सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जयकाली कलिमलहरण | Jay Kali Kalimalharan | श्री काली चालीसा | Kali Chalisa Lyrics in Hindi

जयकाली कलिमलहरण | Jay Kali Kalimalharan | श्री काली चालीसा | Kali Chalisa Lyrics in Hindi

**
दोहा
**
जयकाली कलिमलहरण
महिमा अगम अपार
महिष मर्दिनी कालिका 
देहु अभय अपार
**
अरि मद मान मिटावन हारी। 
मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥
अष्टभुजी सुखदायक माता । 
दुष्टदलन जग में विख्याता ॥
**
भाल विशाल मुकुट छवि छाजै । 
कर में शीश शत्रु का साजै ॥
दूजे हाथ लिए मधु प्याला । 
हाथ तीसरे सोहत भाला ॥
**
चौथे खप्पर खड्ग कर पांचे । 
छठे त्रिशूल शत्रु बल जांचे ॥
सप्तम करदमकत असि प्यारी । 
शोभा अद्भुत मात तुम्हारी ॥
**
अष्टम कर भक्तन वर दाता । 
जग मनहरण रूप ये माता ॥
भक्तन में अनुरक्त भवानी । 
निशदिन रटें ॠषी-मुनि ज्ञानी ॥
**
महशक्ति अति प्रबल पुनीता । 
तू ही काली तू ही सीता ॥
पतित तारिणी हे जग पालक । 
कल्याणी पापी कुल घालक ॥
**
शेष सुरेश न पावत पारा । 
गौरी रूप धर्यो इक बारा ॥
तुम समान दाता नहिं दूजा । 
विधिवत करें भक्तजन पूजा ॥
**
रूप भयंकर जब तुम धारा । 
दुष्टदलन कीन्हेहु संहारा ॥
नाम अनेकन मात तुम्हारे । 
भक्तजनों के संकट टारे ॥
**
कलि के कष्ट कलेशन हरनी । 
भव भय मोचन मंगल करनी ॥
महिमा अगम वेद यश गावैं । 
नारद शारद पार न पावैं ॥
**
भू पर भार बढ्यौ जब भारी । 
तब तब तुम प्रकटीं महतारी ॥
आदि अनादि अभय वरदाता । 
विश्वविदित भव संकट त्राता ॥
**
कुसमय नाम तुम्हारौ लीन्हा । 
उसको सदा अभय वर दीन्हा ॥
ध्यान धरें श्रुति शेष सुरेशा । 
काल रूप लखि तुमरो भेषा ॥
**
कलुआ भैंरों संग तुम्हारे । 
अरि हित रूप भयानक धारे ॥
सेवक लांगुर रहत अगारी । 
चौसठ जोगन आज्ञाकारी ॥
**
त्रेता में रघुवर हित आई । 
दशकंधर की सैन नसाई ॥
खेला रण का खेल निराला । 
भरा मांस-मज्जा से प्याला ॥
**
रौद्र रूप लखि दानव भागे । 
कियौ गवन भवन निज त्यागे ॥
तब ऐसौ तामस चढ़ आयो । 
स्वजन विजन को भेद भुलायो ॥
**
ये बालक लखि शंकर आए । 
राह रोक चरनन में धाए ॥
तब मुख जीभ निकर जो आई । 
यही रूप प्रचलित है माई ॥
**
बाढ्यो महिषासुर मद भारी । 
पीड़ित किए सकल नर-नारी ॥
करूण पुकार सुनी भक्तन की । 
पीर मिटावन हित जन-जन की ॥
**
तब प्रगटी निज सैन समेता । 
नाम पड़ा मां महिष विजेता ॥
शुंभ निशुंभ हने छन माहीं । 
तुम सम जग दूसर कोउ नाहीं ॥
**
मान मथनहारी खल दल के । 
सदा सहायक भक्त विकल के ॥
दीन विहीन करैं नित सेवा । 
पावैं मनवांछित फल मेवा ॥
**
संकट में जो सुमिरन करहीं । 
उनके कष्ट मातु तुम हरहीं ॥
प्रेम सहित जो कीरति गावैं । 
भव बन्धन सों मुक्ती पावैं ॥
**
काली चालीसा जो पढ़हीं । 
स्वर्गलोक बिनु बंधन चढ़हीं ॥
दया दृष्टि हेरौ जगदम्बा । 
केहि कारण मां कियौ विलम्बा ॥
**
करहु मातु भक्तन रखवाली । 
जयति जयति काली कंकाली ॥
सेवक दीन अनाथ अनारी । 
भक्तिभाव युति शरण तुम्हारी ॥
**
दोहा
**
प्रेम सहित जो करे 
काली चालीसा पाठ ।
तिनकी पूरन कामना 
होय सकल जग ठाठ ॥
*****

