शनिवार, 18 अप्रैल 2026

Shri Shani Dev Aarti | जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | Lyrics in Hindi and English

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी आरती के पावन बोल पढ़ें और सुनें। यह प्रसिद्ध शनि देव आरती भगवान शनि को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। इस पोस्ट में आपको पूरी आरती के लिरिक्स, उच्चारण (transliteration) और पूजा का महत्व मिलेगा। शनिवार के दिन शनि देव की कृपा पाने, कष्टों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।
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जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
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श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
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क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
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मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
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देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव॥
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Jai Jai Shri Shanidev bhaktan hitkaari.  
Sooraj ke putra prabhu chhaya mahataari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
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Shyaam ank vakra drisht chaturbhuja dhaari.  
Neelambar dhaar naath gaj ki aswaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
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Kreet mukut sheesh rajit dipat hai lilaari.  
Muktan ki maala gale shobhit balihari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
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Modak mishthaan paan chadhat hain supari.  
Loha til tel urad mahishi ati pyaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
*
Dev danuj rishi muni sumarin nar naari.  
Vishwanaath dharat dhyaan sharan hain tumhaari.  
॥ Jai Jai Shri Shanidev॥  
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Shri Shani Dev Aarti | जय जय शनि देव महाराज | Lyrics in Hindi and English

श्री शनि देव आरती – जय जय शनि देव महाराज का पाठ और श्रवण करें। यह पवित्र आरती भगवान शनि देव को समर्पित है, जो न्याय और कर्म फल के देवता हैं। यहाँ आपको पूरी आरती के बोल, अर्थ और शनि देव की पूजा के आध्यात्मिक लाभ मिलेंगे। शनिवार पूजा के लिए विशेष रूप से उपयोगी, यह आरती जीवन के कष्टों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
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जय जय शनि देव महाराज
जन के संकट हरने वाले।
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तुम सूर्य पुत्र बलिधारी
भय मानत दुनिया सारी।
साधत हो दुर्लभ काज॥
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तुम धर्मराज के भाई
जब क्रूरता पाई।
घन गर्जन करते आवाज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
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तुम नील देव विकराली
है साँप पर करत सवारी।
कर लोह गदा रह साज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
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तुम भूपति रंक बनाओ
निर्धन स्रछंद्र घर आयो।
सब रत हो करन ममताज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
राजा को राज मितयो
निज भक्त फेर दिवायो।
जगत में हो गयी जय जयकार॥
जय जय शनि देव महाराज॥
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तुम हो स्वामी हम चरणं
सिर करत नमामी जी।
पूर्ण हो जन जन की आस॥
जय जय शनि देव महाराज॥
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जहाँ पूजा देव तिहारी
करें दीन भाव ते पारी।
अंगीकृत करो कृपाल॥
जय जय शनि देव महाराज॥
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कब सुधि दृष्टि निहरो
छमीये अपराध हमारो।
है हाथ तिहारे लाज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
हम बहुत विपत्ति घबराए
शरणागत तुम्हरी आये।
प्रभु सिद्ध करो सब काज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
यहाँ विनय करे कर जोर के
भक्त सुनावे जी।
तुम देवन के सिरताज॥
जय जय शनि देव महाराज॥
*
जय जय शनि देव महाराज
जन के संकट हरने वाले
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Jai Jai Shani Dev Maharaj  
Jan ke sankat harne wale.  
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Tum Surya putra balidhari  
Bhay manat duniya saari.  
Saadhat ho durlabh kaaj.  
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Tum Dharmaraj ke bhai  
Jab krurta paai.  
Ghan garjan karte awaaz.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum neel dev vikarali  
Hai saanp par karat sawaari.  
Kar loh gada rah saaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum bhoopati rank banao  
Nirdhan srachandra ghar aayo.  
Sab rat ho karan mamtaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Raja ko raj mitayo  
Nij bhakt pher divaayo.  
Jagat mein ho gayi jai jaikaar.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Tum ho swami hum charanam  
Sir karat namaami ji.  
Poorn ho jan jan ki aas.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Jahaan pooja dev tihaari,  
Karen deen bhaav te paari.  
Angikrit karo kripaal.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Kab sudhi drishti niharo  
Chhamiye apradh hamaro.  
Hai haath tihaare laaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Hum bahut vipatti ghabraaye  
Sharanagat tumhari aaye.  
Prabhu siddh karo sab kaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Yahaan vinay kare kar jor ke  
Bhakt sunaave ji.  
Tum devan ke sirtaaj.  
Jai Jai Shani Dev Maharaj.  
*
Jai Jai Shani Dev Maharaj  
Jan ke sankat harne wale  
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सोमवार, 16 मार्च 2026

श्री प्रेतराज चालीसा । Shri Pretraj Chalisa: प्रेतराज चालीसा के गायन से होती है हर ...। प्रेतराज चालीसा | Pretraj Chalisa मेहंदीपुर बालाजी के चमत्कार और ...

