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Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki | श्री रघुवर जी की आरती (Lyrics in Hindi & Hinglish)

श्री राम जी की आरती || आरती श्री रघुवर जी की ||Aarti Shri Raghuvar Ji Ki || Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti || Shri Ram Stuti


Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki | श्री रघुवर जी की आरती (Lyrics in Hindi & Hinglish)
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हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम का नाम अत्यंत पावन और कल्याणकारी माना जाता है। Aarti Kije Shri Raghuvar Ji Ki का पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह आरती प्रभु श्रीराम के गुणों का गुणगान करती है और भक्तों के सभी दुखों को हर लेती है।
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श्री रघुवर जी की आरती का महत्व
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कहा जाता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति से Shri Raghuvar Ji Ki Aarti करता है, उसके जीवन से भय, शोक और दुख समाप्त हो जाते हैं। भगवान राम “मर्यादा पुरुषोत्तम” के रूप में संपूर्ण जगत के लिए आदर्श हैं। उनकी आरती करने से भक्तों को धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
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Shri Ram Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi & Hinglish
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भक्तों की सुविधा के लिए यहाँ Ram Ji Ki Aarti in Hindi और Ram Aarti in Hinglish दोनों रूपों में प्रस्तुत की जाती है। हिंदी पाठ करने से जहां भक्त भावविभोर हो जाते हैं वहीं Ram Aarti Lyrics in Hinglish उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें देवनागरी लिपि पढ़ने में कठिनाई होती है।
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रामनवमी या किसी भी शुभ अवसर पर Aarti Kije Shri Ram Ji का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह आरती हर भक्त को दिव्य आनंद और आत्मिक शांति प्रदान करती है।
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यदि आप “Shri Ram Aarti Lyrics” या “Shri Raghuvar Ji Ki Aarti in Hinglish” ढूंढ रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए सही स्थान है। हमें पूर्ण विश्‍वास है कि यह लेख आपकोअवश्‍य पसन्‍द आया होगा। यदि आपके पास भी आरती, भजन, व्रतकथा, देवीगीत आदि उपलब्‍ध है तो कृपया हमसे साझा करें, हम उसे आपके नाम से साथ अपने ब्‍लाग में प्रकाशित करेंगे। तो लीजिये प्रस्‍तुत है श्री राज जी की आरती लिरिक्‍स हिन्‍दी औरअंग्रेजी में -
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आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥
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दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥
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अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥
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निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥
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हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की॥
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जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥
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विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की॥
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शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥
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नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की॥

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Aarti kije Shri Raghuvar ji ki,
Sat Chit Anand Shiv Sundar ki॥
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Dashrath tanay Kaushalya nandan,
Sur muni rakshak daitya nikandan॥
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Anugat bhakt bhakt ur chandan,
Maryada Purushottam var ki॥
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Nirgun sagun anup roop nidhi,
Sakal lok vandit vibhinn vidhi॥
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Haran shok-bhay dayak nav nidhi,
Maya rahit divya nar var ki॥
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Janaki pati sur adhipati jagpati,
Akhil lok palak trilok gati॥
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Vishv vandya avanah amit gati,
Ek matra gati sacharachar ki॥
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Sharanagat vatsal vratdhari,
Bhakt kalp taruvar asurari॥
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Naam let jag pavan kari,
Vanar sakha deen dukh har ki॥
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