Vidhi पूजन करने वाला व्यक्ति प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर किसी पवित्र स्थान पर आटे से चैक पूर कर केले का मण्डप बनाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर स्थापित करे। तत्पश्चात् नवीन वस्त्र धारण कर आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर देशकालादि के उच्चारण के साथ हाथ में जल लेकर संकल्प करें। उसके बाद गणेश जी का आवाहन व पूजन करें। अनन्तर वरुणादि देवों का आव...