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श्री शिव चालीसा || जय गणेश गिरिजा सुवन || Shri Shiv Chalisa || Jay Ganesh Girija Suvan || Jay Girijapati Deen Dayala || Shri Shiv Stuti

श्री शिव चालीसा || जय गणेश गिरिजा सुवन || Shri Shiv Chalisa || Jay Ganesh Girija Suvan || Jay Girijapati Deen Dayala || Shri Shiv Stuti (चित्र गूगल से साभार) दोहा जय गणेश गिरिजा सुवन,  मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम,  देहु अभय वरदान॥ चौपाई जय गिरिजापति दीनदयाला, सदा करत सन्तन प्रतिपाला। भाल चन्द्रमा सोहत नीके, कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये, मुण्डमाल तन छार लगाये। वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे, छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ मैना मातु कि हवे दुलारी, वाम अंग सोहत छवि न्यारी। कर त्रिशूल सोहत छवि भारी, करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ नन्दि गणेश सोहैं तहं कैसे, सागर मध्य कमल हैं जैसे। कार्तिक श्याम और गणराऊ, या छवि को कहि जात न काऊ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा, तबहीं दुःख प्रभु आप निवारा। किया उपद्रव तारक भारी, देवन सब मिलि तुमहि जुहारी॥ तुरत षड़ानन आप पठायउ, लव निमेष महं मारि गिरायउ। आप जलंधर असुर संहारा, सुयश तुम्हार विदित संसारा॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई, सबहिं कृपा कर लीन बचाई। दानिन महं तुम सम कोई नाहीं, सेवक अस्तुति करत सदा ही॥ वेद नाम महिमा तव गाई, अकथ अनादि भेद नहिं पा...

आरती श्री शिव जी की || Aarti Shri Shiv Ji Ki || जय शिव ओंकारा || Jay Shiv Onkara || Shri Shiv Stuti || Shiv Ratri Special

आरती श्री शिव जी की || Aarti Shri Shiv Ji Ki || जय शिव ओंकारा || Jay Shiv Onkara || Shri Shiv Stuti || Shiv Ratri Special (चित्र गूगल से साभार) जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा, ब्रह्‌मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा। एकानन चतुरानन पंचानन राजै हंसानन गरुणासन वृषवाहन साजै। दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहै, तीनों रूप निरखते त्रिभुवन मन मोहे। अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी, चन्दन मृगमद चंदा सोहै त्रिपुरारी। श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, सनकादिक ब्रह्‌मादिक भूतादिक संगे। कर मध्ये च कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी, सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी। ब्रह्‌मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका। त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पत्ति पावे॥

Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki | श्री रघुवर जी की आरती (Lyrics in Hindi & Hinglish)

श्री राम जी की आरती || आरती श्री रघुवर जी की ||Aarti Shri Raghuvar Ji Ki || Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti || Shri Ram Stuti Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki | श्री रघुवर जी की आरती (Lyrics in Hindi & Hinglish) ** हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम का नाम अत्यंत पावन और कल्याणकारी माना जाता है। Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह आरती प्रभु श्रीराम के गुणों का गुणगान करती है और भक्तों के सभी दुखों को हर लेती है। ** श्री रघुवर जी की आरती का महत्व ** कहा जाता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से Shri Raghuvar Ji Ki Aarti करता है, उसके जीवन से भय, शोक और दुख समाप्त हो जाते हैं। भगवान राम “मर्यादा पुरुषोत्तम” के रूप में संपूर्ण जगत के लिए आदर्श हैं। उनकी आरती करने से भक्तों को धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। ** Shri Ram Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & Hinglish ** भक्तों की सुविधा के लिए यहाँ Ram Ji Ki Aarti in Hindi और Ram Aarti in Hinglish दोनों रूपों में प्रस्तुत की जाती है। हिंदी पाठ करने से जहां भक्त भावविभोर हो ...

श्री राम चालीसा || श्री रघुवीर भक्त हितकारी || Shri Ram Chalisa || Shri Raghubeer Bhakt Hitkari || Shri Ram Stuti || Ran Navami

श्री राम चालीसा || श्री रघुवीर भक्त हितकारी || Shri Ram Chalisa || Shri Raghubeer Bhakt Hitkari || Shri Ram Stuti || Ran Navami श्री रघुवीर भक्त हितकारी,  सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी। निशि दिन ध्यान धरै जो कोई,  ता सम भक्त और नहिं होई॥ ध्यान धरे शिवजी मन माहीं,  ब्रह्‌मा इन्द्र पार नहिं पाहीं। जय जय जय रघुनाथ कृपाला,  सदा करो सन्तन प्रतिपाला॥ दूत तुम्हार वीर हनुमाना,  जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना। तव भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला,  रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥ तुम अनाथ के नाथ गोसाईं,  दीनन के हो सदा सहाई। ब्रह्‌मादिक तव पार न पावैं,  सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥ चारिउ वेद भरत हैं साखी,  तुम भक्तन की लज्जा राखी। गुण गावत शारद मन माहीं,  सुरपति ताको पार न पाहीं॥ नाम तुम्हार लेत जो कोई,  ता सम धन्य और नहिं होई। राम नाम है अपरम्पारा,  चारिउ वेदन जाहि पुकारा॥ गणपति नाम तुम्हारो लीन्हौ,  तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हौ। शेष रटत नित नाम तुम्हारा,  महि को भार शीश पर धारा॥ फूल समान रहत सो भारा,  पाव न कोउ तुम्हारो पारा। भरत नाम तुम्हरो उर धा...