 !! दोहा !!
*
गणपति की कर वन्दना, 
गुरु चरणन चित लाए !
प्रेतराज जी का लिखूँ, 
चालीसा हरषाए !!
*
जय जय भूतादिक प्रबल, 
हरण सकल दुख भार !
वीर शिरोमणि जयति, 
जय प्रेतराज सरकार !!
*
!! चौपाई  !!
*
जय जय प्रेतराज जगपावन । 
महाप्रबल दुख ताप नसावन ।।
*
विकट वीर करुणा के सागर।  
भक्त कष्ट हर सब गुण आगर।।
*
रतन जडित सिंहासन सोहे। 
देखत सुर नर मुनि मन मोहे ।।
*
जगमग सिर पर मुकुट सुहावन। 
कानन कुण्डल अति मनभावन ।।
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धनुष किरपाण बाण अरु भाला। 
वीर वेष अति भृकुटि कराला।।
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गजारुढ संग सेना भारी। 
बाजत ढोल मृदंग जुझारी ।।
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छ्त्र चँवर पंखा सिर डोलें ।
भक्त वृन्द मिल जय जय बोलें।।
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भक्त शिरोमणि वीर प्रचण्डा। 
दुष्ट दलन शोभित भुजदण्डा ।।
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चलत सैन काँपत भु-तलहू ।  
दर्शन करत मिटत कलिमलहू।।
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घाटा मेंहदीपुर में आकर।
 प्रगटे प्रेतराज गुण सागर ।।
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लाल ध्वजा उड़ रही गगन में। 
नाचत भक्त मगन हो मन में ।।
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भक्त कामना पूरन स्वामी। 
बजरंगी के सेवक नामी ।।
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इच्छा पूरन करने वाले। 
दुख संकट सब हरने वाले ।।
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जो जिस इच्छा से हैं आते। 
मनवांछित फल सब वे हैं पाते ।।
*
रोगी सेवा में जो हैं आते। 
शीघ्र स्वस्थ होकर घर हैं जाते।।
*
भूत पिशाच जिन्‍न बैताला । 
भागे देखत रुप विकराला।।
*
भौतिक शारीरिक सब पीड़ा । 
मिटा शीघ्र करते हैं क्रीड़ा ।।
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कठिन काज जग में हैं जेते।
रटत नाम पूरा सब होते ।।
*
तन मन से सेवा जो करते। 
उनके कष्ट प्रभु सब हरते ।।
*
हे करुणामय स्वामी मेरे। 
पड़ा हुआ हूँ दर पे तेरे ।।
*
कोई तेरे सिवा ना मेरा। 
मुझे एक आश्रय प्रभु तेरा ।।
*
लज्जा मेरी हाथ तिहारे। 
पड़ा हुआ हूँ चरण सहारे।।
*
या विधि अरज करे तन-मन से।
छूटत रोग-शोक सब तन से ।।
*
मेंहदीपुर अवतार लिया है। 
भक्तों का दुख दूर किया है ।।
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रोगी पागल सन्तति हीना। 
भूत व्याधि सुत अरु धन हीना।।
*
जो जो तेरे द्वारे आते। 
मनवांछित फल पा घर जाते ।।
*
महिमा भूतल पर छाई है। 
भक्तों ने लीला गाई है ।।
*
महन्त गणेश पुरी तपधारी। 
पूजा करते तन-मन वारी ।।
*
हाथों में ले मुदगर घोटे। 
दूत खडे रहते हैं मोटे ।।
*
लाल देह सिन्दूर बदन में। 
काँपत थर-थर भूत भवन में।।
*
जो कोई प्रेतराज चालीसा। 
पाठ करे नित एक अरु बीसा।।
*
प्रातः काल स्नान करावै। 
तेल और सिन्दूर लगावै ।।
*
चन्दन इत्र फुलेल चढावै।
पुष्पन की माला पहनावै ।।
*
ले कपूर आरती उतारें। 
करें प्रार्थना जयति उचारें ।।
*
उन के सभी कष्ट कट जाते। 
हर्षित हो अपने घर जाते ।।
*
इच्छा पूरन करते जन की। 
होती सफल कामना मन की ।।
*
भक्त कष्ट हर अरि कुल घातक।
ध्यान करत छूटत सब पातक ।।
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जय जय जय प्रेताधिराज जय। 
जयति भुपति संकट हर जय ।।
*
जो नर पढत प्रेत चालीसा। 
रहत ना कबहुँ दुख लवलेशा ।।
*
कह 'सुखराम' ध्यानधर मन में। 
प्रेतराज पावन चरनन में ।।
*
!! दोहा !!
*
दुष्ट दलन जग अघ हरन। 
समन सकल भव शूल ।।
*
जयति भक्त रक्षक सबल। 
प्रेतराज सुख मूल।।
*
विमल वेश अंजनि सुवन।
प्रेतराज बल धाम ।।
*
बसहु निरन्तर मम हृदय ।  
कहत दास सुखराम ।।
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श्री बालाजी चालीसा - संपूर्ण संग्रह | Shri Balaji Chalisa | Shri Balaji Chalisa with Lyrics _ मेहंदीपुर बालाजी की चालीसा _

॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण चितलाय,
के धरें ध्यान हनुमान।
बालाजी चालीसा लिखे,
दास स्नेही कल्याण॥
विश्व विदित वर दानी,
संकट हरण हनुमान।
मैंहदीपुर में प्रगट भये,
बालाजी भगवान॥
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॥ चौपाई ॥
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जय हनुमान बालाजी देवा।
प्रगट भये यहां तीनों देवा॥
*
प्रेतराज भैरव बलवाना।
कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥
*
मैंहदीपुर अवतार लिया है।
भक्तों का उद्धार किया है॥
*
बालरूप प्रगटे हैं यहां पर।
संकट वाले आते जहाँ पर॥
*
डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं।
मशान चुड़ैल भूत भूतनीं॥
*
जाके भय ते सब भाग जाते।
स्याने भोपे यहाँ घबराते॥
*
चौकी बन्धन सब कट जाते।
दूत मिले आनन्द मनाते॥
*
सच्चा है दरबार तिहारा।
शरण पड़े सुख पावे भारा॥
*
रूप तेज बल अतुलित धामा।
सन्मुख जिनके सिय रामा॥
*
कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।
सबकी होवत पूर्ण आशा॥
*
महन्त गणेशपुरी गुणीले।
भये सुसेवक राम रंगीले॥
*
अद्भुत कला दिखाई कैसी।
कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥
*
ऊँची ध्वजा पताका नभ में।
स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥
*
धर्म सत्य का डंका बाजे।
सियाराम जय शंकर राजे॥
*
आन फिराया मुगदर घोटा।
भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥
*
राम लक्ष्मन सिय हृदय कल्याणा।
बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥
*
जय हनुमन्त हठीले देवा।
पुरी परिवार करत हैं सेवा॥
*
लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।
अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥
*
दया करे सब विधि बालाजी।
संकट हरण प्रगटे बालाजी॥
*
जय बाबा की जन जन ऊचारे।
कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥
*
बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।
तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥
*
देवन विनती की अति भारी।
छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥
*
लांघि उदधि सिया सुधि लाये।
लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥
*
रामानुज प्राण दिवाकर।
शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥
*
केशरी नन्दन दुख भव भंजन।
रामानन्द सदा सुख सन्दन॥
*
सिया राम के प्राण पियारे।
जब बाबा की भक्त ऊचारे॥
*
संकट दुख भंजन भगवाना।
दया करहु हे कृपा निधाना॥
*
सुमर बाल रूप कल्याणा।
करे मनोरथ पूर्ण कामा॥
*
अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।
भक्त जन आवे बहु भारी॥
*
मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना।
भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥
*
नृत्य करे नित न्यारे न्यारे।
रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥
*
अर्जी का आदेश मिलते ही।
भैरव भूत पकड़ते तबही॥
*
कोतवाल कप्तान कृपाणी।
प्रेतराज संकट कल्याणी॥
*
चौकी बन्धन कटते भाई।
जो जन करते हैं सेवकाई॥
*
रामदास बाल भगवन्ता।
मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥
*
जो जन बालाजी में आते।
जन्म जन्म के पाप नशाते॥
*
जल पावन लेकर घर जाते।
निर्मल हो आनन्द मनाते॥
*
क्रूर कठिन संकट भग जावे।
सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥
*
जो सत पाठ करे चालीसा।
तापर प्रसन्न होय बागीसा॥
*
कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे।
सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥
*
॥ दोहा ॥
*
मन्द बुद्धि मम जानके,
क्षमा करो गुणखान।
संकट मोचन क्षमहु मम,
दास स्नेही कल्याण॥
***

गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

जय जगदीश हरे आरती — अर्थ, इतिहास, विधि एवं आध्यात्मिक महत्व | Aarti Lyrics in Hindi and English

