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मई, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जय अंबे गौरी || दुर्गा मैया की आरती || Durga Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi and English

जय अंबे गौरी || दुर्गा मैया की आरती || Durga Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi and English ** ** जय अंबे गौरी  मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निश दिन ध्यावत  हरि ब्रह्‌मा शिवरी॥ ** मांग सिंदूर विराजत  टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना  चन्द्रवदन नीको॥ ** कनक समान कलेवर  रक्तांबर राजे। रक्तपुष्प की माला कंठन पर साजे॥ ** केहरि वाहन राजत  खड्‌ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनि जन सेवत  तिनके दुख हारी॥ ** कानन कुंडल शोभित  नासाग्रे मोती। कोटिक चन्द्र दिवाकर  राजत सम ज्योति॥ ** शुंभ-निशुंभ बिदारे  महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना  निशदिन मदमाती॥ ** चंड-मुंड संहारे  शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे  सुर भयहीन करे॥ ** ब्रह्‌माणी, रुद्राणी  तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी  तुम शिव पटरानी॥ ** चौंसठ योगिनी मंगल गावत  नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा  अरु बाजत डमरू॥ ** तुम ही जग की माता  तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता  सुख संपति करता॥ ** भुजा चार अति शोभित  वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत  सेवत नर-नारी॥ ** कंच...

श्री हरसू ब्रह्‌म चालीसा || Shri Harsu Brahm Chalisa || हरसू ब्रह्म चैनपुर कैमूर || Harsu Brahm Chainpur Kaimur || Harsu Brahm Maharaj ji || हरसू ब्रह्‌म रूप अवतारी Harsu Brahm Rup Avatari

श्री हरसू ब्रह्‌म चालीसा || Shri Harsu Brahm Chalisa || हरसू ब्रह्म चैनपुर कैमूर || Harsu Brahm Chainpur Kaimur || Harsu Brahm Maharaj ji || हरसू ब्रह्‌म रूप अवतारी Harsu Brahm Rup Avatari ** ** बाबा हरसू ब्रह्‌म के  चरणों का करि ध्यान। चालीसा प्रस्तुत करूं  पावन यश गुण गान॥ ** हरसू ब्रह्‌म रूप अवतारी। जेहि पूजत नित नर अरु नारी॥१॥ ** शिव अनवद्य अनामय रूपा। जन मंगल हित शिला स्वरूपा॥ २॥ ** विश्व कष्ट तम नाशक जोई। ब्रह्‌म धाम मंह राजत सोई ॥३॥ ** निर्गुण निराकार जग व्यापी। प्रकट भये बन ब्रह्‌म प्रतापी॥४॥ ** अनुभव गम्य प्रकाश स्वरूपा। सोइ शिव प्रकट ब्रह्‌म के रूपा॥५॥ ** जगत प्राण जग जीवन दाता। हरसू ब्रह्‌म हुए विखयाता॥६॥ ** पालन हरण सृजन कर जोई। ब्रह्‌म रूप धरि प्रकटेउ सोई॥७॥ ** मन बच अगम अगोचर स्वामी। हरसू ब्रह्‌म सोई अन्तर्यामी॥८॥ ** भव जन्मा त्यागा सब भव रस। शित निर्लेप अमान एक रस॥९॥ ** चैनपुर सुखधाम मनोहर। जहां विराजत ब्रह्‌म निरन्तर॥१०॥ ** ब्रह्‌म तेज वर्धित तव क्षण-क्षण। प्रमुदित होत निरन्तर जन-मन॥११॥ ** द्विज द्रोही नृप को तुम नासा। आज मिटावत जन-मन त्रासा॥१२॥ ** दे संता...

आरती श्री काली मां की Aarti Kali Mata Ki

आरती श्री काली मां की Aarti Kali Mata Ki आरती श्री काली मां की मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे। सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, सन्तन के भण्डार भरे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ बुद्धि विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन परे। जब-जब भीर पड़े भक्तन पर, तब-तब आय सहाय करे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ बार-बार तैं सब जग मोह्‌यो, तरुणी रूप अनूप धरे। माता होकर पुत्र खिलावै, कहीं भार्य बन भोग करे। संतन सुखदाई सदा सहाई, सन्त खड़े जयकार करे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ ब्रह्‌मा, विष्णु, महेश फल लिए, भेंट देन तब द्वार खड़े। अटल सिंहासन बैठी माता, सिर सोने का छत्र फिरे। वार शनिश्चर कुमकुम वरणी, जब लंकुड पर हुक्म करे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ खंग खप्पर त्रिशूल हाथ लिए, रक्तबीज कूं भस्म करे। शुम्भ-निशुम्भ क्षणहिं में मारे, महिषासुर को पकड दले॥ आदितवारि आदि की वीरा, जन अपने का कष्ट हरे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाल...