श्री गणेश चालीसा || जय जय जय गणपति गणराजू || SHRI GANESH CHALISA || Jay Jay Jay Ganpati Ganraju || Shri Ganesh Stuti

श्री गणेश चालीसा || जय जय जय गणपति गणराजू ||  SHRI GANESH CHALISA || Jay Jay Jay Ganpati Ganraju || Shri Ganesh Stuti  (चित्र गूगल से साभार) दोहा जय गणपति सद्‌गुण सदन,  करि वर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण,  जय जय गिरिजालाल॥ चौपाई जय जय जय गणपति गणराजू, मंगल भरण करण शुभ काजू। जय गजबदन सदन सुखदाता, विश्वविनायक बुद्धिविधाता। वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन, तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन। राजत मणि मुक्तन उर माला, स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला। पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं, मोदक भोग सुगन्धित फूलं। सुन्दर पीताम्बर तन साजित, चरण पादुका मुनि मन राजित। धनि शिव सुवन षडानन भ्राता, गौरी ललन विश्व विखयाता। ऋद्धि सिद्धि तव चंवर सुधारे, मूषक वाहन सोहत द्वारे। कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी, अति शुचि पावन मंगलकारी। एक समय गिरिराज कुमारी, पुत्र हेतु तप कीन्हों भारी। भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा, तब पहुच्यों तुम धरि द्विज रूपा। अतिथि जानि के गौरी सुखारी, बहु विधि सेवा करी तुम्हारी। अति प्रसन्न ह्‌वै तुम वर दीन्हा, मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा। मिलहिं पुत्र तुह...

श्री शनि देव चालीसा || शनि देव मैं सुमिरौं तोही || Shri Shani Dev Chalisa || Shani Dev mai Sumirau Tohi || Shri Shani Chalisa

श्री शनि देव चालीसा || शनि देव मैं सुमिरौं तोही || Shri Shani Dev Chalisa || Shani Dev mai Sumirau Tohi || Shri Shani Chalisa  दोहा   श्री शनिश्चर देवजी ,  सुनहु श्रवण मम टेर। कोटि विघ्ननाशक प्रभो ,  करो न मम हित बेर॥ सोरठा तव स्तुति हे नाथ ,  जोरि जुगल कर करत हौं। करिये मोहि सनाथ ,  विघ्नहरण हे रवि सुवन॥ चौपाई शनि देव मैं सुमिरौं तोही ,  विद्या बुद्धि ज्ञान दो मोही। तुम्हरो नाम अनेक बखानौं ,  क्षुद्रबुद्धि मैं जो कुछ जानौं। अन्तक , कोण , रौद्रय मगाऊँ ,  कृष्ण बभ्रु शनि सबहिं सुनाऊँ। पिंगल मन्दसौरि सुख दाता ,  हित अनहित सब जग के ज्ञाता। नित जपै जो नाम तुम्हारा ,  करहु व्याधि दुख से निस्तारा। राशि विषमवस असुरन सुरनर ,  पन्नग शेष साहित विद्याधर। राजा रंक रहहिं जो नीको ,  पशु पक्षी वनचर सबही को। कानन किला शिविर सेनाकर ,  नाश करत सब ग्राम्य नगर भर। डालत विघ्न सबहि के सुख में ,  व्याकुल होहिं पड़े सब दुख में। नाथ विनय तुमसे यह मेरी ,  करिये मोपर दया घनेरी। मम हित विषयम राशि मंहवासा ,  करिय न नाथ यही मम आसा। ...

श्री गंगा चालीसा || जय जय जय जग पावनी || Shri Ganga Chalisa || Jay Jay Jay Jag Pawani || Shri Ganga Stuti

दोहा जय जय जय जग पावनी जयति देवसरि गंग। जय शिव जटा निवासिनी अनुपम तुंग तरंग॥ चौपाई जय जग जननि अघ खानी,  आनन्द करनि गंग महरानी। जय भागीरथि सुरसरि माता,  कलिमल मूल दलनि विखयाता। जय जय जय हनु सुता अघ अननी,  भीषम की माता जग जननी। धवल कमल दल मम तनु साजे,  लखि शत शरद चन्द्र छवि लाजे। वाहन मकर विमल शुचि सोहै,  अमिय कलश कर लखि मन मोहै। जडित रत्न कंचन आभूषण,  हिय मणि हार, हरणितम दूषण। जग पावनि त्रय ताप नसावनि,  तरल तरंग तंग मन भावनि। जो गणपति अति पूज्य प्रधाना,  तिहुं ते प्रथम गंग अस्नाना। ब्रह्‌म कमण्डल वासिनी देवी  श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवी। साठि सहत्र सगर सुत तारयो,  गंगा सागर तीरथ धारयो। अगम तरंग उठयो मन भावन,  लखि तीरथ हरिद्वार सुहावन। तीरथ राज प्रयाग अक्षैवट,  धरयौ मातु पुनि काशी करवट। धनि धनि सुरसरि स्वर्ग की सीढ़ी,  तारणि अमित पितृ पद पीढ़ी । भागीरथ तप कियो अपारा,  दियो ब्रह्म तब सुरसरि धारा। जब जग जननी चल्यो लहराई,  शंभु जटा महं रह्यो समाई। वर्ष पर्यन्त गंग महरानी,  रहीं शंभु के...