जानिए “जय जगदीश हरे” आरती का भाव, प्रसार और कैसे यह भक्ति जीवन में शांति एवं समृद्धि ला सकती है। जरूर पढ़ें
*
“जय जगदीश हरे” आरती हिंदू भक्ति परंपरा की अत्यंत प्रसिद्ध आरतियों में से एक है। यह आरती भगवान विष्णु / जगदीश को समर्पित है और प्रायः प्रातः और संध्या समय पूजा आयोजन में पाठ की जाती है। आरती के मूल भाव है — प्रभु की स्तुति, आश्रय प्रार्थना, भक्त की अनुग्रह याचना। यह आरती ईश्वर को अनादि, अनंत, अविनाशी, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी मानते हुए स्तुति करती है। भक्त स्वयम् को पापी, कलुषित एवं छोटा मानता है और ईश्वर से दया, आश्रय एवं मोक्ष की याचना करता है। यह आरती हमारे देश में सबसे अधिक गायी जाने वाली आरतियों में गिनी जाती है। मंदिरों, घरों, भजन मंडली और धार्मिक आयोजनों में इसे संध्या और आरती समय नियमित रूप से गाया जाता है। इसके भाव एवं सरलता से यह आम भक्तों तक भी पहुँची। यह भजन गीतप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित पुस्‍तक भजन संग्रह (पॉंचवाँ भाग) पत्र पुष्‍प से लिया गया है। इस हेतु हम पुस्‍तक के सम्‍पादक, प्रकाशक एवं लेखक के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हैं। 

*
जय जगदीश हरे 
प्रभु ! जय जगदीश हरे ! 
मायातीत, महेश्वर, 
मन-वच-बुद्धि परे ॥ जय
*
आदि, अनादि, अगोचर, 
अविचल, अविनाशी।
अतुल, अनंत, अनामय, 
अमित शक्ति-राशी ॥1॥ जय
*
अमल, अकल, अज, 
अक्षय, अव्यय, अविकारी ।
सत-चित-सुखमय, सुंदर, 
शिव, सत्ताधारी ॥2॥ जय
*
विधि, हरि, शंकर, गणपति, 
सूर्य, शक्तिरूपा ।
विश्व-चराचर तुमहीं, 
तुमहीं जग-भूपा ॥3॥ जय
*
माता-पिता-पितामह-
स्वामि-सुहृद-भर्ता ।
विश्वोत्पादक-पालक-
रक्षक-संहर्ता ।।4।। जय
*
साक्षी, शरण, सखा, प्रिय, 
प्रियतम, पूर्ण, प्रभो ।
केवल, काल, कलानिधि, 
कालातीत, विभो ॥5॥ जय
*
राम-कृष्ण, करुणामय, 
प्रेमामृत-सागर ।
मनमोहन, मुरलीधर, 
नित-नव, नटनागर ॥6॥ जय
*
सब विधि हीन, मलिनमति, 
हम अति पातकिजन ।
प्रभु-पद-विमुख अभागी, 
कलि-कलुषित तन-मन ॥7॥ जय
*
आश्रय-दान दयार्णव ! 
हम सबको दीजे ।
पाप-ताप हर हरि ! सब, 
निज-जन कर लीजे ॥ 8 ॥ जय
***

जय जगदीश हरे | जगदीश्‍वर की आरती | Aarti Lyrics in Hindi and English

***
Jai Jagdish Hare
Prabhu! Jai Jagdish Hare!
Mayateet, Maheshwar,
Man-Vach-Buddhi Pare ॥ Jai
*
Aadi, Anaadi, Agochar,
Avichal, Avinaashi.
Atul, Anant, Anamay,
Amit Shakti-Raashi ॥1॥ Jai
*
Amal, Akal, Aj,
Akshay, Avyay, Avikaari.
Sat-Chit-Sukhmay, Sundar,
Shiv, Sattadhaari ॥2॥ Jai
*
Vidhi, Hari, Shankar, Ganpati,
Surya, Shaktirupa.
Vishv-Charachar Tumheen,
Tumheen Jag-Bhoopa ॥3॥ Jai
*
Mata-Pita-Pitamah-
Swami-Suhrit-Bharta.
Vishvotpaadak-Paalak-
Rakshak-Sanharta ॥4॥ Jai
*
Saakshee, Sharan, Sakha, Priya,
Priyatam, Poorn, Prabho.
Keval, Kaal, Kalaanidhi,
Kaalateet, Vibho ॥5॥ Jai
*
Ram-Krishn, Karunamay,
Premamrit-Sagar.
Manmohan, Murlidhar,
Nit-Nav, Natnaagar ॥6॥ Jai
*
Sab Vidhi Heen, Malinmati,
Hum Ati Paatakijan.
Prabhu-Pad-Vimukh Abhaagi,
Kali-Kalushit Tan-Man ॥7॥ Jai
*
Aashray-Daan Dayaarṇav 
Hum Sabko Deeje.
Paap-Taap Har Hari! Sab,
Nij-Jan Kar Leeje ॥8॥ Jai
***