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै हरिहर भक्ति करहुँ सन्‍तन सुख दीजै हो || Aarti Kije Raja Ramchandra ji ke ho || Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti || Lyrics in Hindi

आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै | Arati Kije Raja Ramchandra Ji Ke | RamChandra Aarti Lyrics in Hindi and English ** आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै  हरिहर भक्ति करहुँ सन्‍तन सुख दीजै हो  ** ऐजी पहली आरती पुष्‍प की माला पहली आरती पुष्‍प की माला पुष्‍प की माला हरिहर पुष्‍प की माला  कालिय नाग नाथ लाये कृष्‍ण गोपाला हो  आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै  हरिहर भक्ति करहुँ सन्‍तन सुख दीजै हो ** एजी दूसरी आरती देवकीनन्‍दन  दूसरी आरती देवकीनन्‍दन  देवकीनन्‍दन हरिहर देवकीनन्‍दन  भक्‍त उबारहिं असुर निकन्‍दन हो आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै  हरिहर भक्ति करहुँ सन्‍तन सुख दीजै हो ** एजी तीसरी आरती त्रिभुवन मोहै  तीसरी आरती त्रिभुवन मोहै त्रिभुवन मोहै हरिहर त्रिभुवन मोहै  गरुण सिंहासन राजा रामचन्द्र सोहै हो  आरती कीजै राजा रामचन्‍द्र जी कै  हरिहर भक्ति करहुँ सन्‍तन सुख दीजै हो ** एजी चौथी आरती चहुजुग पूजा  चौथी आरती चहुजुग पूजा  चहुजुग पूजा हरिहर चहुजुग पूजा  चहुजुग पूजा रामनाम और न दूजा हो  आरती कीजै राजा रामचन्‍द...

जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English श्री प्रेतराज सरकार बालाजी मंदिर में प्रेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। प्रेतराज सरकार के विग्रह पर भी चोला चढ़ाया जाता है। प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्तिभाव से उनकी आरती , चालीसा , कीर्तन , भजन आदि किए जाते हैं। बालाजी के सहायक देवता के रूप में ही प्रेतराज सरकार की आराधना की जाती है। प्रेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है।   ** ** जय प्रेतराज कृपालु मेरी ||प्रेतराज सरकार की आरती || Pretraj Sarkar Ki Aarti Lyrics in Hindi and English ** जय प्रेतराज कृपालु मेरी  अरज अब सुन लीजिये। ** मैं शरण तुम्हारी आ गया हूँ,  नाथ दर्शन दीजिये।।  ** मैं करूं विनती आपसे अब,  तुम दयामय चित धरो। ** चरणों का ले लिया आसरा,  प्रभु वेग से मेरा दुःख हरो।।  ** सिर पर मोर मुकुट कर में धनुष,  गलबीच मोतियन माल है। ** जो करे दर्शन प्रेम से सब,  कटत तन के जाल हैं।।  ** जब पहन बख्तर ले ख...

सिया रघुवर जी की आरती || Siya Raghubar Ji Ki Aarti || राम भजन || Ram Bhajan

सिया रघुवर जी की आरती || Siya Raghubar Ji Ki Aarti || राम भजन || Ram Bhajan सिया रघुवर जी की आरती , शुभ आरती कीजै। ** शीश मुकुट काने कुंडल सोहे -२ राम लखन सिया जानकी, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती , शुभ आरती कीजै। ** मोर मुकुट माथे पर सोहे -२ राधा सहित घनश्याम की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** अक्षत चंदन घी की बाती -२ उमा सहित महादेव की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** मम दुख हरणी मंगल करणी-२ आरती लक्ष्मी गणेश की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** अलख निरंजन असुर निकन्दन-२ अंजनि लला हनुमान की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ** रामदेव अउरी कुलदेवता -२ माता पिता गुरुदेव की, शुभ आरती कीजै। सिया रघुवर जी की आरती  शुभ आरती कीजै। ****