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रविवार, 5 जुलाई 2026
आरती श्री भैरवनाथ जी की | सुनो जी भैरव लाडिले | Suno Ji Bhairav Ladile Aarti Lyrics in Hindi and English
जय कश्यप-नन्दन| Jay Kashyap Nandan | Surya Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
सूर्य देव आरती हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली आरती मानी जाती है। भगवान सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, स्वास्थ्य, सफलता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह आरती विशेष रूप से रविवार के दिन और सूर्य उपासना के समय श्रद्धा एवं भक्ति के साथ गाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
आरती युगलकिशोर की कीजै | Aarti Yugalkishor Ki Kire Lyrics in Hindi and English
आरती युगलकिशोर की कीजै भगवान राधा-कृष्ण (युगल किशोर) को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय और मधुर आरती है, जिसका पाठ भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिदिन तथा विशेष अवसरों पर करते हैं। यह आरती श्रीकृष्ण और राधारानी के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक शोभा और भक्तों पर बरसने वाली कृपा का सुंदर वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस आरती का नियमित गायन करने से मन को शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।
इस लेख में आपको आरती युगलकिशोर की कीजै के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी और English (Transliteration) में उपलब्ध हैं। साथ ही आरती का महत्व, पाठ करने का सही समय, पूजा में इसका स्थान तथा श्री राधा-कृष्ण की आराधना से जुड़े धार्मिक लाभों की जानकारी भी मिलेगी। यदि आप Aarti Yugalkishor Ki Kijiye Lyrics in Hindi, Aarti Yugalkishor Ki Lyrics in English, राधा कृष्ण आरती, युगल किशोर आरती, या Radha Krishna Aarti Lyrics खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण और उपयोगी स्रोत है।
*आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन धन न्योछावर कीजै॥
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गौरश्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का रूप नयन भरि पीजै॥
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रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
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ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी॥
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फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
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कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
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श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल नर नारी॥
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नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
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Aarti Yugalkishor Ki Kijiye
Tan Man Dhan Nayochawar Kijiye
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Gorshyam Mukh Nirkhan Lijiye
Hari Ka Rup Nayan Bhari Pijiye
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Ravi Shashi Koti Badan Ki Shobha
Tahi Nirkhi Mero Mann Lobha
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Odhe Neel Peet Pat Sari
Kunjbihari Girivardhari
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Fulan Sej Phul Ki Mala
Ratan Singhasan Baatai Nandlal
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Kanchan Thar Kapoor Ki Baati
Hari Aae Nirmal Bhai Chati
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Sri Purushotam Girivardhari
Aarti Kare Sakal Nar Nari
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Nandnandan Brijbhan Kishori
Parmanand Sawami Avichal Jori
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बुध देव की आरती Budh Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi and English
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध देव की नियमित पूजा, उपासना और आरती करने से कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, स्मरण क्षमता और संवाद कौशल का कारक माना जाता है। इसलिए श्रद्धा और विधिपूर्वक बुध देव की आराधना करने से व्यक्ति के विचारों में स्पष्टता आती है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है तथा बोलने और अपनी बात प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास बढ़ता है।
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ऐसी मान्यता है कि बुध ग्रह के शुभ होने पर शिक्षा, व्यापार, नौकरी और करियर में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं। विशेष रूप से व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए बुध देव की कृपा लाभ, आर्थिक प्रगति और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। इसके साथ ही, पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में भी मधुरता और बेहतर संवाद स्थापित होने में सहायता मिलती है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह के मजबूत होने से त्वचा, तंत्रिका तंत्र (नसों) तथा मानसिक संतुलन से जुड़ी कुछ समस्याओं में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, किसी भी शारीरिक या मानसिक बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित चिकित्सा आवश्यक है। बुध देव की पूजा को आध्यात्मिक आस्था और आत्मिक शांति का माध्यम माना जाता है, जो जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
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ॐ जय बुध देव हरे,
प्रभु जय बुध देव हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
शीत चंद के सुत तुम,
शीर समुद्र प्रगटे।
हेम मुकुट सिर सोहे,
नैन छवि अटके।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
रूप रूप धर तुम ही,
जग के हितकारी।
भक्तों की पीड़ा हरते,
सब जग के सुखकारी।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
तन पर पीत अम्बर,
माला गल सोहे।
दर्शन पावत साधु,
सुर नर मुनि मोहे।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
जो जन तेरी आरती,
प्रेम सहित गावै।
सो निश्चय ही मनवांछित,
फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
*
बुध देव की आरती,
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी,
मनवांछित फल पावै।।
ॐ जय बुध देव हरे
***
*
Om Jai Budh Dev Hare,
Prabhu Jai Budh Dev Hare.