अथ हरतालिका (तीज) पूजन विधि Hartalika Teej Vrat

अथ हरतालिका (तीज) पूजन विधि Hartalika Teej Vrat हरतालिका (तीज) Hartalika Teej Vrat  हरतालिका (तीज) व्रत धारण करने वाली स्त्रियां भादो महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन ब्रह्‌म मुहूर्त में जागें, नित्य कर्मों से निवृत्त होकर, उसके पश्चात तिल तथा आंवला के चूर्ण के साथ स्नान करें फिर पवित्र स्थान में आटे से चौक पूर कर केले का मण्डप बनाकर शिव पार्वती की पार्थिव-प्रतिमा (मिट्‌टी की मूर्ति) बनाकर स्थापित करें। तत्पश्चात नवीन वस्त्र धारण करके आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर देशकालादि के उच्चारण के साथ हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि मैं आज तीज के दिन शिव पार्वती का पूजन करूंगी इसके अनन्तर ''श्री गणेशाय नमः'' उच्चारण करते हुए गणेश जी का पूजन करें। ''कलशाभ्यो नमः'' से वरुणादि देवों का आवाहन करके कलश पूजन करें। चन्दनादि समर्पण करें, कलशमुद्रा दिखावें घन्टा बजावें जिससे राक्षस भाग जायं और देवताओं का शुभागमन हो, गन्ध अक्षतादि द्वारा घंटा को नमस्कार करें, दीपक को नमस्कार कर पुष्पाक्षतादि से पूजन करें, हाथ में जल लेकर पूजन सामग्री तथा अपने ऊपर जल छिड़कें। इन्द्र आदि अष...

सोलह सोमवार व्रत कथा Solah Somvar Vrat Katha Lyrics in Hindi | 16 Somvar Vrat

अथ सोलह सोमवार व्रत कथा Ath Solah Somvar Vrat Katha Lyrics in Hindi एक समय श्री महादेव जी पार्वती जी के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आये, वहां के राजा ने एक शिवजी का मंदिर बनवाया था। शंकर जी वहीं ठहर गये। एक दिन पार्वती जी शिवजी से बोली- नाथ! आइये आज चौसर खेलें। खेल प्रारंभ हुआ, उसी समय पुजारी पूजा करने को आये। पार्वती जी ने पूछा- पुजारी जी! बताइये जीत किसकी होगी? वह बाले शंकर जी की और अन्त में जीत पार्वती जी की हुई। पार्वती ने मिथ्या भाषण के कारण पुजारी जी को कोढ़ी होने का शाप दिया, पुजारी जी कोढ़ी हो गये। कुछ काल बात अप्सराएं पूजन के लिए आई और पुजारी से कोढी होने का कारण पूछा- पुजारी जी ने सब बातें बतला दीं। अप्सराएं बोली- पुजारी जी! तुम सोलह सोमवार का व्रत करो। महादेव जी तुम्हारा कष्ट दूर करेंगे। पुजारी जी ने उत्सुकता से व्रत की विधि पूछी। अप्सरा बोली- सोमवार को व्रत करें, संध्योपासनोपरान्त आधा सेर गेहूं के आटे का चूरमा तथा मिट्‌टी की तीन मूर्ति बनावें और घी, गुड , दीप, नैवेद्य, बेलपत्रादि से पूजन करें। बाद में चूरमा भगवान शंकर को अर्पण कर, प्रसादी समझ वितरित क...

अथ सोम प्रदोष कथा Ath Som Pradosh Katha Lyrics in Hindi

अथ सोम प्रदोष कथा Ath Som Pradosh Katha Lyrics in Hindi पूर्वकाल में एक विधवा ब्राह्‌मणी अपने पुत्रों को लेकर ऋषियों की आज्ञा से भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती। भिक्षा में जो मिलता उससे अपना कार्य चलाती और शिवजी का प्रदोष व्रत भी करती। एक दिन उससे विदर्भ देश का राजकुमार मिला, जिसे शत्रुओं ने राजधानी से बाहर निकाल दिया था और उसके पिता को मार दिया था। ब्राह्‌मणी ने लाकर उसका पालन किया। एक दिन राजकुमार और ब्राह्‌मण बालक ने वन में गंधर्व कन्याओं को देखा। राजकुमार अंशुमती से बात करने लगा और उसके साथ चला गया, ब्राह्‌मण बालक घर लौट आया। अंशुमती के माता-पिता ने अंशुमती का विवाह राजकुमार धर्मगुप्त के साथ कर दिया और शत्रुओं को परास्त कर विदर्भ का राजा बनाया। धर्मगुप्त को ब्राह्‌मण की याद रही और उसने ब्राह्‌मण कुमार को अपना मंत्री बना लिया। यथार्थ में यह शिवजी के प्रदोष व्रत का फल था। तभी से यह शिवजी का प्रदोष व्रत लोक प्रसिद्ध हुआ। इस व्रत के प्रभाव से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ***** यह भी पढें - भगवान भोले शंकर की स्‍तुतियॉं   सोमवार को किये जाने वाले पूजन एवं व्रत कथायें ...