Bhakt Janon Ke Sankat,
Kshan Mein Door Kare.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Sheet Chand Ke Sut Tum,
Sheer Samudra Pragate.
Hem Mukut Sir Sohe,
Nain Chhavi Atake.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Roop Roop Dhar Tum Hi,
Jag Ke Hitkari.
Bhakton Ki Peeda Harte,
Sab Jag Ke Sukhkari.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Tan Par Peet Ambar,
Mala Gal Sohe.
Darshan Pavat Sadhu,
Sur Nar Muni Mohe.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Jo Jan Teri Aarti,
Prem Sahit Gaavai.
So Nishchay Hi Manvanchhit,
Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
*
Budh Dev Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gaavai.
Kahat Shivanand Swami,
Manvanchhit Phal Paavai.
Om Jai Budh Dev Hare.
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शनिवार, 18 अप्रैल 2026
Shri Surya Dev Aarti | ॐ जय सूर्य भगवान | Lyrics in Hindi and English
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ॐ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी।
तुम चार भुजाधारी।।
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे।
तुम हो देव महान।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते।
सब तब दर्शन पाते।।
फैलाते उजियारा
जागता तब जग सारा।
करे सब तब गुणगान ।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
संध्या में भुवनेश्वर
अस्ताचल जाते।
गोधन तब घर आते।।
गोधुली बेला में
हर घर हर आंगन में।
हो तव महिमा गान ।।
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ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
देव दनुज नर नारी
ऋषी मुनी वर भजते।
आदित्य हृदय जपते।।
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी।
दे नव जीवनदान ।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार।
महिमा तव अपरम्पार।।
प्राणों का सिंचन करके
भक्तों को अपने देते।
बल बृद्धि और ज्ञान ।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।
वेद पुराण बखाने
धर्म सभी तुम्हें माने।
तुम ही सर्व शक्तिमान ।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
पूजन करती दिशाएं
पूजे दश दिक्पाल।
तुम भुवनों के प्रतिपाल।।
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी।
शुभकारी अंशमान ।।
*
ॐ जय सूर्य भगवान।।
*
ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।
धरत सब ही तव ध्यान,
ॐ जय सूर्य भगवान।।
***
Om Jai Surya Bhagwan,
Jai ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netra swaroopa,
Tum ho trigun swaroopa.
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Saarathi Arun hain prabhu tum,
Shwet kamaldhaari.
Tum chaar bhujadhaari।।
Ashwa hain saat tumhaare,
Koti kiran pasaare.
Tum ho dev mahaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Ushaakaal mein jab tum,
Udayachal aate.
Sab tab darshan paate।।
Phailaate ujiyaara
Jaagta tab jag saara.
Kare sab tab gunagaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Sandhya mein Bhuvaneshwar
Astaachal jaate.
Godhan tab ghar aate।।
Godhooli bela mein
Har ghar har aangan mein.
Ho tav mahima gaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Dev danuj nar naari
Rishi muni var bhajate.
Aditya hriday japate।।
Strot ye mangalkaari,
Iski hai rachna nyaari.
De nav jeevandaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Tum ho trikaal rachiyata,
Tum jag ke aadhaar.
Mahima tav aparampaar।।
Praanon ka sinchan karke
Bhakton ko apne dete.
Bal briddhi aur gyaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Bhoochar jal char khechar,
Sab ke ho praan tumhi.
Sab jeevon ke praan tumhi।।
Ved puraan bakhaane
Dharm sabhi tumhen maane.
Tum hi sarv shaktimaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Poojan karti dishaayein
Pooje dash dikpaal.
Tum bhuvanon ke pratipaal।।
Rituein tumhaari daasi,
Tum shaashwat avinaashi.
Shubhkaari anshmaan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan।।
*
Om Jai Surya Bhagwan,
Jai ho Dinkar Bhagwan.
Jagat ke netra swaroopa,
Tum ho trigun swaroopa।।
Dharat sab hi tav dhyaan,
Om Jai Surya Bhagwan।।
***